न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने घोषणा की है कि हमारे देश में कोविड 19 से जुड़ा एक भी एक्टिव केस नहीं है. और इसलिए न्यू ज़ीलैंड ने कोविड 19 के चलते लगाई गईं सभी बंदिशों को हटा लिया है. क्या ये मानव की कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में पहली जीत है?
दुनिया ठीक हो चली है, ये हमें कब पता चलेगा?
सड़कों पर उतरे बनरोज
या इंसान के छोड़े रास्तों पर उग आई घास देख मान लिया जाए
कि सब ठीक हो रहा है?
हवा साफ़ हो लेकिन इंसान सांस लेने में घबराए!
तो क्या मान लें कि सब ठीक हो चला है?
या दूर देश से आते देख तस्वीरें देख इत्मीनान कर लें.
वो देश जहां खिलाड़ी मैदान में कोहनियां उठा-उठाकर करते थे हाका.
वहां घास पर फिर गिरने वाली है दूधिया रोशनी.
बताते हैं कि वहां वायरस की जकड़ में आया आख़िरी मरीज भी लौट गया है घर.
हम उम्मीद कर सकते हैं, इस लौटने से लौटने का दौर शुरू होगा.
चीजें ठीक होने लगी हैं,
क्योंकि बस को ताकती सवारियां एक बार फिर छेंकने लग गईं हैं इंतज़ार वाली कुर्सियां.
हम उम्मीद कर सकते हैं, कि तमाम इंतजार एक दिन ख़त्म हो ही जाएंगे.
किसी सड़क किनारे किसी नेता का होर्डिंग दिखा तो अहसास हुआ
कि पहले जैसी हो जाएगी राजनीति,
लेकिन हम ये भी उम्मीद कर सकते हैं, कि पहले ही जैसी हो जाएगी ज़िंदगी.
लॉकडाउन ने हमें बताया कि लक्जरी क्या होती है,
दुकानों के खुद बंद हो जाने वाले दरवाजे,
पार्क में घूमते कुत्ते, उस हर इंसान का दिखना,
जिसे हमने कभी जाना है.
उस देश से आती ख़बर, जिसका नाम हमने क्रिकेट के मैचों में सुना है.
हम उस देश से उम्मीद करें कि वो जल्द ही हमारे आख़िरी मरीज़ के घर लौट जाने की बात सुनेंगे.
वीडियो देखें: तस्वीर: कोरोना को हराने के बाद की न्यूज़ीलैंड की तस्वीरें देखिए