अतिथि देवो भव और ग्राहक हमारा भगवान होता है, इन दोनों वाक्यों को एक में मिक्स करदो तो एक विदेशी सैलानी तैयार होता है. एक तो वो दूर देश से आया मेहमान है. दूसरावो हमारा कस्टमर भी है. तो वो भगवान का होल स्क्वायर होता है. लेकिन इन सैलानियोंपर भी नोटबंदी की मार पड़ गई है. राजस्थान में दो टूरिस्ट ग्रुप्स के पास दिल्लीवापस आने के पैसे नहीं बचे. तो उन्होंने पैसे कमाने के लिए भीड़ का मनोरंजन किया.ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस के 10- 12 लोगों के दो ग्रुप. शनिवार को पुष्कर मेंगऊ घाट के पास स्ट्रीट परफॉरमेंस करते दिखे. लड़के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाते औरलड़कियां एक्रोबेटिक स्टंट्स करते. हाथ में “You can help us” और “Money problem”वाले पोस्टर पकड़े थे. वहां आने जाने वाले लोग इनकी प्रॉब्लम समझे और काफी हेल्प करभी दी. ये लोग 8 नवंबर को इंडिया आए थे. पुष्कर मेला देखने. उसी रात हजार पनसौव्वानोट बंद हो गए. 14 तारीख को मेला खत्म हो गया. अब इनको घूम घामकर वापस जाना है.उसके लिए दिल्ली जाना है. वहां एटीएम में पैसा नहीं हैं. तो कोई रास्ता बचा नहीं.फिर इस रास्ते से तकरीबन 2600 रुपए कमाए. हिंदुस्तान टाइम्स को फ्रेंच टूरिस्टएडेलेन ने बताया. शुक्रवार को मैं और मेरा एक दोस्त तीन घंटे एसबीआई के एटीएम कीलाइन में लगे रहे. लेकिन हमारी बारी आई तो पैसा खतम हो गया. नत्थू शर्मा यहां 45साल से रह रहे हैं. छोटी सी दुकान है. कहा कि इतने सालों में पहली बार देख रहा हूंकि मेहमानों को पैसा पाने के लिए गली में परफॉर्म करना पड़ा.https://youtu.be/ZnmN1tS0R4Q?t=26 तो जब मेहमान रूपी भगवान का ये हाल है तो इंसानको ज्यादा लोड नहीं लेना चाहिए.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: सिर्फ 500 रुपये में निपट गई ये शादी और मोदी इस पर लट्टू हैं दिहाड़ीसाढ़े तीन सौ की और टर्न ओवर साढ़े तीन अरब का, कैसे?