साल 2018 की पांच अफवाहें जो सोशल मीडिया पर घूमती रहीं
न जाने कितने लोगों ने इन्हें सच मानकर शेयर किया. लेकिन ये झूठ थीं.

अफवाह, फेक न्यूज़, झूठी खबरें. इस साल और आने वाले कई सालों तक ये वर्ड्स ट्रेंड में रहने वाले हैं. वजह है सोशल मीडिया. जैसे-जैसे सोशल मीडिया बढ़ता जाएगा, फेक न्यूज़ का फैलाव भी बढ़ेगा. लेकिन लल्लनटॉप की पड़ताल ऐसे सभी फेक न्यूज़ को रोकने के लिए है. साल 2018 का आखिरी हिस्सा चल रहा है. ऐसे में हम लेकर आए हैं आपके लिए इस साल की 5 बड़ी फेक न्यूज़, जिनका लल्लनटॉप ने पर्दाफाश किया.
1. देश के विकास के लिए टैक्स भरने वालों के नाम पर झूठ
क्या था दावा- भारत की जनसंख्या करीब 132 करोड़ है. इतनी बड़ी आबादी का बस 1.07 % हिस्सा मतलब 2.05 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स भरते हैं. 5.42 करोड़ लोग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं. इन दोनों चीजों को सरल शब्दों में समझ सकते हैं कि इनकम टैक्स मतलब कमाई पर सरकार को दिया गया टैक्स. इनकम टैक्स रिटर्न मतलब सरकार को अपनी कमाई बताना और अपने हिस्से से ज्यादा भरे गए टैक्स को वापस मांगना. इनकम टैक्स वही भर सकते हैं जो इनकम टैक्स लिमिट में आते हैं जबकि रिटर्न कोई भी फाइल कर सकता है. इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक मेसेज वायरल हो रहा है. इस मेसेज में लिखा है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मौत होने पर सरकार उसके परिवार को व्यक्ति की आय का 10 गुना मुआवजा देने को बाध्य है.

मेसेज जो इस अफवाह को पुष्ट कर रहा था.
सच्चाई क्या निकली?
इस मेसेज की सच्चाई पता करने के लिए हमने टैक्सेशन एक्सपर्ट और सीए अभिषेक गुप्ता से बात की. अभिषेक अभी बी छावछारिया कंपनी में पार्टनर हैं. उन्होंने बताया-
इनकम टैक्स और उससे जुड़े मामले आईटी एक्ट के अंतर्गत आते हैं. आईटी एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत सरकार एक्सिडेंटल डेथ के मामले में इनकम टैक्स रिटर्न के आधार पर मुआवजा देने के लिए बाध्य हो. सरकार इनकम टैक्स के आधार पर कोई मुआवजा नहीं देगी. एक्सिडेंटल डेथ के मामले में इश्योरेंस क्लेम किया जाता है. क्लेम सेटल करने के लिए मोटर व्हीकल ट्राइब्यूनल में केस चलता है. यह ट्राइब्यूनल एक अदालत की तरह काम करता है. और मुआवजे की राशि तय करता है. इस मुआवजे की राशि को तय करते समय मारे गए व्यक्ति की आय को भी एक पैमाना माना जाता है. लेकिन इस ट्राइब्यूनल में सरकार कोई पार्टी नहीं होती है. इसलिए सरकार का इससे लेना-देना नहीं होता है. यह केस इंश्योरेंस कंपनी और पीड़ित पक्ष के बीच होता है.
हमारी पड़ताल में यह मेसेज गलत निकला. एक्सिडेंटल डेथ के किसी भी मामले में सरकार इनकम टैक्स रिटर्न के आधार पर मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होती है.
ये पूरा आर्टिकल आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.
2. केमिकल से दूध बनाने का वीडियो भी खूब चला
क्या दावा था वायरल वीडियो में- एक आधा-अधूरा आदमी दिखता है. अधूरा इसलिए कि उसका बस हाथ दिखता है वीडियो में. एक ड्रम सी चीज रखी है. उसके ऊपर स्टील के दो ग्लास हैं. एक कांच की बोतल है. उस टाइप की, जिसमें देसी दारू आती है. इस बोतल के अंदर गाढ़े भूरे रंग का लिक्विड है कोई. वीडियो में दिख रहा आदमी बोतल से थोड़ा सा लिक्विड लेकर ग्लास में डालता है. फिर पास में रखे एक मग से उस ग्लास में थोड़ा पानी मिलाता है. पानी डालते ही वो लिक्विड दूधिया सफेद रंग का हो जाता है. फिर वो पास में रखे दूसरे ग्लास में वो दूधिया लिक्विड उड़ेलता है. फिर फिल्टर कॉफी बनाने के स्टाइल में इस ग्लास से उस ग्लास में ट्रांसफर करता रहता है. देखने में ये चीज बिल्कुल दूध सी लगती है. वीडियो के आखिर में कैमरा ग्लास में रखे लिक्विड का क्लोजअप शॉट लेता है.
दूध नही जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर लेकिन खपत 64 करोड़ लीटर... WHO की चेतावनी - बंद नही हुई मिलावट तो 87% भारतीयों को 2025 तक होगा कैंसर... इस तरह का दूध है हम आज कल, खास कर शहरों में, सम्भल जाआे या कर लो स्वर्गलोक की तैयारी
Posted by Narwana HR-32
on Monday, October 8, 2018
इसकी सच्चाई क्या निकली?
वीडियो में दिख रही बाकी चीजें (एक जोड़ी हाथ, बोतल, ग्लास, मग, पानी, लिक्विड, दूधिया पानी) इन सबके बारे में बात कर ली. लेकिन एक और जरूरी चीज है इसमें. वो ड्रम जिसके ऊपर ये सारा कारनामा हो रहा है, उसके ऊपर एक नाम-पता लिखा है.
GIDC इंडस्ट्रियल एस्टेट, जिला भरूच.
एक नंबर भी है- 393002. हमने ये नंबर गूगल सर्च किया. मालूम चला कि ये गुजरात के एक इलाके का पिन कोड है. ये भरूच जिले के अंकलेश्वर का पोस्टल कोड है. यानी ये ड्रम इस इलाके का है. अब इसके ऊपर जो GIDC लिखा है, उसका फुल फॉर्म होता है- गुजरात इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन. इसको एक बड़ा सा इंडस्ट्रियल एरिया समझ लीजिए. GIDC गुजरात में कई जगह है. एक अंकलेश्वर में भी है. हमने वहां पीपी शेठ से बात की. पता चला कि ऐसे ड्रम्स अक्सर केमिकल भरने और इधर-उधर भेजने के काम आते हैं. ड्रम के ऊपर GIDC के साथ अंकलेश्वर का पिन कोड लिखा होने का मतलब है कि ये कहीं से पैक होकर यहां भेजा गया होगा. हजारों केमिकल प्लांट्स हैं यहां पर. हो सकता है ऐसे किसी प्लांट या किसी डीलर के यहां केमिकल में पानी मिलाकर उसका विडियो बनाया गया हो. ज्यादा संभावना तो यही लगती है.
ये पूरा आर्टिकल आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.
3. अमृतसर ट्रेन हादसे वाले ट्रेन के लोको पायलट के नाम पर फैला झूठ
अमृतसर ट्रेन हादसे के तुरंत बाद ज़िम्मेदारी तय करने की राजनीति शुरू हो गई थी. मरने वालों की लाशें अभी पूरी तरह ट्रैक से हटाई भी नहीं गई थीं कि खेमों में बंटे लोग एक दूसरे की पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराने लगे थे. इसे भी हमारे मुल्क की बदकिस्मती समझ के कबूल लिया लोगों ने. लेकिन इसके बाद जो सोशल मीडिया पर हुआ वो बेहद ही बुरा था. कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ड्राइवर का नाम इम्तियाज अली था. यानी की ड्राइवर मुसलमान था. और जब ड्राइवर मुसलमान था तो ज़ाहिर सी बात था जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण एक्सीडेंट नहीं, बल्कि हत्याकांड था. जानबूझकर मुसलमानों ने हिंदुओं को मार डाला था. कुल मिलाकर ये दुर्घटना नहीं साजिश था, जिहाद था, हिंदुओं पर हमला था. कुछ लोगों ने लोकोपायलट का नाम मनोज मिश्रा बताया और इसे आरक्षण वाली डिबेट से जोड़ने की कोशिश की.

ट्रेन हादसे में भी लोगों ने इस तरह अपने एजेंडे को साधने की कोशिश की.
सच्चाई क्या निकली?
लोकोपायलट का नाम अरविंद कुमार था. इस पूरे हादसे का किसी जाति-धर्म से कोई लेना-देना नहीं था. ये बस एक हादसा था. लेकिन सोशल मीडिया पर गंदगी फैलाने वाले लोगों ने अपने-अपने एजेंडे के हिसाब से इसे सर्कुलेट किया.

लोकोपायलट द्वारा रेलवे को दी गई रिपोर्ट.
ये पूरा आर्टिकल आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.
4. सूअर और इंसान के मेल से पैदा हुए बच्चे का झूठ
क्या था वायरल दावा- सोशल मीडिया पर कुछ फोटोज वायरल हुए. इन फोटोज में एक इंसान का बच्चा दिखाई दे रहा था जिसके हाथ, पैर और मुंह की बनावट किसी जानवर के जैसी ही थी. इसके शरीर पर कुछ लंबे बाल दिख रहे थे और पूंछ भी दिखाई दे रही थी. इस फोटो के यह मेसेज चला कि एक मादा सूअर ने इंसानी बच्चे को जन्म दिया. हर जगह ये मेसेज अलग-अलग जगह के नाम के साथ वायरल होने लगा था.

सोशल मीडिया पर वायरल हुईं फोटोज.
सच्चाई क्या निकली?
इन फोटोज की पड़ताल करने पर पता चला कि यह कोई असली जानवर की फोटो नहीं हैं. यह एक आर्ट पीस है. मतलब इसे बस दिखाने के लिए बनाया गया है. ये कहीं से पैदा नहीं हुआ है. यह एट्सी शॉप (Etsy.com) नाम की वेबसाइट पर बेचा गया था. यह ऑनलाइन सामान खरीदने की वेबसाइट है जिस पर कई तरह की चीजें बेची जाती हैं. इस वेबसाइट पर बेचे गए इस आर्ट पीस का नाम ‘पिग हाइब्रिड’ मतलब सूअर के साथ किसी और प्रजाति के मिलन से पैदा हुआ बच्चा रखा गया था. इसे सिलिकॉन के पेस्ट से बनाया गया था. इस आर्ट पीस के फोटोज एक फार्मयार्ड मतलब जहां जानवर रहते हैं, की तरह सजाकर खींचे गए. इसमें इस आर्ट पीस को एक सूअर के पास रख कर भी फोटो खींचा गया. इस आर्ट पीस को मंगानुको लायरा ने बनाया है. लायरा इस तरह के बहुत सारे आर्ट पीस बनाती हैं. और इस वेबसाइट पर बेचती हैं. इनके कुछ और आर्ट पीस की तस्वीरें नीचे देख सकते हैं. इससे पहले भी लायरा का एक आर्ट वर्क चंदौली के फार्महाउस में एलियन होना बताया जा चुका है.
ये आर्टिकल आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.
5. जब कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर चलने लगा फ्रॉड
दावा क्या था?
सोनी टीवी पर आने वाले गेम शो कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया पर खूब फेक न्यूज़ फैलाई गई. लोगों को दूसरे देशों या अपने ही देश के नंबर से वॉट्सऐप पर मेसेज आता कि आपने कौन बनेगा करोड़पति में पैसे जीते हैं. ये पैसे कुछ ट्रांजिक्शन फीस को देने के बाद आपके खाते में जमा करवा दिए जाएंगे. कुछ लोग इनके झांसे में आ जाते और ऐसा कर देते. पैसा जमा कराने के बाद ये रफू चक्कर हो जाते है. पैसे जमा न करवाने की स्थिति में मेसेज करने वाले लोग धमकी देने लगते.

केबीसी के नाम पर चले फेक मेसेजेज.
सच्चाई क्या थी?
सोनी टीवी ने टीवी पर डिस्क्लेमर मतलब संदेशा चलाया कि KBC के सिलसिले में सोनी टीवी कभी भी वॉट्सऐप के थ्रू कॉन्टैक्ट नहीं करता. साथ ही लोगों को भी एक बात सोचनी चाहिए कि सोनी चैनल इंडिया का, शो शूट इंडिया में हो रहा है, इसमें हिस्सा लेने वाले भी भारतीय तो इसकी तरफ से आने वाले कॉल या मेसेज किसी दूसरे देश के नंबर से क्यों आएंगे. इसलिए ऐसे फर्जी कॉल्स और मेसेजेज से सावधान रहें. और ऐसे किसी भी कॉल या मेसेज के मिलने पर इसकी शिकायत पुलिस में करें. नागपुर पुलिस ने ट्वीट कर लोगों को इस तरह के फ्रॉड्स के बारे में सावधान रहने की सलाह दी है.
ये पूरा आर्टिकल आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.
ये इस साल चलीं कुछ अफवाहें थीं जो सोशल मीडिया पर घूमती रहीं. सोशल मीडिया पर चलने वाली फेक न्यूज़ को रोकने के लिए दी लल्लनटॉप ने तीन राज्यों की चुनाव यात्राओं के दौरान लोगों को फेक न्यूज़ रोकने के बारे में जानकारी दी. इसके बाद भी अगर आपके पास ऐसी कोई पोस्ट, फोटो, वीडियो या मैसेज है जिस पर आपको शक है तो आप उसे lallantopmail@gmail.com, फेसबुक पर हमारे वेरिफाइड पेज The Lallantop और हमारे वेरिफाइड ट्विटर हैंडल @TheLallantop पर भेज सकते हैं. हम उसकी पड़ताल कर सच्चाई पता करेंगे.
वीडियो-क्या राजस्थान में कांग्रेस के जीतते ही जोधपुर में सड़कों पर तोड़फोड़ की गई? p>

