डायरी के पन्ने से BJP के नेताओं पर 1810 करोड़ रुपए लेने का आरोप, कारवां की रिपोर्ट
जानिए, किसके नाम के आगे कितने करोड़ रुपए लिखे हैं...
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फोटो कारवां मैगज़ीन की रिपोर्ट से.
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कारवां मैगज़ीन ने एक रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास एक डायरी के कुछ पन्ने हैं. आरोप है कि ये डायरी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बी एस येदयुरप्पा की है. आरोप है कि इसमें येदयुरप्पा ने अपने हाथ से कन्नड़ में कुछ लिखा हुआ है. कि उन्होंने बीजेपी के बड़े नेताओं को कितना-कितना पैसा दिया. कौन से नेता? अरुण जेटली. नितिन गडकरी. राजनाथ सिंह. लालकृष्ण आडवाणी. मुरली मनोहर जोशी. और बीजेपी की सेंट्रल कमिटी.
किसने दी है ये खबर? 'द कारवां' मैगजीन के मुताबिक, आयकर विभाग के पास 2017 से ही है ये डायरी.
इसके मुताबिक, कथित तौर पर येदयुरप्पा ने कर्नाटक के एक विधायक की 2009 की डायरी में इन पेमेंट्स का हिसाब-किताब लिखा हुआ था. अपनी हैंडराइटिंग में. इन सारे भुगतानों के अलावा कुछ जजों और वकीलों को भी पैसा देने की बात लिखी हुई है. वैसे जैन हवाला कांड का हवाला देते हुए कई लोगों ने बताया है कि इस तरह की हाथ से लिखी एंट्रीज की कोई कानूनी कीमत नहीं होती.

ये 'द कैरवां' की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट है. बाईं तरफ कथित डायरी की एंट्री. दाहिनी तरफ कन्नड़ भाषा में लिखे उन डिटेल्स का अंग्रेजी ट्रांसलेशन.
किन-किन नेताओं को कितना पैसा देने का आरोप है? कैरवां ने येदयुरप्पा की लिखी इस डायरी एंट्रीज की कथित तस्वीरें भी छापी हैं. डायरी में लिखा है- मुझे मुख्यमंत्री बनाने वालों में बड़ा योगदान जनार्दन रेड्डी का है. आगे लिखा है- उन लोगों का ब्योरा, जिनके लिए जनार्दन रेड्डी ने पैसा दिया है. आगे कुछ नेताओं के नाम हैं. नाम के आगे उन्हें दिए गए पैसे दर्ज़ हैं. ये नाम हैं-
जिस समय का ये नोट बताया जा रहा है, उस वक्त जेटली कर्नाटक बीजेपी के प्रभारी थे. 2004 से 2013 तक उन्होंने ये जिम्मेदारी संभाली. कारवां का कहना है कि उसने इस मामले में इन नेताओं का पक्ष जानने की कोशिश की थी. येदयुरप्पा, जेटली, गडकरी, राजनाथ, आडवाणी और जोशी, सबको सवाल भेजे थे. मगर रिपोर्ट छापे जाने तक किसी ने भी जवाब नहीं दिया था.
2008 में कर्नाटक के अंदर क्या हुआ था? 2008 में कर्नाटक के अंदर विधानसभा चुनाव हुए थे. बीजेपी को 110 सीटें मिलीं. मगर सरकार बनाने के लिए तीन और विधायक चाहिए थे. येदयुरप्पा मुख्यमंत्री कैंडिडेट थे बीजेपी के. राज्य में खूब खरीद-फरोख़्त हुई. ये पूरा अध्याय 'ऑपरेशन लोटस' के नाम से कुख्यात हुआ. कांग्रेस और जनता दल सेकुलर के 20 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया. इसकी वजह से मेजॉरिटी वाला आंकड़ा घट गया. येदयुरप्पा ने सरकार बना ली. बाद में इस्तीफ़ा देने वालों ने उपचुनाव लड़ा. जिन निर्दलीय उम्मीदवारों ने येदयुरप्पा को समर्थन दिया, वो बाद में कैबिनेट का हिस्सा बनाए गए. इनमें से भी कई नेताओं का नाम डायरी में दर्ज़ भुगतान पाने वालों की लिस्ट में शामिल है.
जर्नादन रेड्डी कौन हैं? जिन जर्नादन रेड्डी की तरफ से बीजेपी नेताओं को पैसा देने की बात कही गई है, वो काफी विवादित नाम है. रेड्डी की गिनती सबसे अमीर नेताओं में होती है. 2008 में येदुरप्पा ने अपनी सरकार में उन्हें टूरिज्म ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चरल डिवेलपमेंट मंत्री भी बनाया था. सितंबर 2011 में CBI ने अवैध खनन मामले में अरेस्ट किया. करीब तीन साल जेल में बंद रहने के बाद 2015 में जर्नादन रेड्डी को जमानत मिली. फिर नवंबर 2018 में फिर से वो अरेस्ट हो गए. फिर जमानत मिल गई. कर्नाटक के लोकायुक्त ने 35 हज़ार करोड़ के अवैध खनन घोटाले में जर्नादन रेड्डी को मुख्य आरोपी बताया था.
येदयुरप्पा पर करप्शन के क्या आरोप लगे? येदयुरप्पा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं. उनके ऊपर एक खनन घोटाले में रिश्वत लेने का आरोप है. इन आरोपों के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. तब येदयुरप्पा ने 'कर्नाटक जनता पक्ष' के नाम से एक अलग पार्टी बनाई. 2014 के चुनाव से पहले उन्हें फिर से बीजेपी में ले आया गया. फिर उन्हें करप्शन केस में भी क्लीन चिट मिल गई. 2018 के विधानसभा चुनाव में भी वो बीजेपी के मुख्यमंत्री कैंडिडेट थे. फिलहाल विपक्ष के नेता हैं राज्य में.
कांग्रेस ने क्या कहा? कारवां की इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने एक स्पेशल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि येदयुरप्पा ने मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान बीजेपी के बड़े नेताओं को पैसे दिए. सुरजेवाला ने बीजेपी से पूछा. कि वो बताए कि ये आरोप सही हैं या नहीं. उन्होंने कहा-
बीजेपी का कहना है कि जिन डायरी एंट्रीज को सबूत बताया जा रहा है, वो फर्ज़ी हैं. बाईं तरफ कथित डायरी एंट्री की फोटो है. दाहिनी तरफ उन्होंने एक लेटर लगाया है, जिसके नीचे येदयुरप्पा के हस्ताक्षर हैं. बीजेपी कह रही है कि ये दोनों अलग हैं.

ये राजीव चंद्रशेखर का ट्वीट है. उनका कहना है कि इस कथित डायरी के बारे में कर्नाटक में हर कोई जानता है. 2018 की शुरुआत से ही. कि ये डायरी राहुल गांधी और उनके पसंदीदा डी के शिवकुमार की गढ़ी हुई है.
येदयुरप्पा ने क्या कहा? येदयुरप्पा ने भी इस न्यूज रिपोर्ट पर रिऐक्ट किया है. उनका कहना है कि चुनाव में फायदा पाने के लिए जान-बूझकर ये झूठी खबर प्लांट की गई है. उन्होंने ये भी कहा कि वो इस मामले में मानहानि का मुकदमा दायर करने के बारे में अपने वकीलों से बात कर रहे हैं. येदयुरप्पा का कहना है कि आयकर विभाग के अधिकारी पहले ही बता चुके हैं कि ये कागज़ात नकली और फर्ज़ी हैं.
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किसने दी है ये खबर? 'द कारवां' मैगजीन के मुताबिक, आयकर विभाग के पास 2017 से ही है ये डायरी.
इसके मुताबिक, कथित तौर पर येदयुरप्पा ने कर्नाटक के एक विधायक की 2009 की डायरी में इन पेमेंट्स का हिसाब-किताब लिखा हुआ था. अपनी हैंडराइटिंग में. इन सारे भुगतानों के अलावा कुछ जजों और वकीलों को भी पैसा देने की बात लिखी हुई है. वैसे जैन हवाला कांड का हवाला देते हुए कई लोगों ने बताया है कि इस तरह की हाथ से लिखी एंट्रीज की कोई कानूनी कीमत नहीं होती.

ये 'द कैरवां' की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट है. बाईं तरफ कथित डायरी की एंट्री. दाहिनी तरफ कन्नड़ भाषा में लिखे उन डिटेल्स का अंग्रेजी ट्रांसलेशन.
किन-किन नेताओं को कितना पैसा देने का आरोप है? कैरवां ने येदयुरप्पा की लिखी इस डायरी एंट्रीज की कथित तस्वीरें भी छापी हैं. डायरी में लिखा है- मुझे मुख्यमंत्री बनाने वालों में बड़ा योगदान जनार्दन रेड्डी का है. आगे लिखा है- उन लोगों का ब्योरा, जिनके लिए जनार्दन रेड्डी ने पैसा दिया है. आगे कुछ नेताओं के नाम हैं. नाम के आगे उन्हें दिए गए पैसे दर्ज़ हैं. ये नाम हैं-
लालकृष्ण आडवाणी- 50 करोड़ राजनाथ सिंह- 100 करोड़ नितिन गडकरी- 150 करोड़ मुरली मनोहर जोशी- 50 करोड़ अरुण जेटली- 150 करोड़ जजों को- 250 करोड़ वकीलों को- 50 करोड़ नितिन गडकरी के बेटे की शादी में- 10 करोड़ बीजेपी सेंट्रल कमिटी को- 1,000 करोड़'सरकार और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इसे दबा दिया' कारवां के मुताबिक, केंद्र सरकार और आयकर विभाग दोनों ने अगस्त 2017 से इस डायरी एंट्रीज को दबाया हुआ है. मैगजीन का कहना है कि इनकम टैक्स के एक सीनियर अधिकारी ने इस बारे में अरुण जेटली से पूछा था. कि क्या इस मामले में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) से जांच करवाई जानी चाहिए. ED वित्तीय और आर्थिक अपराधों की जांच करती हैं. जेटली से इस जांच के बारे में पूछा गया, जबकि खुद उनका नाम था इन एंट्रीज में. जेटली ने इस पर कुछ नहीं किया.
जिस समय का ये नोट बताया जा रहा है, उस वक्त जेटली कर्नाटक बीजेपी के प्रभारी थे. 2004 से 2013 तक उन्होंने ये जिम्मेदारी संभाली. कारवां का कहना है कि उसने इस मामले में इन नेताओं का पक्ष जानने की कोशिश की थी. येदयुरप्पा, जेटली, गडकरी, राजनाथ, आडवाणी और जोशी, सबको सवाल भेजे थे. मगर रिपोर्ट छापे जाने तक किसी ने भी जवाब नहीं दिया था.
2008 में कर्नाटक के अंदर क्या हुआ था? 2008 में कर्नाटक के अंदर विधानसभा चुनाव हुए थे. बीजेपी को 110 सीटें मिलीं. मगर सरकार बनाने के लिए तीन और विधायक चाहिए थे. येदयुरप्पा मुख्यमंत्री कैंडिडेट थे बीजेपी के. राज्य में खूब खरीद-फरोख़्त हुई. ये पूरा अध्याय 'ऑपरेशन लोटस' के नाम से कुख्यात हुआ. कांग्रेस और जनता दल सेकुलर के 20 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया. इसकी वजह से मेजॉरिटी वाला आंकड़ा घट गया. येदयुरप्पा ने सरकार बना ली. बाद में इस्तीफ़ा देने वालों ने उपचुनाव लड़ा. जिन निर्दलीय उम्मीदवारों ने येदयुरप्पा को समर्थन दिया, वो बाद में कैबिनेट का हिस्सा बनाए गए. इनमें से भी कई नेताओं का नाम डायरी में दर्ज़ भुगतान पाने वालों की लिस्ट में शामिल है.
जर्नादन रेड्डी कौन हैं? जिन जर्नादन रेड्डी की तरफ से बीजेपी नेताओं को पैसा देने की बात कही गई है, वो काफी विवादित नाम है. रेड्डी की गिनती सबसे अमीर नेताओं में होती है. 2008 में येदुरप्पा ने अपनी सरकार में उन्हें टूरिज्म ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चरल डिवेलपमेंट मंत्री भी बनाया था. सितंबर 2011 में CBI ने अवैध खनन मामले में अरेस्ट किया. करीब तीन साल जेल में बंद रहने के बाद 2015 में जर्नादन रेड्डी को जमानत मिली. फिर नवंबर 2018 में फिर से वो अरेस्ट हो गए. फिर जमानत मिल गई. कर्नाटक के लोकायुक्त ने 35 हज़ार करोड़ के अवैध खनन घोटाले में जर्नादन रेड्डी को मुख्य आरोपी बताया था.
येदयुरप्पा पर करप्शन के क्या आरोप लगे? येदयुरप्पा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं. उनके ऊपर एक खनन घोटाले में रिश्वत लेने का आरोप है. इन आरोपों के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. तब येदयुरप्पा ने 'कर्नाटक जनता पक्ष' के नाम से एक अलग पार्टी बनाई. 2014 के चुनाव से पहले उन्हें फिर से बीजेपी में ले आया गया. फिर उन्हें करप्शन केस में भी क्लीन चिट मिल गई. 2018 के विधानसभा चुनाव में भी वो बीजेपी के मुख्यमंत्री कैंडिडेट थे. फिलहाल विपक्ष के नेता हैं राज्य में.
कांग्रेस ने क्या कहा? कारवां की इस रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने एक स्पेशल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि येदयुरप्पा ने मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान बीजेपी के बड़े नेताओं को पैसे दिए. सुरजेवाला ने बीजेपी से पूछा. कि वो बताए कि ये आरोप सही हैं या नहीं. उन्होंने कहा-
डायरी में राजनाथ सिंह से लेकर जेटली तक के नामों का ज़िक्र है. बीजेपी की टॉप लीडरशिप को 1,800 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए जाने का आरोप है. ये इल्ज़ाम सही हैं या ग़लत? येदयुरप्पा के हस्ताक्षर वाली डायरी 2017 से ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास थी. अगर ऐसा है, तो मोदी जी और बीजेपी ने इसकी जांच क्यों नहीं करवाई?
बीजेपी ने क्या जवाब दिया? कांग्रेस के लगाए आरोपों के जवाब में बीजेपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें रवि शंकर प्रसाद बोले. कहा, कांग्रेस के इल्ज़ाम झूठे हैं. बीजेपी के मुताबिक-Randeep Surjewala,Congress: Is it true or false? The diary with BS Yeddyurappa's sign on it was with the Income Tax Department since 2017. If that is the case why did Modi ji and BJP did not get it investigated? https://t.co/mzQV53tp00
— ANI (@ANI) March 22, 2019
- 2017 में इनकम टैक्स ने कांग्रेस के एक विधान परिषद सदस्य पर छापा मारा था. इसमें एक डायरी मिली थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को पैसे दिए जाने की एंट्रीज थीं. इसके बाद कांग्रेस के डी के शिवकुमार ने एक डायरी के कुछ पन्नों की लूज़ कॉपी दी आयकर विभाग के अधिकारियों को. इसमें कुछ नेताओं के नाम थे और पैसे का ज़िक्र था. अफसरों ने पूछा कि क्या वो उन कागजों को ऑथेंटिकेट कर सकते हैं. इस पर शिवकुमार ने ना कहा. बीजेपी का कहना है कि ये जो कथित एंट्रीज अभी आई हैं, वो वही हैं. - येदयुरप्पा की लिखावट ही नहीं है वो. - येदयुरप्पा ने कहा है कि वो कभी डायरी लिखते ही नहीं.

बीजेपी का कहना है कि जिन डायरी एंट्रीज को सबूत बताया जा रहा है, वो फर्ज़ी हैं. बाईं तरफ कथित डायरी एंट्री की फोटो है. दाहिनी तरफ उन्होंने एक लेटर लगाया है, जिसके नीचे येदयुरप्पा के हस्ताक्षर हैं. बीजेपी कह रही है कि ये दोनों अलग हैं.

ये राजीव चंद्रशेखर का ट्वीट है. उनका कहना है कि इस कथित डायरी के बारे में कर्नाटक में हर कोई जानता है. 2018 की शुरुआत से ही. कि ये डायरी राहुल गांधी और उनके पसंदीदा डी के शिवकुमार की गढ़ी हुई है.
येदयुरप्पा ने क्या कहा? येदयुरप्पा ने भी इस न्यूज रिपोर्ट पर रिऐक्ट किया है. उनका कहना है कि चुनाव में फायदा पाने के लिए जान-बूझकर ये झूठी खबर प्लांट की गई है. उन्होंने ये भी कहा कि वो इस मामले में मानहानि का मुकदमा दायर करने के बारे में अपने वकीलों से बात कर रहे हैं. येदयुरप्पा का कहना है कि आयकर विभाग के अधिकारी पहले ही बता चुके हैं कि ये कागज़ात नकली और फर्ज़ी हैं.
BS Yeddyurappa, BJP: They have planted the story in the media to gain mileage in the upcoming elections. Issues raised by Congress leaders are irrelevant and false. I'm discussing with the senior advocates to file a defamation case against the concerned person also. https://t.co/lECh5weSVG
— ANI (@ANI) March 22, 2019
NSSO की PLFS रिपोर्टः 15 साल में पुरुषों की बेकारी सबसे ज़्यादा

