क्या महाराणा प्रताप वाकई 300-400 किलो के अस्त्र-शस्त्र लेकर युद्ध लड़ते थे, जानिए सच्चाई
महाराणा प्रताप पर कही बात को लेकर मनीष सिसोदिया क्यों घिर गए?

राजस्थान के उदयपुर से 40 किलोमीटर दूर हल्दीघाटी का मैदान ऐतिहासिक युद्ध के लिए जाना जाता है. ये युद्ध मेवाड़ के शूरवीर महाराणा प्रताप और बादशाह अकबर के बीच हुआ था. इतिहास के पन्नों में इस युद्ध से जुड़े कई पहलू मिलते हैं. मगर आज बात युद्ध में जीत-हार की नहीं बल्कि महाराणा प्रताप की तलवार और उनके कवच पर हो रही है. सोशल मीडिया पर महाराणा की तलवार के वज़न को लेकर खूब बहस छिड़ी है.
दरअसल, 9 मई रविवार को महाराणा प्रताप की जयंती थी. उनको याद करते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है. पहले आप ये पोस्ट देखिए.
इसमें लिखा था,
ऐसी ही कुछ जानकारी आपको गूगल पर भी मिलेगी. कुछ न्यूज़ वेबसाइट पर भी आपको महाराणा प्रताप की तलवार और कवच के बारे में ऐसी जानकारी सुनने और पढ़ने को मिलेगी. मगर अब बहस इस बात पर है कि क्या सच में इतना वज़न उठाकर कोई युद्ध कर सकता है? कई लोग इस जानकारी को फेक बता रहे हैं. कईयों का कहना है कि गुणगान करने में लोग प्रकृति के गुरुत्वाकर्षण नियम को भूल गए.
वहीं एक तस्वीर और वायरल हो रही है. जो चित्तौड़गढ़ म्यूज़ियम की बताई जा रही है. इसमें महाराणा प्रताप की तलवार और अस्त्र-शस्त्र का वज़न लिखा है. उस फोटो में लिखा है,
महाराणा प्रताप की तलवार को लेकर बहुत से लोग बहुत कुछ कह रहे हैं. एक बंदे ने लिखा,
इसका जवाब होगा कि सिर्फ 27 की उम्र में राणा ने मुगलों से हाथ मिलाने से इंकार कर दिया और सम्राट अकबर के खिलाफ जंग लड़ी थी. यानी महाराणा बहादुर तो थे इसमें कोई शक नहीं है. पर ये भी सच है कि जंग ना तो राणा ने जीती, ना ही अकबर ने. मगर महाराणा की बहादुरी के नाम पर झूठी और फर्जी गप्पें मार के उनकी बहादुरी का मजाक खूब उड़वाया जाता है.
वजन वाली बात उड़ी कहां से?दरअसल, आप के नेता और दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने महाराणा प्रताप की जयंती पर पोस्ट किया था. फेसबुक पर. इसमें उन्होंने एक फोटो अटैच की थी, जिसमें महाराणा प्रताप के जन्म की तारीख, कद-काठी की लंबाई-चौड़ाई, उनके भाले का वजन, छाती का कवच और दो तलवार का भार लिखा हुआ था. आप नीचे पोस्ट में भी देख सकते हैं.
वहीं दूसरे ने लिखा-
एक यूजर ने व्यंग करते हुए लिखा अब किसकी बात सही? इस बारे में पता लगाने के लिए हमने सीधे उदयपुर संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारी भूपेंद्र सिंह आउवा (Bhupendra Singh Auwa) से बात की. उन्होंने बतायाइसका मतलब ये कि कभी-कभी फॉर्वर्ड हो रही चीज़ों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय उन्हें क्रॉस चेक कर लेना चाहिए.

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