जैसे हमारे यहां बिग बाज़ार होता है, वैसे ही अमेरिका में 'टारगेट' नाम का स्टोरहोता है. और जो लोग 'बिग बाज़ार' से शॉपिंग करते हैं, खासकर दिल्ली जैसी जगह पर, वोजानते हैं कितनी बड़ी भीड़ लाइन में खड़ी रहती है. ऐसे में कोई अगर पैसे चुकाने मेंदेरी करें, तो बहुत खीजता है न दिमाग. ऐसा ही हुआ एक टारगेट स्टोर में. लेकिन इसबार कस्टमर एक बूढ़ी औरत थी. तो ये बूढ़ी औरत लाइन में लगी हुई थी. और देने के लिएउसके पास केवल खुले पैसे थे. जिसे जल्दी से गिन पाना मुनासिब ही नहीं था. बुढ़िया केपास पैसे देने का कोई और जरिया नहीं था. बेचारी के पास जो था, जोड़-जाड़कर ले आई थी.लेकिन लाइन में वो नर्वस हो गई थी. क्योंकि उसकी वजह से लाइन रुकी हुई थी. और पीछेवाले लोग न सिर्फ परेशान हैं, बल्कि उसे भला-बुरा कहेंगे, इस बात का उसे डर था. जबवो कैशियर के पास पहुंची, घबराई हुई थी. कैशियर इशमेल गिल्बर्ट ने उनसे कहा, 'आंटी,आप क्यों परेशान हैं. लाइए, पैसे मैं गिनवा देता हूं. थोड़ा इंतजार ही तो करना है,लोग कर लेंगे. अगर आज आप जैसे लोग न होते, तो हम लोग न होते.' इशमेल ने पूरे धैर्यके साथ औरत के पैसे गिनवाए, उसको उसका सामान थमाया. और उसको उसके बारे में बेहतरमहसूस करवाया. हमें लग सकता है कि ये सब सोशल मीडिया पर अटेंशन पाने के लिए होगा,मगर उस वक़्त वहां पर कोई कैमरा नहीं था. एक औरत जो लाइन में खड़ी थी, उसने फटाफटतस्वीर खींच ली. और फेसबुक पर कहानी लिखकर शेयर की. इशमेल को तो अंदाजा भी नहीं थाकि किसी ने उसकी तस्वीर खींची है. सारा बिग्लर, जिसने ये तस्वीर ली थी, उसकी पोस्टहजारों की संख्या में फेसबुक पर शेयर हुई. जब इशमेल के पास रिपोर्टर पहुंचने लगे,उसने कहा, 'मैंने तो कुछ भी ख़ास नहीं किया है. वही किया जो मैं अपनी दादी के साथकरता.' इतना ही नहीं, इशमेल की उदारता एक कस्टमर को इतनी भा गई कि उन्होंने उसेनौकरी का ऑफर दे दिया. इशमेल ने भी मौका नहीं छोड़ा और अब वो एक मेडिकल केयर सेंटरमें काम कर रहा है. वो काम जो वो सबसे अच्छे से कर सकता है. पूरे प्रेम के साथलोगों का ख़याल रखना. उसकी फॉर्मल ट्रेनिंग चल रही है 'नर्स' के कोर्स की. इशमेल काकहना वो ज्यादा सोचता नहीं. उसे लोगों की दुआएं मिलती रहती हैं और वो उनके साथ जीतारहता है. https://www.youtube.com/watch?v=RaaTKDPoda0