10 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 17 फ़रवरी 2016, 07:06 AM IST)
फोटो - thelallantop
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हामिद को पेशावर जेल में बंद कर दिया गया है. आर्मी कोर्ट ने उसे जासूस माना है. गुनाह ये कि वो बिना कागजात के पाकिस्तान में घुस आया था. शनिवार को ये फैसला सुनाया गया. हामिद के पास अब भी मौका है, वो पाकिस्तान आर्मी एक्ट के तहत अपील कर सकता है.
क्या है मामला, कौन है हामिद, कैसे पहुंचा पाकिस्तान?
मुंबई की फौजिया अंसारी ने नरेंद्र मोदी को अपने खून से खत लिखा है. खत में बस इतना लिखा है प्लीज हेल्प. दरअसल फौजिया का बेटा हामिद साढ़े तीन साल से पाकिस्तान में बंद है. उसे छुड़वाने के लिए ही फौजिया हाथ पैर मार रही हैं. पीएमओ को कई बार लिख चुकी हैं. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी उन्हें प्रॉमिस किया है कि सरकार सब कदम उठाएगी. मगर मां है कि उसका मन मानता नहीं. तो अब अंगुली काट चिट्ठी लिख मारी. भावुक कदम है. उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. ऐसे सब पीएम को खून से खत लिखेंगे तो खराब लगेगा. पर सवाल ये है कि हामिद उस पार गया क्यों.
ये जासूसी का नहीं जस्ट मुहब्बत में कटने का मामला है.
पाकिस्तान के कोहाट का एक कबीला. वहां के एक बालक ने एक कत्ल कर दिया. पंचायत बैठी. क्या तय हुआ. कि कातिल की बहन मरने वाले के परिवार के एक बुजुर्ग से शादी करे. इस रवायत को वाणी कहते हैं उस तरफ. गजब चोंचूपना है.
खैर. एक फिलिम अलग ही चल रही थी. फेसबुक पर. मुंबई के हामिद और इस लड़की के बीच. एफबी पर दोस्ती हुई. फिर ईलू ईलू. मगर इंटरवल आ गया ये पंचायती फैसले से. हामिद ने बड़ी फाइट की. किसी तरह पाकिस्तान का वीजा मिले. वो वीर बने. और अपनी जारा को बचा लाए. मगर ऐसा हो नहीं पाया. तब उसे पाकिस्तान के कुछ दोस्तों ने एक सलाह दी. निरी गू सलाह. कि काबुल आ जाओ. वहां से बॉर्डर पार करा लेंगे तुमको.
हामिद मियां भी इतने चमन. यही कर बैठे. मगर ये क्या. उसकी जारा तो जस्ट धोखेबाज निकली. मुहब्बत का तो कदुआ कुछ न था. उसे तो पइसा वसूलना था. हामिद से जब दमड़ी नहीं मिली. तो पुलिस को खबर कर दी. पुलिस आई. सोचा. इंडिया से आया है. पक्का करमचंद होगा. तो उसने आईएसआई को सौंप दिया. और उन्होंने जेल में पटक दिया.
बेटे का पता चला एक रानी मुखर्जी, आई मीन महिला पत्रकार के चलते. मानवाधिकार आयोग की दरें चूमने के बाद फौजिया उस तक पहुंचीं. उन्होंने पेशावर हाईकोर्ट में हैबियस कार्पस (बंदी को पेश करो) रिट डाली. उससे पता चला कि लड़का जेल में है. पर है ही. छूट नहीं रहा. फौजिया कह रही हैं कि का बताएं भइया, ऊ वकील भी नहीं मिल रही अब.
फौजिया थक गई हैं. जवान बेटे के जाने का गम, उसे कोख में रखने वाली बयां नहीं कर सकती. अभी शब्द ईजाद नहीं हुए. फिर भी एक भरोसा है. उसी के सहारे वो पीएम की दर पर फिर फिर लौट रही है.