घर-घर जाकर कॉन्डम बेचती हैं ये पाकिस्तानी औरतें
ये अनपढ़ औरतें कई पढ़े-लिखे लोगों से ज्यादा समझदार हैं.
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Symbolic Image. Source: Reuters
समीना का गांव पाकिस्तान में सिंध के दक्षिणी हिस्से में है. पूरे पाकिस्तान से कटा हुआ. गांव में 1500 लोग रहते हैं. गांव इतना गरीब है कि अधिकांश औरतों का जीवन खेतों में मर्दों का हाथ बटाते, बकरियां पालते, या रुई बटोरते बीत जाता है. इस इस गरीबी में बढ़ती जनसंख्या इसे और गरीब बनाती है.
पाकिस्तानी अखबार द गार्डियन के मुताबिक़, 25 साल की समीना ने गांव का ख़याल रखने का जिम्मा अपने कन्धों पर लिया है. वो घर-घर जाकर कॉन्डम, गर्भ निरोधक गोलियां, और गर्भ रोकने के साधन के मुफ्त सैंपल बांटती है. रोज सुबह 8 बजे काम में जुट जाती है. और शाम 4 बजे फुर्सत पाती है.
समीना 'Marginalised Area Reproductive Health Viable Initiative – Marvi' की वर्कर हैं. ये संस्था सिंध में औरतों की बेहतरी के लिए काम करती है. इसमें कम पढ़ी लिखी, या अनपढ़ औरतें हैं. जो घर-घर जाकर लोगों को कम बच्चे पैदा करने का महत्व समझाती हैं. ये औरतें 18 से 40 की उम्र के बीच होती हैं.
पूरे एशिया में, जिन देशों में जन्म देते हुए सबसे ज्यादा औरतों की मौत होती है, पाकिस्तान उनमें से एक है. पाकिस्तान का बर्थ रेट दुनिया में छठे नंबर पर है.
पाकिस्तानी औरतें गर्भ निरोधक का उपयोग कम ही करती हैं. 15 से 49 की उम्र की औरतों में से केवल 35 फीसदी औरतें गर्भ निरोधक यूज करती हैं. शहरों में एक औसत औरत 3 से ज्यादा बच्चे पैदा करती है. गांव में 4 से ज्यादा.
एक कॉण्ट्रासेप्टिव 5 रूपये में बिकता है. हर बिक्री पर इस औरतों को 3 रूपये मिलते हैं.
पाकिस्तान में गर्भ निरोधन धार्मिक मुद्दा बन जाता है. Marvi की औरतें मौलवियों के पास जाती हैं. उन्हें समझाती हैं कि फैमिली प्लानिंग क्यों जरूरी है. इसलिए Marvi की औरतें सबसे पह्के उन लोगों के पास जाती हैं समाज में चलती है. जैसे मौलवी और जमींदार. उन्हें कम बच्चे पैदा करने के फायदे बताती हैं.
मुझे गर्व है कि मैं औरतों को क़ुरान और गर्भ रोकना, दोनों सिखाती हूं.
बीते दिनों पाकिस्तान में टीवी और रेडियो पर कॉन्डम और गर्भ रोकने वाले प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया. ये कहते हुए कि इससे बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है. ऐसे समय पाकिस्तानी समाज को इन औरतों की पहले से ज्यादा जरूरत है.

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