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पंजाब-हरियाणा में बौने पैदा हो रहे हैं धान के पौधे, ये वजह आई सामने

इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इन्स्टीट्यूट (IARI) ने इस बारे में एक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्रालय को सौंपी है.

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29 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 29 अगस्त 2022, 01:55 AM IST)
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धान के पौधों की सांकेतिक फोटो (फोटो: आज तक)
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पंजाब और हरियाणा (Punjab And Haryana) के कुछ इलाकों में धान के पौधे बौने पैदा हो रहे हैं. इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इन्स्टीट्यूट(IARI) ने धान के ऐसे 24 खेतों का सर्वे किया है. संस्थान ने बताया है कि ऐसा होने की वजह एक वायरस है. इसका नाम सदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस(SRBSDV) है. ये वायरस सफेद पीठ वाले 'तेला' कीड़े की वजह से फैलता है. सदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीक्ड ड्वार्फ वायरस(SRBSDV) पहली बार साल 2001 में पंजाब में रिपोर्ट किया गया था. बताया गया था कि ये दक्षिणी चीन से पंजाब में आया. ये डबल स्ट्रैन्डेड RNA वायरस है.

IARI टीम के सर्वे में क्या मिला?

IARI के डायरेक्टर ए. के. सिंह ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

‘वायरस की मौजूदगी संक्रमित पौधों और कीड़ों दोनो में पाई गई है. वायरस के RNA को आइसोलेट कर लिया गया है. लेकिन संक्रमित पौधों के बीजों मे वायरस नहीं मिला है. ये वायरस खासतौर पर फ्लोएम को प्रभावित करता है और ये बीज या आनाज के जरिए नहीं फैलता है.’

IARI की टीम ने हरियाणा के सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरूक्षेत्र, अंबाला और यमुनानगर जिलों के 24 खेतों का सर्वे किया है. जिन खेतों में ये सर्वे किया गया, उनमें करीब 2 से 10 फीसदी पौधों में SRBSDV संक्रमण पाया गया. पानीपत के एक खेत में करीब 20 फीसदी पौधों में ये संक्रमण पाया गया.

क्या लक्षण हैं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IARI ने इस संक्रमण के बारे में एक रिपोर्ट बनाई है और इस रिपोर्ट को केंद्रीय कृषि मंत्रालय को सौंपा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है,

'संक्रमित पौधों में गंभीर लक्षण देखे गए हैं. पौधों की जड़ें सही से विकसित नहीं हो पाई हैं, और भूरी पड़ गई हैं. संक्रमित पौधे बड़ी आसानी से उखड़ जा रहें हैं '

रिपोर्ट्स के अनुसार, IARI ने धान के पौधों को बौनै बनाने वाली इस रहस्यमयी बीमारी का पता लगाने के लिए अपने शोध में ट्रांसमिशन एलेक्ट्रान माईक्रोस्कोपी, RT-PCR, और रियल टाईम क्वांटिटेटिव PCR टेस्ट का प्रयोग किया. इसमें इस्तेमाल हुए पहले तरीके ‘ट्रांसमिशन एलेक्ट्रान माईक्रोस्कोपी’ से वायरस की मौजूदगी का पता लागया गया है. और दूसरे तरीके ‘RT-PCR’ में एक खास प्राईमर इस्तेमाल होता है, जो वायरस के दो अलग जीनोमिक कम्पोनेंटस को टार्गेट करता है.

इसके जरिए वायरस की मौजूदगी को कंर्फम किया गया. वहीं, तीसरे तरीके ‘रियल टाईम क्वांटिटेटिव PCR’ से इस बात की पुष्टि हुई कि संक्रमण सिर्फ लक्षण वाले सैंपल्स और सफेद पीठ वाले तेला कीड़े में पाया गया है, ये वायरस पौधों के बीजों में मौजूद नहीं था.

IARI कि जांच में पता चला की SRBSDV वायरस धान की 12 प्रजातियों में पाया गया है. इनमें बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह की प्रजातियां शामिल हैं. बासमती प्रजाति में PUSA- 1962, 1718, 1121, 1509, 1847 और CSR-30 शामिल हैं, वहीं गैर-बासमती प्रजातियों में PR- 114, 130, 131, 136, पॉयनीर हायब्रीड और अजायर स्विफ्ट गोल्ड शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बासमती के मुकाबले गैर-बासमती प्रजातियां ज्यादा प्रभावित हुई हैं. वहीं देर से बोए गए पौधों के मुकाबले पहले बोए गए पौधे ज्यादा संक्रमित हुए हैं.

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे आर्यन ने लिखी है.)

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