बिहार चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने ये सात बड़े संकेत दिए हैं
कंटेनमेंट जोन में रहने वाले और कोरोना संक्रमित कैसे वोट करेंगे?
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख तेजस्वी यादव (फोटो: पीटीआई)
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अक्टूबर-नवंबर 2020 में बिहार विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं. सभी पार्टियां इसको लेकर कमर कस रही हैं. चुनाव आयोग भी तैयारी कर रहा है. इलेक्शन कमिश्नर सुशील चंद्रा ने बताया है कि कोरोना मरीज़ डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) के जरिए मतदान कर सकेंगे. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में कोरोना महामारी मतदाता को प्रभावित न करे, इसके लिए चुनाव आयोग अतिरिक्त चीजों पर भी फोकस कर रहा है.
इस बातचीत में जो बड़ी बातें निकलीं, वो हम आपको यहां बता रहे हैं-
# तय वक्त पर ही होंगे बिहार के चुनाव. कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मान लिया है.
# चुनाव आचार संहिता 1961 के नियम 27A के तहत कोरोना वायरस संक्रमित या प्रभावित लोगों की एक नई कैटेगरी बनाई गई है. होम क्वारंटीन या संस्थागत क्वारंटीन में रखे गए लोग पोस्टल बैलेट के तहत वोट कर सकेंगे.
# कोरोना संक्रमित मरीज़ के पास एक स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) होगा, जिसके जरिए वे रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित कर सकेंगे. एक बार आवेदन स्वीकार हो जाने के बाद वे वोटर अपने वोटिंग सेंटर पर वोट नहीं कर पाएंगे. यह सुविधा आने वाले वक्त में होने वाले सभी चुनावों के लिए लागू की जाएगी, जिनमें उपचुनाव भी शामिल होंगे.
# ऐसे वोटर, जो कंटेनमेंट जोन में रह रहे हैं, लेकिन कोरोना संक्रमित नहीं हैं, उनके लिए अग्रिम मतदान के ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है. पैनल ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इसको लेकर इनपुट मांगे हैं.
# चुनाव आयोग नहीं चाहता कि कोरोना की वजह से वोटिंग कम हो. इसको लेकर अतिरिक्त जरूरी कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए अगर जरूरी हुआ, तो एक पोलिंग ऑफिसर को कोरोना संक्रमित वोटर को पोस्टल बैलेट देने और वापस लाने के लिए भी भेजा जाएगा.
# सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए इलेक्शन कमीशन ने फैसला किया है कि हर वोटिंग सेंटर पर अधिकतम 1000 वोटर ही वोट सकेंगे. आमतौर पर एक वोटिंग सेंटर पर 1600 वोटर वोटिंग करते हैं. ऐसे में आयोग को 30 हज़ार नए पोलिंग सेंटर बनाने होंगे.
# किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव प्रचार करने के लिए स्वास्थ्य और NDMA के गाइडलाइंस को मानना होगा. पार्टियों को वर्चुअल रैली का सहारा लेना होगा और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करना होगा. यह संभव है कि चुनाव के नज़दीक तक चीजें बदल जाएं. बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को खत्म हो रहा है.
विडियो- बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस्तेमाल होने वाली EVM M3 कैसे अलग है?
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