तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक साल से विरोध प्रदर्शन चल रहा रहा है. पीएममोदी ने शुक्रवार 19 नवंबर को ये कानून वापस लेने की घोषणा की. हालांकि इसके बाद भीआंदोलन जारी रहेगा. क्योंकि किसानों का कहना है कि उनकी अन्य मांगों पर विचार नहींकिया गया है. इस बीच पिछले एक साल में किसान आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले करीब750 किसानों के परिवार को तेलंगाना सरकार तीन-तीन लाख रुपये का मुआवजा देगी.तेलंगाना सरकार ने ऐलान किया है कि वह इस मुआवजे के लिए 22 करोड़ रुपये आवंटित कररही है.इसके आलावा KCR यानी तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी ने केंद्र सरकार से एक मांग भीकी है. मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा है कि केंद्र सरकार आंदोलन में मारे गएप्रत्येक किसान परिवारों को 25 लाख रुपये देकर उनकी आर्थिक मदद करे. किसानों केखिलाफ दर्ज मामले और बिजली (संशोधन) विधेयक वापस ले.आज तक के पत्रकार आशीष पांडेय की रिपोर्ट के मुताबिक, केसीआर रविवार, 21 नवंबर कोदिल्ली में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और इस मुद्दे पर पीएम से मिलकर इसपर बात करने की कोशिश करेंगे.वरुण गांधी ने एक-एक करोड़ मुआवजा देने को कहावहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने पीएम मोदी को लेटरलिख आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपएमुआवजे की मांग की है. वरुण गांधी ने कृषि कानून (Farm Laws) वापस लेने पर पीएममोदी को धन्यवाद दिया है. लिखा है,आपने तीन कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है, उसके लिए मैं आपको साधूवाद देताहूं. पिछले एक साल में 700 से ज्यादा किसान भाइयों की शहादत हो चुकी है.मेरा माननाहै कि यह फैसला पहले ही हो जाता तो इतनी जनहानि नहीं होती. मेरी मांग है कि इनकिसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए. आंदोलन के दैरान दर्जमुकदमें रद्द किए जाएं.तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा का मैं स्वागत करता हूँ। मेरा विनम्रनिवेदन है कि एमएसपी पर कानून बनाने की मांग व अन्य मुद्दों पर भी अब तत्काल निर्णयहोना चाहिए, जिससे किसान भाई आंदोलन समाप्त कर ससम्मान घर लौट जाएं।आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नाम इस विषय में मेरा पत्र: pic.twitter.com/ndnL1xIx2c— Varun Gandhi (@varungandhi80) November 20, 2021वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम की घोषणा के एक दिन बाद शनिवार, 20 नवंबर कोमीटिंग की. इसमें फैसला हुआ कि आंदोलन जारी रहेगा. संयुक्त किसान मोर्चा का कहना हैकि जहां भारत के प्रधानमंत्री ने तीन काले कृषि कानूनों को निरस्त करने के अपनीसरकार के फैसले की घोषणा की, वे किसानों की लंबित मांगों पर चुप रहे. किसान आंदोलनमें अब तक 670 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं और भारत सरकार ने श्रद्धांजलि देनातो दूर उनके बलिदान तक को स्वीकार नहीं किया. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,दिल्ली, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश और अन्य जगह हजारों किसानों को सैकड़ों झूठे मामलोंमें फंसाया गया है. उनकी मांग है कि सरकार इन फर्जी मुकदमों को जल्द से जल्द रद्दकरे.