ये तस्वीरें हैं ऑस्ट्रिया के सैल्ट्ज़बर्ग के एक चिड़ियाघर की. तस्वीरों में एक 3-4 दिन का बेबी-राइनो अपनी मां ‘टामू’ के साथ खेल रही है. अभी इस बेबी-राइनो का नामकरण नहीं किया गया है.
दुनिया को पहले-पहल देखना इतना ही ख़ूबसूरत होता है, जितना कि अभी पिछले दिनों आई उछलती कूदती ये बच्ची. महीनों तक पेट में कुलबुलाने के बाद धरती पर पांव पड़े हैं इसके.
हर शय इसके लिए नई नवेली है. एकदम कि जैसे ताज़ा धुली हुई गमकती उम्मीद रख दी गई हो ज़मीन पर. अभी-अभी बोई गई सींग को थपकियां दे रही है मां. भर-भर के लाड़ दुलार कर रही है मां अपनी लाडो को.
सही कहा था एक फ़कीर ने कि अपने सारे डर सारी फ़िकर उतार फेंको, और तुम देखोगे कि तुम बच्चे बन गए हो. ईश्वर का सबसे जाना - पहचाना चेहरा बन गए हो.
मां के साथ कदमताल करती बच्ची चाहती है दौड़ते-दौड़ते उड़ जाना. इसीलिए मां हौले से भागते हुए कनखियों से देख रही है अपन
पहले पहल दुनिया को देखना हममें से किसी को नहीं याद. लेकिन हमारी माओं को अच्छी तरह से याद है हमारी आंखों की वो चमक, जिसे पहली बार देखा था मां ने अपनी आंखों में देखते हुए.
उम्मीद के पांव नन्हे होते हैं, लेकिन वो आसमान माप सकती है, अगर ख़ुद पर भरोसा हो तो.