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कौन हैं 17 साल 'देश निकाला' के बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, जो PM पद के तगड़े दावेदार हैं?

Tarique Rehman 17 साल निर्वासन में बिताने के बाद 25 दिसंबर को Bangladesh लौटे हैं. वापस आने पर उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए समावेशी बांग्लादेश बनाने की अपील की.

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tarique rahman returns after 17 years exile appeals peace and inclusive bangladesh
लंदन से लौटने के बाद तारिक रहमान ने ढाका में अपने समर्थकों को संबोधित किया. (Photo: Reuters)
26 दिसंबर 2025 (अपडेटेड: 26 दिसंबर 2025, 02:37 PM IST)
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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल का निर्वासन झेलने के बाद गुरुवार, 25 दिसंबर को देश लौट आए. देश लौटते ही सबसे पहले वह अपने समर्थकों से मिलने गए, जो हजारों की तादाद में उनके स्वागत के लिए जमा हुए थे. तारिक रहमान ने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए लोगों से शांति, एकता और संयम बनाए रखने की अपील की.

उन्होंने कहा कि यह देश सभी क्षेत्रों और धर्म के लोगों का है. तारिक ने एक समावेशी बांग्लादेश बनाने की अपील की, जिसमें सभी धर्म के लोग सुरक्षित रह सकें. मालूम हो कि बांग्लादेश में बीते कई महीनों से हिंसा की चपेट में है. अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने और उन पर हमला करने के भी कई मामले सामने आए. इस बीच तारिक रहमान का भाषण वापस से शांति बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भीड़ से अपील करते हुए कहा,

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तारिक रहमान ने लोगों के सामने देश के लिए अपना विजन पेश करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मेरे पास अपने देश के लोगों और अपने देश के लिए एक योजना है. उन्होंने इस योजना को जन कल्याण, देश के विकास और इसका भाग्य बदलने पर केंद्रित बताया. कहा कि योजना को लागू करने के लिए उन्हें देश के सभी लोगों के समर्थन की जरूरत है. सबके समर्थन से ही इसे साकार करना संभव होगा.

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं. खालिदा जिया अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी रही हैं. तारिक पर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से लेकर राजनीतिक हिंसा तक के आरोप लगे थे. साल 2006 से 2009 तक बांग्लादेश में एक मिलिट्री समर्थित केयरटेकर सरकार थी. उस दौरान इन मामलों की जांच शुरू हुई और मार्च 2007 में उन्हें ढाका स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया था. कुछ महीनों बाद वह जमानत पर रिहा हुए. इसके बाद वह मेडिकल इलाज के लिए यूनाइटेड किंगडम चले गए. तब से वह यूके में एक्साइल यानी निर्वासन में रह रहे हैं.

यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या, पुलिस ने मृतक के बारे में बड़े दावे किए

साल 2009 में शेख हसीना के बांग्लादेश की सत्ता में आने के बाद भी उन पर मुकदमे चलते रहे और कई मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया. BNP और तारिक ने हमेशा इन मुकदमों को राजनीति से प्रेरित बताया है. 2024 में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ होने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों को वापस ले लिया. अब बांग्लादेश के आने वाले आम चुनाव में उन्हें प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है.

क्यों कहा जाता है 'डार्क प्रिंस'?

साल 1971. जब बांग्लादेश पाकिस्तान से आजादी की जंग लड़ रहा था, तब तारिक छोटे बच्चे थे. उन्हें उनकी मां और भाई के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था. उनकी पार्टी कहती है कि तारिक रहमान आजादी की जंग के सबसे कम उम्र के कैदी थे. फिर 80 के दशक में वो मिलिट्री शाशक हुसैन मोहम्मद इरशाद के खिलाफ सड़कों पर उतरे. जब 1991 में मां खालिदा जिया पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, तो उस चुनाव प्रचार की कमान पीछे से बेटे तारिक़ ने ही संभाल रखी थी.

हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू भी है. 2001 से 2006 का वो दौर जब खालिदा जिया दोबारा प्रधानमंत्री बनीं. पुराने लोग कहते हैं कि उस वक्त सरकार पीएम हाउस से नहीं बल्कि 'हवा भवन' से चलती थी. ये हवा भवन तारिक रहमान का ऑफिस था. आरोप लगते थे कि देश का कोई भी बड़ा ठेका यहां चढ़ावा चढ़ाए बिना पास नहीं होता. ढाका ट्रिब्यून ने उनसे जुडी एक रिपोर्ट लिखी है, जिसमें अमेरिकी दूतावास के पुराने दस्तावेज़ों के हवाले से बताया है कि उन्होंने करोड़ों डॉलर की अवैध कमाई की थी. ढाका ट्रिब्यून अखबार ने तो उन्हें 'डार्क प्रिंस' तक कह दिया था.

शेख हसीना की रैली पर बम फेंकने का आरोप

सबसे बड़ा आरोप 2004 के ग्रेनेड हमले को लेकर लगता है. उस बरस शेख हसीना की रैली पर बम फेंके गए. तब bnp की सरकार थी.24 लोग मारे गए थे. आरोप लगा कि ये सब सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके करवाया गया था और इसका मास्टरमाइंड तारिक़ रहमान को बताया गया.

फिर वक्त का पहिया घूमा. BNP के हाथ से सत्ता गई, तो 2007 में सेना समर्थित सरकार आई. डार्क प्रिंस को जेल में डाल दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में उन्हें इतना टॉर्चर किया गया कि वो बीमार पड़ गए. 2008 में इलाज के नाम पर वो लंदन गए और फिर वही उनका घर बन गया. 17 साल का लंबा वनवास. 2018 में तो कोर्ट ने उन्हें ग्रेनेड हमले के लिए उम्रकैद की सजा भी सुना दी थी. लेकिन राजनीति में द एंड कभी नहीं होता. अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरी और तारिक़ की किस्मत का ताला खुल गया. उनके खिलाफ चल रहे सारे 84 मुकदमे वापस ले लिए गए. चाहे वो ग्रेनेड हमले का केस हो या मनी लॉन्ड्रिंग का. अब वो कानून की नजर में एकदम बेदाग हैं.

वीडियो: दुनियादारी: बांग्लादेश में तारिक रहमान की हुई एंट्री, अपनी स्पीच में भारत पर क्या कह दिया?

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