ये कहां आ गए हम, यूं शिकार करते करते
बाघ बाबू बंदर का पीछा करते हुए पेड़ पर चढ़ गए. और फुनगी पर पहुंच के नीचे पसर गए. क्योंकि बाघ पेड़ पर चढ़ने के लिए नहीं बने होते.
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फोटो - thelallantop
हमारे गांव में एक डॉक्टर लक्कड़ रहते हैं. दोनों नाम उनकी किसी डिग्री से नहीं मिले. लक्कड़ इसलिए क्योंकि बचपन से पेड़ों पर चढ़ने का शौक है. डॉक्टर इसलिए कि अपनी पतोहू को बुखार का इंजेक्शन लगाकर मार दिए थे. उनकी तमाम क्वालिटीज में से एक है कि पेड़ पर दौड़कर विषखोपड़ा पकड़ लेते हैं. ये बाघ भी अपने को डॉक्टर लक्कड़ समझ लिया था. बंदर को पकड़ने उसके पीछे पेड़ पर चढ़ गया.
ये वीडियो श्रीलंका से चला है. पेड़ किस चीज का है पता नहीं लेकिन कितना मजबूत और घना है. तो बंदरू चढ़ लिए इसकी फुनगी पर. और बाघ उसके पीछे पीछे चढ़ आया. आमतौर पर बाघ पेड़ पर नहीं चढ़ते. तेंदुए चढ़ जाते हैं. लेकिन इसके खून में शायद एडवेंचर है या पेट में भूख. तभी वो फुनगी पर आ गया.
लेकिन बंदरवा की प्रैक्टिस है. वो दूसरी डाल पर कूद गया. बाघ बाबू लटककर टपक गए. नीचे देखो कैसा खिसियाए पड़े हैं.
https://youtu.be/ZyAv2F62Y2g
ये देखने के बाद वो मगरमच्छ और बंदर वाली कहानी भी याद आ गई होगी. है कि न?

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