वायरल: ये खेलों की दुनिया की सबसे ताकतवर तस्वीर है
जानिए कहां की है ये फोटो.
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फोटो - thelallantop
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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तैर रही है. और ये तस्वीर फर्जी नहीं है. इसे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किया है पोलैंड के पवेल पोलजस्की ने. ये इंटरनेशनल साइक्लिस्ट हैं और दुनिया की सबसे मुश्किल साइकिल इवेंट यानी टुअर डी फ्रांस (Tour de France) की 16वीं स्टेज पार करने पर अपनी टांगों की हालत दिखाते हुए ये तस्वीर ली है. नसें फटने को हैं. घुटने नीले पड़ गए हैं. टखने सूज गए हैं. साइकिल के पैडल पर हुई मेहनत साफ चमक रही है. इसे देख दुनिया भर में लोग हैरान हो रहे हैं. 27 साल के इस साइक्लिस्ट की इस तस्वीर से उस रेस के कठिन होने का अंदाजा लगाया जा सकता है. वो रेज जो पिछले 104 सालों से दुनिया भर से साइकिलिंग के शौकीनों को अपनी ओर खींच रही है.
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क्या है Tour de France?
ये फ्रांस में होने वाली साइकिल रेस है. हर साल होती है. साल 1903 से लगातार हो रही है. बस दो बार विश्व युद्ध के टाइम नहीं हो पाई थी. 2017 में ये 104वीं बार हो रही है. 1 जुलाई से 23 जुलाई के बीच होती है. फ्रांस समेत दुनिया भर से साइकलिस्ट इसमें भाग लेते हैं . इस बार भी 32 देशों से लोग कंपीट कर रहे हैं. जितना सुनने में आसान है, उतना असल में है नहीं. 23 दिन लंबी चलने वाली इस रेस में 3430 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है. करीब 21 स्टेज होती हैं जिन्हें पार करना होता है. कुल 198 लोग शामिल हुए हैं इस बार जिन्हें 22 टीमों में बांटा गया है. हर टीम में 9 लोग होते हैं और इनमें से एक लीडर होता है जो रेस जीतने की दावेदारी करता है. टीम के लीडर का फिजिकल इंड्योरेंस लेवल यानी वो शारीरिक रूप में कितना दमखम रखता है, की जांच की जाती है. इसके लिए हर साल नए-नए टास्ट दिए जाते हैं.
कैसे हुई शुरुआत?
Tour de France इवेंट की शुरुआत एक प्रमोशनल रेस के तौर पर साल 1903 में फ्रांस के एक पत्रकार जीओ लेफेव्रे ने अपनी मैगजीन को प्रमोट करने के लिए किया था. मैगजीन का नाम था L'Auto. आज भी टीम लीडर को पीली जर्सी पहनने का गौरव हासिल होता है. पीली इसलिए क्योंकि इस मैग्जीन के कवर का रंग भी पीला था. ये रेस इतनी पॉपुलर हुई कि इसके फॉरमेट और चैलेंज ने दुनिया भर से साइकिलिस्टों को अपनी तरफ खींचा. पहले तो फ्रांस में ही होती थी मगर फिर धीरे धीरे बगल के देश जैसे मोनेको, स्पेन और साउथ होलैंड से भी लोग साइकिल लिए इसमें शामिल होने लगे. इसका फॉर्मेट दूसरी खेलों से एकदम अलग है. करीब 180 साइकिलिस्ट इस मुकाबले में पार्टिसिपेट करते हैं और हर कोई 9 लोगों की टीम का हिस्सा होता है. हर टीम का एक लीडर होता है और बाकी के आठ लोग उस एक लीडर की हर जरूरत का ख्याल रखते हैं. जैसे खाना, ड्रिंक्स, मेडिकल हेल्प, बरसात, बर्फबारी या अन्य किसी भी हेल्प के लिए ये लोग साथ रहते हैं. टीम के बावजूद इसे जीतता वो लीडर ही है.
कुछ फैक्ट्स-
- फ्रांस ने सबसे ज्यादा 36 बार, बेल्जियम ने 18 बार, स्पेन ने 11 और अमेरिका ने 10 बार टुअर डी फ्रांस टाइटल जीता है.
- साल 1922 में 36 साल के फर्मिन लैंबोट सबसे ज्यादा उम्र वाले विनर थे जबकि 1904 में फ्रांस के हेनरी कॉरनेट ने 19 साल की उम्र में ये रेस जीती थी.
- लांस आर्मस्ट्रॉन्ग ने सबसे ज्यादा बार ये रेस जीती है. पूरे टुअर में आर्मस्ट्रॉन्ग ने 40.276 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार बनाए रखने का रिकॉर्ड बनाया. साथ ही आर्मस्ट्रॉन्ग ने ही सबसे ज्यादा बार यानी 7 बार ये रेस जीती है.
- सबसे ज्यादा बार टुअर कंप्लीट करने का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स के जूप ज़ोटेमेल्क के नाम है. इन्होंने 16 बार टुअर डी फ्रांस कम्पलीट किया है.
- बावजूद इसके कि ये रेस दुनिया की सबसे कठिन साइकिल रेस है जो अलग-अलग टेरेन से होती हुई कई मुश्किल पड़ावों से गुजरती है, इसे दुनिया की सबसे सेफ रेस भी कहा जाता है. क्योंकि 104 सालों के इसके इतिहास में सिर्फ 4 लोगों की मौत इवेंट में हुए एक्सीडेंट्स में हुई है.
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