गुजरात में बिहार मॉडल: बन रहे हैं टॉपर
बिहार टॉपर की बात हो रही है. जोक बनाए जा रहे हैं. जरा एक नजर गुजरात और महाराष्ट्र के बोर्ड पर भी डालिए. गड़बड़ी यहां भी की गई है.
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टॉपर. टॉपर. यहां टॉपर. वहां टॉपर. उसमें घोटाला और फिर पर्दाफाश. बिहार के टॉपर घोटाले को लेकर सब बात कर रहे हैं. एक्शन भी लिया जा रहा है मगर उस लड़की के खिलाफ जो अपनी मर्जी से अभी कुछ कर भी नहीं सकती है. क्योंकि अब तक सारे फैसले मां-बाप ने ही किए होंगे. किसी और की गलती की सजा भुगत रही हैं बिहार में 12th टॉपर रूबी राय. रूबी ने सोचा भी नहीं होगा कि उसे टॉपर बनने पर गिरफ्तार भी होना पड़ेगा. उस पर जोक बनाए जा रहे हैं. जरूरत सिस्टम सुधारने की है. नहीं तो बिहार ही नहीं सब जगह ऐसे घोटाले होते रहेंगे.
अब आप ही देख लीजिए. गुजरात में टॉपर घोटाला सामने आया है. वहां कोई बच्चा राय नहीं है, लेकिन जमकर गड़बड़ी की गई है. गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी एग्जाम में गड़बड़ी हुई है.
बच्चों ने लिखा: जवाब नहीं पता. फिर भी मिले नंबर!
10वीं के छात्र हैं. 80 से लेकर 90 पर्सेंट तक मार्क्स आए हैं इन बच्चों के. शक हुआ एग्जाम में नकल हुई है तो हो गई जांच. गुजरात सेकंड्री एंड हायर सेकंड्री एजुकेशन बोर्ड (GSHSEB) ने 500 स्टूडेंट की मैथ ऑब्जेक्टिव के पेपर की जांच की. रिजल्ट चौंकाने वाला था. एग्जाम में पूछे गए सवालों के जवाब सही नहीं थे. किसी स्टूडेंट ने ट्राएंगल की चार भुजा लिखी थीं तो किसी ने कुछ. कई बच्चों ने पूरी ईमानदारी दिखाई और सवाल का जवाब पता न होने की बात ही लिख डाली. फिर भी मार्क्स टॉपर वाले मिले.सब्जेक्टिव में जीरो और ऑब्जेक्टिव में 90 पर्सेंट
इन सभी स्टूडेंट के मैथ के पेपर में 80 से 85 पर्सेंट मार्क्स हैं. ये जानकर हैरानी होगी कि इन बच्चों के ऑब्जेक्टिव में 90 पर्सेंट हैं और सब्जेक्टिव में हैं जीरो. बोर्ड ऑफिसर ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए बच्चों की पहचान की और पूछताछ की.बच्चों ने टीचर्स की पोल पट्टी खोलकर रख दी. कहा- सीसीटीवी कैमरे के पीछे से टीचर सवालों के जवाब बता रहे थे.इस नकल की पीछे स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से मिलने वाला ग्रांट है, जो स्कूल के रिजल्ट के मुताबिक दिया जाता है. हो सकता है इसलिए फर्जीवाड़ा किया गया हो. यही बात बिहार में भी हुई थी.
महाराष्ट्र बोर्ड का किस्सा भी सुन लो
12th क्लास का स्टूडेंट है अमोल रामदास. महाराष्ट्र के अमरावती शिक्षा बोर्ड से एग्जाम दिया. दो पेपर में गैरहाजिर भी रहा. लेकिन बोर्ड इतना मेहरबान हुआ कि उसे उन दोनों पेपर में भी पास कर दिया. स्टूडेंट ईमानदार निकला. लगा दी बोर्ड में अर्जी खुद को फेल करने की.अमोल का कहना है: 'मेहनत के मार्क्स चाहिए. जो मार्क्स दिए गए हैं. वो बहुत कम हैं. अच्छे मार्क्स आएंगे तो अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले सकेगा.'

