अली लारिजानी कौन थे? जिन्हें इजरायल ने मार दिया
Dr Ali Larijani को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सबसे बड़े 'इनसाइडर्स' में से एक माना जाता था. वो एक ऐसे व्यक्ति थे जिनका प्रभाव राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति, तीनों क्षेत्रों में फैला हुआ था. वे ईरान के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक से आते थे, जिनकी तुलना अक्सर संयुक्त राज्य अमेरिका के केनेडी परिवार से की जाती थी.

इजरायल-अमेरिका के साथ चल रही जंग में ईरान को एक बड़ा नुकसान हुआ है. इजरायल ने दावा किया था कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारिजानी उसकी एयरस्ट्राइक में मारे गए हैं. अब खुद ईरान की ओर से भी इसकी पुष्टि हो गई है. अली लारिजानी ईरान की सबसे राजनीतिक शख्सियतों में से एक थे. साथ ही वो ईरान के सुप्रीम लीडर के भी काफी करीब थे. उनके साथ उनके बेटे और बॉडीगार्ड भी इजरायली स्ट्राइक में मारे गए हैं. उनकी मौत के बाद ईरान ने इसका बदला लेने की कसम खाई है.
उनकी मौत पर जानकारी देते हुए ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा,
‘शहीदों की पवित्र आत्माओं ने ईश्वर के सेवक, शहीद डॉ. अली लारीजानी की पवित्र आत्मा को गले लगा लिया.’
अपनी मौत से लगभग एक हफ्ते पहले, लारिजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की चेतावनी के जवाब में उन्हें कायदे से सुनाया था. उन्होंने कहा था कि ईरान का बलिदानी राष्ट्र आपके खाली खतरों से नहीं डरता है. यहां तक कि जो आपसे बड़े हैं, वे भी ईरान को खत्म नहीं कर सके. उन्होंने एक तरह से प्रेसिडेंट ट्रंप को धमकी देते हुए कहा था कि वो सावधान रहें. ऐसा न हो कि वो खुद को खत्म कर लें. इसी के बाद से वो अमेरिकन-इजरायली इंटेलिजेंस के रडार पर आ गए थे.
ईरान के टॉप लोगों में शामिल थे डॉ लारिजानीलारिजानी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सबसे बड़े 'इनसाइडर्स' (अंदरूनी लोगों) में से एक माना जाता था. वो एक ऐसे व्यक्ति थे जिनका प्रभाव राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति, तीनों क्षेत्रों में फैला हुआ था. वे ईरान के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक से आते थे, जिनकी तुलना अक्सर संयुक्त राज्य अमेरिका के केनेडी परिवार से की जाती थी. उनके भाई सादेक लारिजानी ने जूडिशियरी प्रमुख के रूप में कार्य किया, जबकि दूसरे भाई मोहम्मद जवाद लारिजानी विदेश नीति के वरिष्ठ सलाहकार थे.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अली लारिजानी का जन्म 1958 में इराक के नजफ में एक धार्मिक परिवार में हुआ था. इसके बाद वो बचपन में ही ईरान चले गए थे और इस्लामिक क्रांति के दौरान ही वे बड़े हुए. ईरान-इराक युद्ध के दौरान वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में शामिल हो गए, और बाद में उन्होंने राजनीतिक भूमिकाएं भी निभाईं. उन्होंने संस्कृति मंत्री के रूप में काम किया, सेंसरशिप को और सख्त किया, और बाद में ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर का नेतृत्व किया. समय के साथ, वे अंदरूनी मामलों के सबसे बड़े जानकार के रूप में जाने जाने लगे, जिनके ईरान के राजनीतिक और सैन्य, दोनों जगह गहरे संबंध थे. ईरान में लीडरशिप के खिलाफ जितने भी प्रोटेस्ट होते थे, उन्हें दबाने का काम डॉ लारिजानी के कहने से ही होता था. इसके अलावा वो मोरल पुलिस के भी बॉस माने जाते थे.
लारिजानी ईरानी संसद के स्पीकर रह चुके हैं.और फिलहाल वह ईरान के सिक्योरिटी चीफ का पद संभाल रहे थे. लारिजानी ने मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया और बाद में वेस्टर्न फिलॉसफी में मास्टर्स और पीएचडी पूरी की. उनका शोध प्रसिद्ध दार्शनिक इमैनुएल कांट के विचारों पर आधारित था. यही वजह है कि वो अमेरिकन सोच को बेहतर समझते थे. 2005 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें ईरान का मुख्य परमाणु वार्ताकार और सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया गया. वे ईरान की राजनीति में काफी लंबे समय से प्रभावशाली बने हुए थे.
वीडियो: दुनियादारी: कौन हैं अली लारीजानी, जिनकी मौत का दावा इजरायल ने किया?

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