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महिला पत्रकार के साथ कैब में डराने वाली घटना, शिकायत पर उबर का शर्मनाक रवैया

क्या महिलाएं उबर कैब में सुरक्षित नहीं हैं?

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14 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 14 जुलाई 2017, 08:45 AM IST)
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अनन्या ने उबर एप पर शिकायत की तो जवाब 8 घंटे बाद आया.
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दिल्ली में काम करने वाली एक पत्रकार ने 'उबर' कैब का एक रात का अनुभव ट्विटर पर शेयर किया है. और उसे 'खौफनाक अनुभव' बताया है. पत्रकार का कहना है कि कैब के ड्राइवर ने ग्रेटर नोएडा एक्‍सप्रेस-वे पर एक सुनसान इलाके में अचानक गाड़ी रोक दी और अपने दोस्‍तों को फोन करने लगा. दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था. वो घबरा गई. मदद के लिए उबर से शिकायत की तो कंपनी ने आठ घंटे बाद जवाब दिया. उबर की ये अनदेखी डराती है. वो भी तब जब एक बार रेप केस का मामला सामने आ चुका है. उबर को जवाब देना चाहिए. उसकी ख़ामोशी मामले की लीपापोती लगती है. जिस तरह से रेप की ख़बरें आती हैं, उससे पत्रकार का डरना नहीं चौंकाता. बल्कि लड़कियां कैब में भी महफूज़ नहीं हैं ये बात बहुत डराती है. पत्रकार का कहना है कि अगर उसने अपनी दोस्त को मदद के लिए नहीं बुलाया होता तो शायद अनहोनी हो जाती. अगर आप दिल्ली-एनसीआर में ट्रेवल करती हैं तो अनन्या का ये अनुभव ज़रूर पढ़िए, जो ये बताता है कि लड़कियां कैब में कितनी महफूज़ हैं. अनन्‍या भट्टाचार्य इंडिया टुडे ग्रुप में काम करती हैं. 11 जुलाई की रात को अनन्‍या ने एक के बाद एक ट्वीट किए. और पूरी कहानी बताई. अनन्‍या ने लिखा,
'रात करीब 10.55 बजे मैंने अपने दोस्त के यहां से उबर कैब ली. मैं कार में सवार हुई. कर में मुझे अल्‍कोहल और पान की गंध महसूस हुई. कार स्टार्ट हुई. मैंने ड्राइवर को लोकेशन के बारे में बताया. और नेविगेशन फॉलो करने को बोला. नोएडा- ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर. हम सर्विस लेन पर थे. पांच मिनट में कार रुक गई. uber मैंने ड्राइवर से पूछा क्या हुआ? उसने मुझे बताया कि कार में पेट्रोल ख़त्म हो गया है. जहां उसने कार रोकी, वहां अंधेरा था और वह इलाका क्राइम के लिए बदनाम है. ड्राइवर ने अपने मोबाइल से किसी को फोन किया और पेट्रोल पंप से तेल लाने को कहा. ड्राइवर ने फोन पर कहा कि कार में एक औरत है. उसी वक़्त मैंने अपनी दोस्‍त को फोन किया और उस जगह आने को बोला. ड्राइवर ने मुझे बात करते सुना और पूछा कि क्‍या कोई मुझे लेने आ रहा है. मैंने कहा, हां. उसने कार के दरवाजे बंद किए और लाइट जला दी. मैंने उसकी तरफ देखा और लाइट बंद करने को कहा. इस दौरान उसने 5 और कॉल की, शायद दो अलग-अलग लोगों को. 10 मिनट बाद तक कोई नहीं आया. न ही पेट्रोल. मेरी दोस्त वहां पहुंच गई. मैंने ड्राइवर से ट्रिप को एंड करने के लिए बोला. उसने दोनों को नफरत भरी नज़रों से देखा. मैंने फिर उसे ट्रिप खत्म करने को बोला तो उसने अनसुना कर दिया. मैंने ट्रिप कैंसिल कर दी. इस दौरान यूपी पुलिस की पेट्रोलिंग वाली गाड़ी गुजरी, लेकिन उन्होंने गाड़ी रोककर चेकिंग नहीं की कि इतने सुनसान इलाके में बीच रोड पर गाड़ी क्यों खड़ी है?'
इस पूरी घटना पर अनन्या लिखती हैं, 'इस अनुभव के बारे में सोच कर ही कंपकंपी छूट जाती है कि अगर उबर ड्राइवर के दोस्‍तों से पहले मेरी दोस्‍त वहां नहीं पहुंचती तो पता नहीं क्‍या होता.' उन्‍होंने पूरी घटना की शिकायत उबर की मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए की, मगर कंपनी का जवाब 8 घंटे बाद आया. और इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. https://twitter.com/ananya116/status/885066603041361920 उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने अनन्‍या के ट्वीट को गंभीरता से लिया है. पुलिस ने एक्‍सप्रेसवे पर पेट्रोलिंग की बात कही है. यूपी पुलिस के पीआरओ विभाग में एएसपी राहुल श्रीवास्‍तव ने लिखा है, 'नोएडा पुलिस को उस इलाके में बेहतर पेट्रोलिंग के निर्देश दिए जा रहे हैं. आपातकालीन स्थितियों में हमेशा 100 नंबर डायल करें.' अनन्या ने ट्रिप का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया और कहा इस खौफनाक अनुभव में सबसे फनी ये था कि उबर ने कैंसिल ट्रिप के लिए पूरा पैसा काट लिया. uber cab 1 ये अनुभव इसलिए भी डराता है क्योंकि 6 दिसंबर 2014 को उबर कैब में एक लड़की का रेप किया गया. और ये रेप उबर कंपनी की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर ने उस वक़्त किया जब लड़की ने उबर एप से कैब बुक की थी. 7 जनवरी 2015 को फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले का ट्रायल शुरू हुआ. 13 जनवरी को आरोपी शिव कुमार यादव के ऊपर रेप, अपहरण, जान से मारने की कोशिश समेत कई धाराओं में आरोप तय किये थे. 20 अक्टूबर को कोर्ट ने शिवकुमार को दोषी ठहराया था. जिसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. उबर ये सोचकर हायर करते हैं कि रात का वक़्त है. ऑटो नहीं करते कैब ले लें. सेफ रहेंगे. लेकिन जिस तरह से उबर के केस सामने आ रहे हैं. वो महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं. अगर कोई लड़की पूल में उबर कैब हायर करती है. तो बाकी जो लोग गाड़ी में पहले से होंगे या फिर रास्ते में से बैठेंगे तो लड़की तो ये ही सोचेगी कि ये पैसेंजर हैं. और अगर वो पैसेंजर न हो. तब क्या होगा? वो लोग लड़की का रेप कर दें. तो क्या उबर कंपनी उसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' घटना बताकर अपना दामन झाड़ लेगी. रेप केस के बाद भी कोई कंपनी इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है. क्यों कोई एक्शन नहीं लेती? ये तो लड़की के साथ ऐसा हुआ. पुरुष के साथ भी ऐसा कुछ हो जाए तो क्या भरोसा. रात में कहीं भी गाड़ी रोकी जाए. ड्राइवर साथियों को बुलाकर उसे लूट ले तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा. ये मामला बताता है कि उबर में सफर करना है तो अपने रिस्क पर करें.
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