पाकिस्तान की एक कहानी वायरल हो रही है. 'डॉन उर्दू' की रिपोर्ट है. हम कुछ नहींकहेंगे, बस उस रिपोर्ट की स्क्रिप्ट जस की तस लिख देते हैं.--------------------------------------------------------------------------------कम बच्चे खुशहाल घराना. ज्यादा बच्चे बदहाल घराना. जी नहीं. क्वेटा के पास के रहनेवाले जान मोहम्मद ने इस मखौले को गलत साबित कर दिया है. पेशे के लिहाज से डॉक्टर औरताजिर जान मोहम्मद ने तीन शादियां की हैं और ख़ैर से पूरे तैंतीस बच्चों के अब्बाहैं. सारे बच्चे 'फिट-फाट' हैं और मज़े से रह रहे हैं. वह कहते हैं, 'मेरे सारेबच्चे आप देखिए, बिल्कुल तंदरुस्त हैं. इनकी ख़िदमत मैं ख़ुद करता हूं.' बच्चेज़्यादा हों तो बाप चिड़चिड़ा हो जाता है, चेहरे पर परेशानी की लकीरें नज़र आनेलगती हैं. लेकिन जान मोहम्मद के साथ ऐसा कुछ नहीं. नरमगो भी हैं और ख़ुशगुफ्तार भी.तीन बीवियों से 14 बच्चे और 19 नन्ही साहबज़ादियां हैं. उनके साथ क्रिकेट खेलतेहैं. उन्हें झूला झुलाते हैं. बस एक छोटा सा मसला है. बच्चों के नाम भूल जाते हैं.बच्चे से पूछते हैं, 'माशाअल्लाह आप मोहम्मद हैं? इनका नाम मोहम्मद है जो मेरेसामने बैठे हैं.' बच्चे और बीवियां सब्जी या दाल के मुकाबले में गोश्त शौक से खातेहैं. वह बताते हैं, '20 दिन के बाद मैं दुम्बा या बकरी ले आता हूं. जिबह कर लेताहूं. कोशिश करते हैं कि अपने हाथ का गोश्त ज्यादा खाएं.' शगुफ्ता नसरीन जान मोहम्मदकी सबसे लाडली बड़ी बेटी है. उनकी तीन शादियां हो चुकी हैं. रिपोर्टर जब उनके सामनेयह कहता है कि सरदार डॉक्टर जान मोहम्मद अब तक खुद को जवान समझते हैं और चौथी शादीकी तैयारी में हैं. इस पर जान मोहम्मद कहते हैं, 'इंशाअल्लाह.'https://www.youtube.com/watch?v=7wVICSoYR_4