आइसलैंड एक एेसा देश है जो हमें हैरान करता है. इसके बारे में ज्यादा से ज्यादापढ़ना और जानना चाहिए. अभी बात कर रहे हैं यहां के सबसे बड़े मामले की. इस वजह सेपूरा देश शोक में है. यहां बीते दिनों राजधानी रेकेविक से एक लड़की लापता हो गई.पूरे देश के लोग सकते में आ गए क्योंकि उनके लिए ये यकीन न होने वाली बात थीक्योंकि यहां कभी कोई गायब नहीं होता है. सैकड़ों वॉलंटियर्स उसकी खोजबीन में लगाएगए. ये आइसलैंड के इतिहास का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन था. फिर 22 जनवरी को खबर आईजिसने आइसलैंड के लोगों को शॉक कर दिया. उस लड़की का कत्ल किया गया था. यहां किसीका कत्ल होना भी यकीन न होने वाली बात है.बिरना. (फोटोः ग्लोबल न्यूज़)हुआ ये था कि 20 साल की बिरना 14 जनवरी की सुबह रेकेविक के एक बार से निकलीं. इसकेबाद उन्हें नहीं देखा गया. बाद में उनके जूते बंदरगाह पर मिले जहां ग्रीनलैंड सेआया एक फिशिंग ट्रॉलर लंगर डाले खड़ा था. ये ट्रॉलर बिरना के गायब होने के ठीक बादसमंदर की ओर चल दिया. लेकिन पुलिस हैलिकॉप्टर में उस तक पहुंची और दो जहाज़ियों कोपूछताछ के लिए ले आई. बाद में पुलिस ने उस कार को भी ढूंढ निकाला जो बिरना के गायबहोने की जगह खड़ी देखी गई थी. ये कार इन्हीं जहाज़ियों ने किराए पर ली थी. इसमेंबिरना के खून के निशान भी मिले. इसके बाद रेकेविक के एक तट से उसकी लाश मिली. तब सेआइसलैंड में राष्ट्रीय शोक का माहौल है. जांच आगे बढ़ रही है. भारत या दुनिया केअन्य देशों में लोगों का मरना आम है लेकिन आइसलैंड के लिए हर अपराध एक तरीके सेअभूतपूर्व होता है. ये भी था. क्योंकि आइसलैंड दुनिया की सबसे कम क्राइम रेट वालीजगहों में आता है. छोटी सी आबादी वाले इस देश में लोग कैफे जाते हैं तो अपने बच्चोंको उनकी छोटी गाड़ी प्रैम में बाहर छोड़ देते हैं, और कभी कोई अनहोनी नहीं होती.वहां के लोग अपनी जान और अस्तित्व को लेकर इतने आश्वस्त हैं जितने शायद ही कहींहोंगे. इतने में अंदाजा होता है कि आइसलैंड में सोशल सेक्योरिटी का स्तर कितना ऊंचाहै.क्राइम होते ही नहीं हैंआइसलैंड में साल में एक लाख की आबादी पर 2 से भी कम मर्डर के मामले सामने आते हैं.यहां तक कि 2003, 2006 और 2008 जैसे वर्षों में तो एक भी मर्डर नहीं हुआ. जानकरविश्वास नहीं होता. यहां बाकी अपराध भी न के बराबर हैं.लेकिन बंदूकें भी बहुत हैंयहां की आबादी 3.30 लाख से कुछ ज़्यादा है और 90,000 से ज़्यादा लोगों के पासबंदूकें हैं. बंदूकें रखने के मामले में आइसलैंड दुनिया में 15वें नंबर पर आता है.लेकिन ऐसा नहीं कि किसी को भी हथियार बांट दिया जाता है. यहां बंदूक लेने से पहलेबाकायदा मेडिकल जांच करवानी पड़ती है और टेस्ट देना पड़ता है.पुलिस हथियार नहीं रखतीफोटोः बोर्डपांडाअमेरिका में पुलिस बात बाद में करती है गोली पहले मारती है, ठीक उसके उलट आइसलैंडमें पुलिस बिना हथियार ड्यूटी करती है. हथियार सिर्फ पुलिस की स्पेशल फोर्स के पासहोते हैं जिन्हें वाइकिंग स्कॉड कहा जाता है और उन्हें बिरले ही बुलाया जाता है.दिसंबर 2013 में पुलिस ने एक आदमी को गोली मारी और उसकी मौत हो गई थी, तो येआइसलैंड के इतिहास में ऐसा पहला मामला था.फौज भी नहीं है यहांआइसलैंड उन कुछ देशों में शुमार है जहां फौज है ही नहीं. अटलांटिक महासागर के बीचबसा देश है इसलिए यहां कोस्ट गार्ड है. ये फोर्स यहां फौज की भूमिका भी निभाती है.वैसे आइसलैंड नाटो का सदस्य देश है और नाटो के सदस्य देश उसका 'ध्यान' रखते हैं.इस वजह से क्राइम कम हैंपक्का-पक्का तो किसी को नहीं मालूम कि आइसलैंड में क्राइम रेट कम क्यों है लेकिनकुछ लोग इसकी वजह आइसलैंड के क्लास सिस्टम में ढूंढते हैं. बीबीसी वर्ल्ड परप्रकाशित अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिज़ौरी की एक स्टडी के मुताबिक आइसलैंड मेंसिर्फ 1.1 फीसदी लोग खुद को अपर क्लास मानते हैं. इसके अलावा बमुश्किल 1.5 फीसदीलोग खुद को लोअर क्लास मानते हैं. बाकी 97 फीसदी लोग खुद को मिडल क्लास या वर्किंगक्लास मानते हैं. समाज में वर्ग भेद अपराध की बड़ी वजह होता है और आइसलैंड में येअंतर न के बराबर है.तो समझने वाली बात ये है कि आइसलैंड बस बर्फ के बीहड़ों वाला टूरिस्ट डेस्टिनेशननहीं है जहां आप नॉर्दर्न लाइट्स देखने जाया करते हैं, ये एक ऐसा समाज भी है जहांसे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं.नॉर्दर्न लाइट्स. (फोटोः रॉयटर्स)-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंःछोटे छोटे कई चांद टकराए तब बना है ये धरती का चांद!जल्दी ही खेतों में तकरीबन हाथी के बराबर की गौमाता चरती मिलेंगी20 साल का लड़का प्रेग्नेंट हो गया, प्रेगनेंसी का सोलहवां सप्ताह चल रहा हैआइसबर्ग की टक्कर से नहीं जलकर डूबा था टाईटैनिक