थाईलैंड में भारतीयों के लिए वीजा-फ्री एंट्री बंद, तंग आ गई थी थाई सरकार
Thailand सरकार ने भारत को Visa On Arrival कैटेगरी में डाल दिया है. पहले भारतीय नागरिक 60 दिन तक बिना वीजा के थाईलैंड में रह सकते थे. लेकिन अब सिर्फ 15 दिनों तक ही रुक सकते हैं. इसके लिए फीस भी चुकानी होगी.

थाईलैंड जाने का प्लान बना रहे भारतीय पर्यटकों के लिए बुरी खबर है. थाईलैंड सरकार ने भारत के लिए 60 दिनों की वीजा-फ्री एंट्री स्कीम खत्म कर दी है. पहले भारतीय नागरिक 60 दिन तक बिना वीजा रह सकते थे. लेकिन अब भारत को ‘वीजा ऑन अराइवल’ कैटेगरी में डाल दिया गया है. इस वीजा के तहत भारतीय नागरिक थाईलैंड में सिर्फ 15 दिनों तक ही रुक सकते हैं. इसके लिए उन्हें फीस भी चुकानी होगी.
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 19 मई को बदले हुए वीजा छूट और वीजा ऑन अराइवल नियमों को मंजूरी दे दी गई है. इन नियमों के तहत विदेशी यात्रियों के लिए कई कैटेगरी बनाई गई हैं. अब भारत वीजा-फ्री एक्सेस लिस्ट का हिस्सा नहीं है. भारत अब अजरबैजान, बेलारूस और सर्बिया के साथ ‘वीजा ऑन अराइवल' (VoA) कैटेगरी में शामिल है. पहले इस कैटेगरी में 31 देश शामिल थे.

थाईलैंड अब सिर्फ 54 देशों के नागरिकों को 30 दिनों की वीजा छूट देगा. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर और कई यूरोपीय देश शामिल हैं. सेशेल्स, मालदीव और मॉरीशस के लिए अलग से 15 दिन की वीजा छूट शुरू की गई है.
इसके अलावा, कुछ देशों को रेसिप्रोकल वीजा छूट दी गई है. इसका सीधा मतलब होता है ‘अदला-बदली के आधार पर वीजा माफी’. आसान शब्दों में, जब दो देश आपस में यह समझौता करते हैं कि "अगर आप हमारे नागरिकों को अपने देश में बिना वीजा के आने देंगे, तो हम भी आपके नागरिकों को अपने देश में बिना वीजा के आने देंगे," तो इसे रेसिप्रोकल वीजा छूट कहते हैं. नए नियमों के तहत,
90-दिन की रेसिप्रोकल वीजा छूट: इसमें अर्जेंटीना, पेरू, चिली, ब्राजील और दक्षिण कोरिया शामिल हैं.
30-दिन की रेसिप्रोकल वीजा छूट: इसमें चीन, हांगकांग, रूस, लाओस, मकाऊ, तिमोर-लेस्ते और कजाकिस्तान शामिल हैं.
14-दिन की रेसिप्रोकल वीजा छूट: कंबोडिया और म्यांमार पर लागू (सिर्फ हवाई यात्रा के लिए). यानी इसका फायदा उठाने के लिए केवल हवाई रास्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है.
थाईलैंड वीजा नियमों को सख्त क्यों कर रहा है?
कोविड-19 महामारी के बाद थाईलैंड की टूरिज्म इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ा. देश की जीडीपी में टूरिज्म का 10% से ज्यादा का योगदान है. इकोनॉमी को वापस पटरी पर लाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करना जरूरी था. इसके लिए थाईलैंड सरकार ने नवंबर 2023 में कई देशों के लिए 30 दिनों की वीजा फ्री एंट्री की शुरुआत की. इनमें भारत भी शामिल था. जुलाई 2024 में इसे बढ़ाकर 60 दिनों के लिए कर दिया गया.
लेकिन बाद में सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को लेकर थाईलैंड सरकार की चिंता बढ़ने लगी. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड के पर्यटन और खेल मंत्री सुरसाक फानचारोनवोराकुल ने बताया कि इस ढीली नीति का कुछ विदेशी तत्वों ने गलत फायदा उठाना शुरू कर दिया. इसकी वजह से इस सुविधा को रद्द करने का फैसला लिया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, कई विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार भी किया गया. इन पर नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों और सेक्स ट्रैफिकिंग से लेकर, बिना सही परमिट के होटल और स्कूल चलाने तक के आरोप लगे थे.
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भारतीय नागरिकों को अब क्या करना होगा?
भारत को अब वापस वीजा ऑन अराइवल कैटेगरी में डाल दिया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारतीय नागरिक बिना किसी कागजी कार्रवाई या फीस के सीधे थाईलैंड में एंट्री नहीं कर सकते. उन्हें थाईलैंड के एयरपोर्ट पर पहुंचकर पहले वीजा के लिए अप्लाई करना होगा और फीस चुकानी होगा, तभी आपको थाईलैंड में एंट्री मिलेगी.
ट्रैवल मैगजीन ‘सीएन ट्रेवलर’ के मुताबिक, अब तक वीजा-फ्री स्कीम के तहत भारतीय नागरिक थाईलैंड में 30 से 60 दिनों तक रुक सकते थे. लेकिन अब वीजा ऑन अराइवल कैटेगरी के बाद वे थाईलैंड में सिर्फ 15 दिनों तक ही रुक पाएंगे. पहले एंट्री पूरी तरह फ्री थी. अब थाईलैंड एयरपोर्ट पर प्रति व्यक्ति 2,000 थाई बाट (करीब 6 हजार भारतीय रुपये) की वीजा फीस चुकानी होगी.
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