सोशल मीडिया पर बच्चों के बीच आपसी शर्तों और चुनौतियों का ये ट्रेंड ख़ौफनाक रूप ले रहा है
नोएडा के स्टूडेंट्स ने स्नैप चैट पर अपलोड करने के लिए थप्पड़ मारते बनाया वीडियो, डिप्रेशन में है स्टूडेंट.
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थप्पड़ की वजह से बच्चे को 25 पहले से कम सुनाई दे रहा है.
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हद हो गई भाई. इंटरनेट क्या न करवा दे. बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसके आदी हो चुके हैं. वो इससे अच्छी और बुरी दोनों ही चीजें लेते हैं और अपने मनमाफिक इस्तेमाल करते हैं. बड़े हैं तो फेक न्यूज और फोटोशॉप का इस्तेमाल कर प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं. बच्चे ब्लू वेल जैसा गेम खेलकर जान दे रहे हैं. कुछ और भी हैं जो इंटरनेट पर चल रहे वीडियो को देखकर उसकी नकल की कोशिश करते हैं. इसमें वो कुछ ऐसा गलत कर जाते हैं कि उनके साथ उनके परिवार को भी शर्मिंदगी उठानी है.

जिस बच्चे को थप्पड़ मारा गया है, वो ग्रुप के सामने हाथ जोड़े खड़ा रहा.
जोरदार थप्पड़ खाने के बाद बच्चे का कान डैमेज हो गया है. डॉक्टरों की मानें तो बच्चे को 25 फीसदी तक सुनाई देना कम हो गया है. वह डिप्रेशन में भी है और स्कूल भी जाने से इनकार कर रहा है. बच्चे की मां का कहना है कि हादसे के बाद से ही उसने खाना-पीना बंद कर दिया है. वो लगातार रो रहा है और उसे नींद भी नहीं आ रही है. घटना चार सितंबर की है, जब स्कूल की छुट्टी हो गई थी और बच्चे अपने घरों को जाने के लिए स्कूल बैग कंधों पर लादकर निकल रहे थे. मामले की जानकारी स्कूल प्रबंधन को होती है, जिसके बाद थप्पड़ मारने वाले छात्र को एक महीने के लिए और उसका साथ देने वाले छात्रों को एक-एक सप्ताह के लिए स्कूल से निकाल दिया जाता है. स्कूल प्रबंधन बच्चों को स्कूल में फोन लाने के लिए नई शर्तें भी लगा देता है. इसके मुताबिक स्मार्ट फोन पर रोक लगा दी गई है. बच्चे फोन लेकर आएंगे तो जब तक क्लास चलेगी, फोन टीचर के पास रहेगा. क्लास ओवर होने के बाद ही फोन बच्चों को हैंडओवर किया जाएगा.
ब्लू वेल गेम से अब तक 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
इंटरनेट पर बहुत तेजी से वायरल हुआ ब्लू वेल गेम अब तक पूरी दुनिया में 300 से अधिक बच्चों की मौत की वजह बन चुका है. इस ब्लू वेल गेम को जिन बच्चों ने खेला होगा या खेलने की कोशिश की होगी, उन सबका मकसद हैव फन ही रहा होगा. जिस बच्चे ने अपने साथी को थप्पड़ मारा है, उसका भी मकसद हैव फन ही रहा होगा. लेकिन ये हैव फन कब जानलेवा बन जाता है, बच्चों को अंदाजा भी नहीं होता. उस बच्चे के वीडियो बनाने के चक्कर में उसका साथी अपना कान डैमेज करवा चुका है और डिप्रेशन में चला गया है. इंटरनेट पर चल रहे वीडियो या फिर खतरनाक स्टंट को देखकर बच्चे उसे कॉपी करने की कोशिश करते हैं और ऐसे में उनकी जान पर बन आती है. ऐसे में पैरेंट्स और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि इंटरनेट पर चल रहे कंटेंट में अच्छा क्या है और बुरा क्या, इसकी समझ बच्चों में डेवलप करनी चाहिए. ऐसा होने पर ही हम अपने बच्चों को एक बेहतर समाज बनाने के लिए तैयार कर सकेंगे.
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स्नैप चैट पर करना था अपलोड
हालिया मामला नोएडा का है. स्नैप चैट पर अपलोड करने के लिए एक स्कूल के बच्चों ने अपने ही साथी को थप्पड़ मारते हुए वीडियो बना लिया है. 26 सेकेंड का ये वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन भी बैकफुट पर है. स्कूल का नाम पाथवेज है, जो नोएडा के सेक्टर 100 में है. वीडियो में जो दिख रहा है, उसके मुताबिक तीन स्टूडेंट अपने एक साथी को स्कूल के बाथरूम में ले जाते हैं. वहां ग्रुप का ही एक लड़का बच्चे की गाल पर थप्पड़ मारने की प्रैक्टिस करता है और चार बार की प्रैक्टिस के बाद एक जोरदार थप्पड़ मार देता है. दूसरे छात्र इसका वीडियो बनाकर स्नैप चैट पर अपलोड कर देते हैं. वहां से डाउनलोड होने के बाद ये वीडियो वॉट्सऐप के लिए जरिए लोगों के मोबाइल तक पहुंच रहा है.डैमेज हो गया है बच्चे का कान

जिस बच्चे को थप्पड़ मारा गया है, वो ग्रुप के सामने हाथ जोड़े खड़ा रहा.
जोरदार थप्पड़ खाने के बाद बच्चे का कान डैमेज हो गया है. डॉक्टरों की मानें तो बच्चे को 25 फीसदी तक सुनाई देना कम हो गया है. वह डिप्रेशन में भी है और स्कूल भी जाने से इनकार कर रहा है. बच्चे की मां का कहना है कि हादसे के बाद से ही उसने खाना-पीना बंद कर दिया है. वो लगातार रो रहा है और उसे नींद भी नहीं आ रही है. घटना चार सितंबर की है, जब स्कूल की छुट्टी हो गई थी और बच्चे अपने घरों को जाने के लिए स्कूल बैग कंधों पर लादकर निकल रहे थे. मामले की जानकारी स्कूल प्रबंधन को होती है, जिसके बाद थप्पड़ मारने वाले छात्र को एक महीने के लिए और उसका साथ देने वाले छात्रों को एक-एक सप्ताह के लिए स्कूल से निकाल दिया जाता है. स्कूल प्रबंधन बच्चों को स्कूल में फोन लाने के लिए नई शर्तें भी लगा देता है. इसके मुताबिक स्मार्ट फोन पर रोक लगा दी गई है. बच्चे फोन लेकर आएंगे तो जब तक क्लास चलेगी, फोन टीचर के पास रहेगा. क्लास ओवर होने के बाद ही फोन बच्चों को हैंडओवर किया जाएगा.
हैव फन के चक्कर में जान तक गंवा देते हैं

ब्लू वेल गेम से अब तक 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.
इंटरनेट पर बहुत तेजी से वायरल हुआ ब्लू वेल गेम अब तक पूरी दुनिया में 300 से अधिक बच्चों की मौत की वजह बन चुका है. इस ब्लू वेल गेम को जिन बच्चों ने खेला होगा या खेलने की कोशिश की होगी, उन सबका मकसद हैव फन ही रहा होगा. जिस बच्चे ने अपने साथी को थप्पड़ मारा है, उसका भी मकसद हैव फन ही रहा होगा. लेकिन ये हैव फन कब जानलेवा बन जाता है, बच्चों को अंदाजा भी नहीं होता. उस बच्चे के वीडियो बनाने के चक्कर में उसका साथी अपना कान डैमेज करवा चुका है और डिप्रेशन में चला गया है. इंटरनेट पर चल रहे वीडियो या फिर खतरनाक स्टंट को देखकर बच्चे उसे कॉपी करने की कोशिश करते हैं और ऐसे में उनकी जान पर बन आती है. ऐसे में पैरेंट्स और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि इंटरनेट पर चल रहे कंटेंट में अच्छा क्या है और बुरा क्या, इसकी समझ बच्चों में डेवलप करनी चाहिए. ऐसा होने पर ही हम अपने बच्चों को एक बेहतर समाज बनाने के लिए तैयार कर सकेंगे.
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