नेहरु-इंदिरा का सपना पूरा होगा, अब AMU सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं!
केंद्र सरकार ने एफिडेविट लगाया है. अब से यहां भी ओबीसी, एससी, एसटी को रिजर्वेशन मिलेगा.
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फोटो - thelallantop
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से माइनॉरिटी यूनिवर्सिटी होने का स्टेटस छिनने वाला है. मुस्लिमों को जो 50 परसेंट कोटा मिलता था, वो अब नहीं मिलेगा. अब यहां भी ओबीसी, एससी, एसटी को आरक्षण मिलेगा. जैसे देश की बाकी यूनिवर्सिटीज में होता है.केंद्र सरकार ने इस बारे में कोर्ट में एफिडेविट जमा किया है. ये एफिडेविट कई पन्नों का है. इसमें लिखा है कि AMU को माइनॉरिटी यूनिवर्सिटी होने की वजह से जो भी ट्रीटमेंट दिया जाता था. वो सब ख़त्म कर दिया जाना चाहिए. जब स्मृति ईरानी केंद्रीय एचआरडी मंत्री थीं. उसी दौर में ये एफिडेविट जमा किया था. इस एफिडेविट में केंद्र सरकार ने कहा. 'पुरानी सारी केंद्र सरकारें AMU को माइनॉरिटी बनाए रखने के सपोर्ट में थीं. इसलिए 2006 में इसके सपोर्ट में केस भी दायर किया गया था. अब केंद्र सरकार ने उस केस को वापस लिया है.' इस एफिडेविट में केंद्र ने पंडित जवाहर लाल नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी के बयानों को भी यूज़ किया है. जवाहर लाल नेहरू ने कहा था, ‘अगर आप अल्पसंख्यकों के लिए अलग सुरक्षा कवच की मांग करते हैं तो आप अलगाव पैदा करते हैं. हो सकता है कि आप उसे कुछ सुरक्षा दे भी दें लेकिन किस कीमत पर? इन्हें मुख्य धारा से अलग करने के लिए, अलगाव भरने के लिए?’ इंदिरा गांधी ने संसद में 1972 में कहा था ‘अगर एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान में बदलने की मांग मान ली जाती है तो सरकार दूसरे धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक समूहों को इस तरह की मांग करने से रोक नहीं सकेगी.' एफिडेविट में शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन के स्टैंड का भी जिक्र किया है. कहा गया है कि ये यूनिवर्सिटी माइनॉरिटी कैसे हो सकती है. क्योंकि ना तो इसकी स्थापना करने वाले माइनॉरिटी थे. ना ही इसको चलाने वाले माइनॉरिटी हैं. 2005 में AMU के वीसी को उस वक़्त की सरकार ने एक लैटर भेजा था. जिसमें मास्टर्स कोर्सेज़ में मुसलामानों को 50% सीटें रिज़र्व करने की परमिशन दी गई थी. वो भी अब कैंसल कर दिया गया है. इसके अलावा जितने भी फैसले थे. जो उस यूनिवर्सिटी को माइनॉरिटी बनाए रखने के लिए ज़रूरी थे. वो सब वापस ले लिए गए हैं. 11 जुलाई को सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट में. सरकार का चाहा हुआ फैसला आया तो नेहरु-इंदिरा का सपना पूरा होगा और अब AMU सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं रह जाएगा.

