The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • The truth of social media: Viral Video drunk policeman actually suffered a heart stroke

'मैं बेवड़ा नहीं था, आपने गलत समझा सर'

वो वर्दी वाला दिल्ली मेट्रो में लड़खड़ाकर गिर पड़ा तो वीडियो वायरल हो गया. लोग दारूबाज कहने लगे. लेकिन उसकी कहानी कुछ और थी.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
प्रतीक्षा पीपी
21 मार्च 2016 (Updated: 21 मार्च 2016, 06:03 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
ये तस्वीर देख कर आपको वो वीडियो याद आया होगा. जिसमें एक 'बेवड़ा' कॉन्सटेबल दारू के नशे में मेट्रो में झूम रहा था. वीडियो का नाम था ‘Drunk Delhi Police man on Delhi metro - Funny’. https://www.youtube.com/watch?v=tDCKHDfQSuk 'फनी.' आज से पहले ये वीडियो सबके लिए फनी था. इसमें जो पुलिस वाला दिख रहा है, उसका नाम सलीम है. सलीम दिल्ली पुलिस विभाग में हेड कॉन्सटेबल है. जिस दिन सलीम का मेट्रो में झूमता हुआ वीडियो अपलोड हुआ, उसी दिन यूट्यूब पर उसको दो लाख बार देखा गया. व्हाट्सऐप की तो खैर गिनती ही नहीं. पूरे देश ने सलीम को दिल्ली मेट्रो में झूमते देखा. पूरे देश ने मजाक उड़ाया. पूरे देश के सामने दिल्ली पुलिस शर्मसार हुई. सलीम की शक्ल अखबारों के पन्नों से लेकर टीवी के प्राइम टाइम शोज में ये विमर्श करते हुए दिखी, कि क्या ऐसे पुलिस वालों के साथ आम पब्लिक और मेट्रो में सफर करने वाली जनता सुरक्षित है? पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने सलीम को 'मिसकंडक्ट' के लिए सस्पेंड कर दिया था.
सलीम का वीडियो वायरल होना और सस्पेंड होना सोशल मीडिया से किसी की जिंदगी बर्बाद होने का सबसे बड़ा नमूना है. क्योंकि 19 अगस्त 2015 की रात जब सलीम का वीडियो बना, वो नशे नहीं, पार्शियल पैरालिसिस से झूम रहा था. सलीम बीमार था. उसका शरीर उसके कंट्रोल में नहीं था. सलीम ने यही बात पुलिस को बताई. सलीम के मेडिकल टेस्ट हुए. जिसमें पता चला कि उसे सचमुच पार्शियल पैरालिसिस है.
ये वीडियो बनने के कुछ दिनों पहले सलीम को बार बार अस्पताल में भर्ती किया गया था. दिमाग में ब्लॉकेज होने की वजह से उसे ब्रेन हैमरेज हुआ था. जिसकी वजह से उनके शरीर का बांया हिस्सा पैरेलाइज हो गया था. पैरालिसिस के साथ शरीर में कमजोरी, चेहरा बिगड़ जाना, याददाश्त कमजोर होना, और आम लोगों की तरह बात न कर पाना जैसी कई समस्याएं थी. जिसके चलते सलीम को सिक्योरिटी ड्यूटी से हटाकर डेस्क पर शिफ्ट कर दिया गया था. सलीम को अक्सर ऐसे अटैक आते रहते थे. जिसके चलते वो दवाइयों पर था. 19 अगस्त 2015 को सलीम ठीक महसूस नहीं कर रहां था. लेकिन काम निपटाने के लिए 9.30 तक ऑफिस में रुका रहा. फिर मेट्रो लेकर घर के लिए निकला. मेट्रो में आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा. चक्कर आया. और आजादपुर स्टेशन में जब मेट्रो के ब्रेक लगे तो सलीम गिर पड़ा. ये वही वाकया था जिसे हम सबने मजे ले कर देखा. फिर दिल्ली पुलिस की हालत पर अपना फैसला सुनाया. और फिर किसी और काम में लग गए. drunk falls सलीम दिल्ली की एक्स सीएम शीला दीक्षित और एक्स होम मिनिस्टर पी चिदंबरम के लिए बनी स्पेशल सिक्योरिटी टीम का हिस्सा हुआ करता था. पर मेडिकल कारणों की वजह से उसके काम का दायरा घटा दिया गया था. सलीम की पोस्टिंग दिल्ली के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में थी.
सस्पेंशन के बाद सलीम ने कमिश्नर बस्सी को पूरा केस बताया. मामले की जांच हुई. सलीम को साफ पाया गया. उसका सस्पेंशन वापस ले लिया गया. और 5 नवंबर 2015 को सलीम दिल्ली पुलिस सेवा में वापस आ गया. लेकिन इसका कोई वीडियो नहीं चला. किसी अखबार में कोई खबर नहीं आई.
पुलिस ने सलीम से माफी मांगी. उसके सस्पेंशन के दिनों को ऑन ड्यूटी बिताया गया वक्त माना गया. खुद की हुई बदनामी और मर्यादा को पहुंची ठेस के लिए सलीम ने मुआवजा मांगा है. कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. कि वीडियो को जल्द से जल्द इंटरनेट से हटाया जाए. सलीम चाहता है कि पुलिस उसी खोई इज्जत को वापस लाने के लिए कदम उठाए.
सलीम आजकल मेडिकल लीव पर है. स्पीच डिसऑर्डर होने के कारण वो बात नहीं कर पा रहा है. जब से सलीम की बदनामी हुई है, उसकी पत्नी बीमार है. पिता भी उम्र हो जाने के कारण पैरालिसिस का शिकार हैं. तीनों ही अस्पताल में भर्ती हैं.
सलीम के वकील मैथ्यूज ने बताया, "शिकायत करने के अलावा सलीम के पास एक ही चारा था. कि वो चुप चाप सब सहता रहे. क्योंकि वीडियो अपलोड करने वाले को खोजना उसके बस की बात नहीं थी. न ही इतने बड़े-बड़े अखबारों से लड़ना मुमकिन था. खासकर जब सलीम खुद ही इतनी तकलीफों से जूझ रहा हो."
हम उस दौर में हैं जब सोशल मीडिया लोगों लोगों की लाइफ का एक बड़ा हिस्सा है. यहां लोग अब सिर्फ मौज नहीं करते. बल्कि अब यहां विचारधाराएं बनती-बदलती हैं. ये सच है कि सोशल मीडिया के दम पर देश की जरूरी बहसें लड़ी गईं. दिल्ली के 2012 गैंग रेप ले लो, या फिर कुछ दिनों पहले जेएनयू 'सेडीशन' का केस ही ले लो. वहीं ये भी याद रहे कि जेएनयू से जुड़े फर्जी वीडियो भी सोशल मीडिया से फैलाए गए. राहुल गांधी ने एक स्पीच में 'स्टीव जॉब्स ऐंड माइक्रोसॉफ्ट कहा'. जिसे सोशल मीडिया पर 'स्टीव जॉब्स इन माइक्रोसॉफ्ट' बता कर बार-बार राहुल गांधी का मजाक उड़ाया. बात नेताओं का मजाक उड़ाने या फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की नहीं है. बात सिर्फ इतनी है कि सोशल मीडिया पर फैलाए गए झूठों पर हम कितनी जल्दी भरोसा करते हैं.
ऐसे ही जसलीन कौर नाम की एक लड़की ने वीडियो बनाया जिसमें उसने दिखाया कि सरबजीत नाम का लड़का उसे हैरेस कर रहा है. जसलीन के सपोर्ट में पूरे देश का मडिया खड़ा हुआ. सोशल मीडिया पर सबने उसका साथ दिया. पर मामले की जांच के बाद पता चला कि जसलीन लड़कों पर फर्जी इल्जाम लगा रही थी. सोशल मीडिया, मीडिया से अलग है. सोशल मीडिया पर आपके पास खुद को खबर बनाने की ताकत होती है. चंद लाइक और शेयर आपको स्टार बना सकते हैं. स्टार बनने की भूख में लोग कुछ भी कहते-करते हैं. और बाकी लोग उसे सच मानते हैं. लेकिन इसके अंजाम के बारे में नहीं सोचते. किसी के स्टार बनने की चाह में आज सलीम का परिवार अस्पताल में जीवन की लड़ाई लड़ रहा है. क्या किसी चीज को शेयर करने के पहले उसकी जांच करना हमारा फर्ज नहीं?

Advertisement

Advertisement

()