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उन्होंने गाय मार डाली, पर कोई गुस्से में नहीं है

वो भी सरकारी लोगों ने. कोई कुछ बोलेगा? किसी परिषद की नसें फूलेंगी?

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फोटो - thelallantop
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कुलदीप
21 मार्च 2016 (Updated: 21 मार्च 2016, 11:06 AM IST)
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उन्होंने गाय मार डाली! वो भी सरकारी लोगों ने. कोई कुछ बोलेगा? किसी परिषद की नसें फूलेंगी?
घटना है तमिलनाडु के नीलगिरीज की. एक टाइगर आदमखोर हो गया था. हफ्ते भर पहले उसने झारखंड के रहने वाले कामगार माबू बोरा को मार डाला था.
टाइगर को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी गई. STF ने जाल बुना. जैसे मछलियों को चारा डालते हैं, टाइगर को चारा डाला गया. वो चारा था, एक गाय.
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एक गाय लाकर पेड़ के नीचे बांध दी गई. मकसद था कि टाइगर जैसे ही अटैक करेगा, पास में छिपे बंदूकधारी जवान गोली मार के उसे दवाई से बेहोश कर देंगे. लेकिन प्लान फेल हो गया. जवान की गोली चूक गई और टाइगर ने गाय मार डाली.
STF जवानों का कहना है कि गाय को मारने के बाद टाइगर उनकी ओर लपका. उनके पास कोई ऑप्शन नहीं था तो असली वाली गोली चलानी पड़ी. शनिवार 3 बजे तक टाइगर ढेर हो चुका था.
वैसे पर्यावरण वाले कह रहे हैं कि STF अगर टाइगर को जिंदा पकड़ पाती तो अच्छा होता. लेकिन बताया ये जा रहा है कि लोकल लोगों का दबाव था कि आदमखोर जानवर को मार दिया जाए.
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STF का एक और आर्म्ड रिजर्व पुलिस का एक-एक जवान इस ऑपरेशन में घायल हो गए जिन्हें केरल के पेरिंतलमन्ना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.
आदमखोर टाइगर को मारना ही पड़ता है. चारा भी डालना ही पड़ता है. पर गाय ही क्यों? भैंस क्यों नहीं? अच्छा हमें गाय को चारा बनाने से कोई दिक्कत भी नहीं. दिक्कत है गाय प्रेमियों के उस गुस्से से
जो 'सेलेक्टिव' घटनाओं पर ही नुमाया होता है और आखिर में हिंसा में बदल जाता है.
क्या इसमें कोई पैटर्न था? गाय से जुड़ी जिन घटनाओं पर बीते दिनों बवाल हुआ, उनमें आरोप मुसलमानों पर थे. उन्हें ही पीटा गया, उन्हीं की हत्याएं हुईं. गाय बेचने ले जा रहे थे, लोगों ने घेर लिया और पेड़ से लटकाकर मार डाला. झारखंड के लातेहार की खबर है. जिन्हें मारा गया, वे दोनों मुसलमान थे. उनमें से एक की उम्र 15 साल थी. बाकी अखलाक की कहानी तो आप जानते ही हैं.
 
लातेहार में मोहम्मद मजलूम और आजाद खान को लटका दिया गया. आऱोप गौ-भक्तों पर है.
लातेहार में मोहम्मद मजलूम और आजाद खान को लटका दिया गया. आऱोप गौ-भक्तों पर है.

ऊपर वाली तस्वीर विचलित करती है ना. हम भी चाहते हैं कि ये तस्वीरें विचलित करें. दर्दनाक है ये तस्वीर. उससे भी दर्दनाक ये घटना.
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दो लाशें वहां पड़ी थीं. एक टाइगर की, एक गाय की. जश्न का माहौल था. टाइगर की लाश एक लकड़ी पर उल्टी लटकाई गई और उसके आगे-पीछे एक जुलूस चल निकला.
पर उन्होंने गाय मार डाली! सरकारी लोगों ने. कोई कुछ बोलेगा? किसी परिषद की नसें फूलेंगी?
आप कौन सी गाय से प्यार करते हैं, होरी वाली या अखलाक वाली?

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