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युवा, भर्ती, लाठी और सरकारी सिस्टम का पूरा सच

देहरादून में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं इकट्ठा होते हैं. वजह पेपर लीक, भर्ती समय से ना हो पाना.

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dehradun protest
सांकेतिक फोटो (साभार: आजतक)
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अभिनव पाण्डेय
10 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 10 फ़रवरी 2023, 09:53 PM IST)
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जब हम बड़े होते हैं तो हमें सभ्यता के पैबंद में सबसे पहली चीज सिखाई जाती है सम्मान. दूसरों का सम्मान कीजिए और खुद के लिए सम्मान अर्जित कीजिए. सम्मान पाने की कड़ी का पहला पड़ाव होता है आत्मसम्मान. मान शब्द यहां की-वर्ड है. इसी से बनता है मानचित्र. देश का मानचित्र देखने के कई नजरिए हो सकते हैं, आप पर्यटक हैं तो हिमालय की चोटी से लेकर कन्याकुमारी को जोड़ती एक लकीर नजर आएगी. आप नेता हैं तो मानचित्र पर उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक की सरकारें और राजनीति नजर आएगी. लेकिन आप युवा हैं तो इसी मानचित्र पर एक लाठी नजर आएगी. लाठी जो खून से सनी है. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की तस्वीरें ताजा हैं, मगर ये लाठी गाहे-बगाहे हर राज्य में नजर आ ही जाती है,जिसकी चटक में युवाओं की चमड़ियां चिपकी हुई है. कर ली होगी हिंदुस्तान ने बहुत तरक्की, तकनीक भी हमारी दुनियाभर में तारी है. लेकिन एक अदद भर्ती परीक्षा आज भी बिना लीक के हिंदुस्तान में हो नहीं पाती.

आज हम उत्तराखंड समेत देशभर के तमाम राज्यों में अनवरत प्रक्रिया के तहत जारी पेपर लीक्स के बारे में बात करेंगे. लल्लनटॉप की टीम देहरादून में युवाओं के बीच पहुंची है. इसके अलावा हमने सुबह ही सोशल मीडिया के अपने सभी प्लेटफॉर्म पर युवाओं से उनके राज्य में हुई भर्ती धांधली को बताने को कह दिया था. अलग-अलग राज्यों से हजारों की संख्या में कमेंट आएं हैं, सभी कमेंट को एक शो में दिखा लेने का दावा तो हम नहीं कर सकते. मगर ज्यादातर पर बात करने की कोशिश रहेगी. लेकिन सबसे पहले एक विज्ञापन की बात. 9 साल पहले फेवीकोल बनाने वाली पिडिलाइट इंडिया का एक चर्चित विज्ञापन आया.

विज्ञापन में एक बुजुर्ग मरणासन्न स्थिति में लेटे हुए हैं, वकील से वसीहतनामा बनवाकर अपने तीनों बेटों को देते हैं. एक बेटा कहता है बाबा ये क्या दिया आपने, इतना तो बस के किराए में खर्च हो जाता है.जबरन वो वसीहतनामे की रकम में दो-तीन जीरो बढ़वा लेता है.फिर जब वो घर ढेहरी पर खड़े होकर वसीहत की रकम देखता है, तभी टपकती छत से एक बूंद कागज पर गिरती है और जीरो के आगे लगा एक मिट जाता है.पीछे से कमेंट्री होती है.सिर्फ एक टपकती बूंद आपकी किस्मत बदल सकती है. ये M-SEAL का प्रचार था.

इसी तरह की एक M-SEAL की जरूरत देश को भी है. क्योंकि पेपर लीक ना रोकना युवाओं की नजर में एक अक्षम्य अपराध है. ये सिस्टम का नल बार-बार चूए जा रहा है, इसको रोकने के लिए कोई तो M-SEAL होगी.या तो उसको खोज लीजिए, या फिर सरकारें ये मुनादी करा दें कि सरकारी नौकरी नहीं दे सकते हैं, खुदमुख्तार बन जाइए.ये क्या बात होती है कि युवाओं पर बेरहमी से लाठी चला दी जाए और फिर कहिए बाहरी तत्व आ गए थे, ये हो गया था, वो हो गया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार उत्तराखंड की चुनावी रैली में कहा था पहाड़ का पानी और जवानी पड़ाह के ही काम आना चाहिए. और क्या बढ़िया काम आ रहा है. पहाड़ पर उगने वाले देवदार से बनी लाठियों की मजबूती इनकी पीठ से की जा रही है. देहरादून में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं इकट्ठा होते हैं. वजह पेपर लीक, भर्ती समय से ना हो पाना. कौन-कौन सी भर्ती लीक हुई? नोट करिए

>>2021, उत्तराखंड SSSC की 13 विभागों में 916 पदों के लिए हुई परीक्षा में पेपर लीक हुआ।

>>2022 में  770 पदों के लिए हुई पांच भर्ती परीक्षाएं धांधली के बाद रद्द करनी पड़ीं।

>>2022 में विधानसभा के स्टाफ की भर्ती में अपने अपनों को रेवड़ी बांटने की धांधली हुई।

जब उत्तराखंड SSSC से भर्ती परीक्षाएं ईमानदारी से ना हो पाईं तो काम उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को दिया गया. लेकिन देखिए.जनवरी में इसी साल जब लेखपाल पटवारी की भर्ती परीक्षा उत्तराखंड लोकसेवा आयोग ने कराई तो इस परीक्षा का भी पेपर लीक हो गया. इस परीक्षा में एक लाख लोग बैठे.उत्तराखंड छोटा राज्य है. एक भर्ती इम्तिहान में एक लाख बच्चों के बैठने का मतलब है  बेरोजगारों की कितनी बड़ी तादाद एक नौकरी, एक भर्ती इम्तिहान, एक परिणाम, एक नियुक्ति पत्र का इंतजार करती रहती है.जहां ना यूके ssc ईमानदारी से भर्ती परीक्षा करा पा रहा है.ना उत्तराखंड लोकसेवा आयोग. अगर मैं अगर उंगलियों पर गिन दूं तो दो साल में पटवारी, लेखपाल, छात्रावास अधीक्षक, सहायक समीक्षा अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, पोस्टमैन, वन दरोगा इन सारे पदों पर नौकरी दिलाने वाली परीक्षाओं के पेपर अकेले उत्तराखंड में ही लीक हो चुके हैं.बीजेपी सरकार ने चुनाव से पहले अपने घोषणपत्र, जिसे बीजेपी वाले संकल्प पत्र कहते हैं. उसमें वादा किया था कि हम उत्तराखंड के युवाओं को पचास हजार नौकरी देंगे. 24 हजार नौकरी सत्ता में लौटते ही उपलब्ध करा देंगे.लेकिन बदले में मिला क्या ? ये लाठियां ? 

लाठीचार्ज पर दिलीप कुंवर ने बयान दिया, कि बेरोजगार संघ के बैनर तले उनके कुछ लोग भी थे, ज्यादातर लोग असामाजिक तत्व शामिल थे. उन्होंने माहौल खराब करने का प्रयास किया. कमाल है ना जो पुलिस पेपर लीक माफिया को पहले नहीं पकड़ पाते. वो एक झटके में आंखों में स्कैनर लगाकर ऐलान कर देते हैं कि बेरोजगार कम थे.असामाजिक तत्व ज्यादा थे. लड़कियों को भी लाठियां लगी हैं, क्या वो भी असमाजिक तत्व थीं? युवाओं पर पथराव का आरोप है, उसमें गिरफ्तारियां भी हुई हैं. प्रदर्शन में हम हिंसा के साथ कभी नहीं खड़े हो सकते.कानून अपना काम करे. लेकिन युवाओं के मुद्दों और मांगों से छल नहीं होना चाहिए. दुखद किंतु सत्य है कि ये छल हर राज्य में हो रहा है.हमें समझ नहीं आता किस राज्य का नाम लें और किसका छोड़ दें? उत्तराखंड के अलावा यूपी, बिहार,झारखंड, एमपी, राजस्थान,छत्तीसगढ़, गुजरात,हिमाचल,अरुणाचल हर राज्य में भर्ती परिक्षाएं लीक हुईं.राज्यों भले ही सरकारें अलग-अलग पार्टियों की हैं, मगर पेपर लीक का सिस्टम एक सरीखा है.सबको लीकेज रोकने के लिए  M-SEAL वाले सिस्टम की जरूरत है.हम किसी ब्रांड का प्रचार नहीं कर रहे, बल्कि सिस्टम के लीकेज को समझाने के लिए बस एक लोकप्रचलित उदाहशरण का इस्तेमाल कर रहे हैं.

हमने जब युवाओं से उनके राज्य हुए लीक के बारे में जानकारी मांगी तो दिमाग चकरा गया.कुछ कमेंट बता देता हूं-

धर्मेंद्र लिखते हैं-

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सुनील लिखते हैं

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बिहार के मनीष लिखते हैं

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आलोक लिखते हैं

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हजारों कमेंट आए हैं, अगर सब पढ़ने लगा तो रात बीत जाएगी, मगर पढ़ नहीं पाऊंगा. ज्यातादर में व्यथा पेपर लीक और भर्ती में देरी की ही है.आज हम आपको किसी whataboutery में फंसने नहीं देंगे .इस राज्य का बता रहे हैं तो उस राज्य का क्यों नहीं. शुरू में हमने जिस मान की-वर्ड की बात की थी उसी से मानचित्र पर चल लेते हैं.
बारी-बारी से दो बीजेपी शासित और दो गैर बीजेपी शासित राज्यों की पेपर लीक की लिस्ट देखते चलिए. सबसे पहले उत्तर प्रदेश, जहां बीजेपी की सरकार है

- अगस्त 2017 में सब इंस्पेक्टर की सीधी भर्ती का पेपर लीक
- फरवरी 2018 में  UPPCL का पेपर लीक
- अप्रैल 2018 में UP पुलिस की भर्ती का पेपर लीक
- जुलाई 2018 में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड का पेपर आउट
- अगस्त 2018 में स्वास्थ्य विभाग प्रोन्नत पेपर लीक  
- सितंबर 2018 में नलकूप ऑपरेटर की भर्ती का पेपर लीक
- 2018 में सिपाही भर्ती पेपर लीक का दावा
- जुलाई 2020 में शिक्षक भर्ती का पेपर लीक
- अगस्त 2021 में बीएड प्रवेश परीक्षा का पर्चा लीक
- अगस्त 2021 में PET का पेपर लीक
-नवंबर 2021 UP TET पेपर लीक
- अक्टूबर 2021 में सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक/प्रधानाचार्य का पेपर लीक

राजस्थान आइए, जहां कांग्रेस सरकार है
जुलाई 2014 में RAS भर्ती पेपर लीक होने से रद्द हुई
- दिसंबर 2015 में LDC भर्ती का पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द
- मार्च 2018 में कांस्टेबल भर्ती भी पेपर लीक, पेपर रद्द
- 2019 में पटवारी भर्ती को रद्द करनी पड़ी
- दिसंबर 2019 में लाइब्रेरियन परीक्षा का पेपर लीक हुआ
- दिसंबर 2020 में जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ
- 2021 में सब इंस्पेक्टर, रीट भर्ती में पेपर लीक का आरोप

पड़ोसी राज्य गुजरात चलिए, आप कहेंगे गुजरात भी.जी, गुजरात में भी खूब पेपर लीक हुए.जहां लंबे समय से बीजेपी की सत्ता है
2014 - GPSC चीफ ऑफिसर का पेपर लीक
2015 - तलाटी पेपर लीक
2016 - जिला पंचायत के तलाटी पेपर लीक
2018 - TAT शिक्षा विभाग का पेपर
2018 - मुख्य सेविका पेपर
2018 - LRD- लोक सेवक दल का पेपर
2019 - गैर सचिवालय क्लर्क का पेपर
2021- हेडक्लर्क का पेपर
2021- DGVCL का पेपर
2021- सब ऑडिटर का पेपर
2022 - वनरक्षक भर्ती का पेपर
2023 - गुजरात पंचायत सर्विस सेलेक्शन बोर्ड  की जूनियर क्लर्क की भर्ती का पेपर
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बिहार चलिए, जहां सत्ता खुद गुलाटी खाते रहती है.फिलवक्त JDU-RJD की सरकार है।

2012- SSC का पर्चा
2018 - SSC का पेपर
2017- पुलिस भर्ती का पर्चा
2021- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का पेपर
2022-  SSC का पेपर
2022- BPSC का पेपर

यहां तक कि 2023 में 12वीं के भी पेपर लीक होने का आरोप है.इसके अलावा चयनित शिक्षकों की नियुक्ति-पत्र के लिए लाठी खाती तस्वीरें भी थोड़े-थोड़े दिन पर आ ही जाती हैं.इतनी लीक भर्तियों को गिनाने के बाद भी हम दावे के साथ नहीं कह सकते कि हमने सारे लीक बता दिए.ये तो उदारहण मात्र थे, बाकी राज्यों में भी ऐसी ही लंबी लिस्ट है.एमपी में तो बीते सप्ताह ही नर्सिंग स्टाफ का पेपर लीक हुआ है.अब सवाल है कि ये पेपर लीक होते क्यों हैं? इसके पीछे कौन से लोग, कौन सा सिस्टम काम करता है जो हर पार्टी के शासन में शाश्वत है.

हमने देखा है, जब भी पेपर लीक की खबर आती है तो सबसे पहले निचले स्तर के कर्मचारियों को पकड़ा जाता है.कुछ गिरफ्तारियां होती हैं, कहा जाता है, तार यहां पहुंच रहे हैं, वहां पहुंच रहे हैं.गिरफ्तारी पर सरकारें अपनी पीठ ठोंकती हैं और जब तक जांच होती है तब तक दूसरा पेपर लीक हो जाता है.आज राजस्थान विधानसभा में बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की.
पहली ये कि
>>भर्ती परीक्षा निशुल्क कराई जाएगी यानी फॉर्म का कोई पैसा नहीं लगेगा।
दूसरी ये कि
>> पेपर लीक की जांच के लिए SOG के अधीन स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF का गठन किया जाएगा.

अलग-अलग राज्यों के छात्रों या उनके हितों की बात करने वालों का पक्ष जानिए तो समस्या कमोबेश एक जैसी ही है.तो क्यों केंद्र सरकार इस पर पहल कर कोई समाधान निकाले.विपक्ष के आरोपों पर संसद में प्रधानमंत्री ने कहा था उनके पास 140 करोड़ लोगों का सुरक्षा कवच है.सांसद, विधायक, मंत्रियों के पास विशेषाधिकार का कवच है.लेकिन भारत में करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई सुरक्षा कवच नहीं.ये लोग हर धर्म के हैं.हर जाति के हैं.हर आय-वर्ग के हैं.

ये देश के बेरोजगार युवा हैं.जो भर्ती दर भर्ती मारे-मारे फिरते हैं.प्रधानमंत्री आज के युवा पीढ़ी को अमृत पीढ़ी कहते हैं.मगर इनकी किस्मत में पेपर लीक का विष भरा है.रिफॉर्म और परफॉर्म नेताओं के भाषणों में अच्छा लगता है.लेकिन भर्ती व्यवस्थाओं में रिफॉर्म नहीं होने से बेरोजगार परफॉर्म नहीं कर पाते.

>> भर्ती आयोगों में राजनीतिक संबंधों वाली नियुक्तियां पूरी तरह बंद हो.
>> भर्ती आयोगों की प्रमुखों की पारदर्शी इम्तिहान कराने की कानूनी जवाबदेही तय हो.नियम बने कि अगर तुम्हारे कार्यकाल में पेपर लीक हुआ तो फिर जिम्मेदारी तुमको उठानी होगी.
>>एक टास्ट फोर्स ऐसी गठित की जाए जिनकी ईमानदारी शत-प्रतिशत कसौटी पर जांची जा चुकी हो.इसी टास्क फोर्स के लोगों को ही भर्ती इम्तिहान से जुड़े कार्यों में लगाया जाए.
>> भर्ती परीक्षाओं के वक्त कोचिंग संस्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए.
>> किसी कोचिंग संस्थान की संलिप्तता मिलने पर सिर्फ संबंधित आरोपी पर कार्रवाई ना हो, कोचिंग संस्थान को बंद किया जाए
>>भर्ती इम्तिहानों को लटकाने की बजाए तय समय पर कराया जाए ताकि भर्तियां लटकने से ना तो बेरोजगारों की उन पदों के सापेक्ष संख्या बढ़े.ना ही कम पदों के बदले ज्यादा बेरोजगार अभ्यर्थी होने पर पर्चा लीक कराने की नीयत बढ़े.
>>पेपर माफिया की गिरफ्तारी के एक महीने के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में तय समय के साथ सजा सुनाई जाए.

अगर इन पर अमल किया जाए तो क्या पता कुछ बात बन जाए. हम ये नहीं कहते कि हर युवा को सरकारी नौकरी की तरफ भागना चाहिए. यही हिंदुस्तान है जिसने स्टार्टअप और खुद के बिजनेस सेटअप में रिकॉर्ड्स बनाए हैं. हमारे जैसे बहुत से लोग या कहें ज्यातादर लोग प्राइवेट नौकरियां भी करते हैं.मगर जो छात्र सरकारी नौकरियों की तैयारी में जीवन खपा देते हैं. उनके साथ ये पेपर लीक, भर्ती में धांधली का खिलवाड़ बंद होना चाहिए.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: नौकरी के नाम युवाओं पर लाठियां चलाते देशभर की सरकारों का कच्चा चिट्ठा खुल गया

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