सरकारें रोहित वेमुला की मौत से सबक लेतीं, तो बच जाती 17 साल की अनीता
तमिलनाडु में मामले ने पकड़ा तूल. अनीता के परिवार ने सरकार से हर्जाने की राशि लेने से इनकार कर दिया है.
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रोहित और अनीता.
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अनीता ने NEET से छूट के लिए अपनी जान दी न कि किसी सरकारी हर्जाने के लिए. ये कहना है 17 साल की अनीता के भाई मनिरत्नम का. अनीता ने सुसाइड कर ली थी, जिसके बाद तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी ने पीड़ित परिवार के लिए 7 लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की घोषणा की थी. अब अनीता के परिवार ने ये राशि लेने से इनकार कर दिया है. पढ़िए पूरी खबर.
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पी.एच.डी. छात्र रोहित वेमुला के सुसाइड का मामला तो सबको याद होगा. कोई भूल भी कैसे सकता है. इतनी राजनीति जो हुई थी. कितनी बहस हुई कि वो दलित था या नहीं था. संसद से सड़क तक हंगामा हुआ. काश इन सब बातों को किनारे रख दिया जाता. रोहित को सिर्फ एक छात्र के तौर पर देखा जाता. ये पता लगाने की बजाय कि वो दलित था या नहीं, ये पता लगाने की कोशिश होती कि आखिर क्या कारण रहे होंगे कि एक छात्र सुसाइड कर लेता है. रोहित ही नहीं, कई छात्र ऐसा करते हैं. आखिर क्या मेंटल ट्रॉमा होता है जो स्टूडेंट्स ऐसा काम करते हैं. काश ये पता लगाने की कोशिश होती और नतीजों को ध्यान में रखकर बदलाव होते. अगर ऐसा होता तो शायद तमिलनाडु की अनीता 1 सितंबर को सुसाइड न करती.

अनीता की मार्कशीट.

अनीता की मौत के बाद प्रदर्शन होने लगे हैं.

सोशल मीडिया पर शोक
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हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पी.एच.डी. छात्र रोहित वेमुला के सुसाइड का मामला तो सबको याद होगा. कोई भूल भी कैसे सकता है. इतनी राजनीति जो हुई थी. कितनी बहस हुई कि वो दलित था या नहीं था. संसद से सड़क तक हंगामा हुआ. काश इन सब बातों को किनारे रख दिया जाता. रोहित को सिर्फ एक छात्र के तौर पर देखा जाता. ये पता लगाने की बजाय कि वो दलित था या नहीं, ये पता लगाने की कोशिश होती कि आखिर क्या कारण रहे होंगे कि एक छात्र सुसाइड कर लेता है. रोहित ही नहीं, कई छात्र ऐसा करते हैं. आखिर क्या मेंटल ट्रॉमा होता है जो स्टूडेंट्स ऐसा काम करते हैं. काश ये पता लगाने की कोशिश होती और नतीजों को ध्यान में रखकर बदलाव होते. अगर ऐसा होता तो शायद तमिलनाडु की अनीता 1 सितंबर को सुसाइड न करती.
मेधावी की मौत
तमिलनाडु के अरियालुर जिले की अनीता 17 साल की थी. उसने इसी साल 12वीं में 98% मार्क्स पाए थे. उसे डॉक्टर बनना था. पर एमबीबीएस के लिए जरूरी कर दिए गए NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) में उसको 86 परसेंटाइल मिले. इसलिए उसे सरकारी कॉलेज में एडमिशन नहीं रहा था. पर अनीता को हर हाल में डॉक्टर बनना था. सो वो अपना मामला कोर्ट में लेकर पहुंची. बात सुप्रीम कोर्ट तक गई. यहां तर्क दिया कि NEET का पेपर सीबीएसई के स्टूडेंट्स के हिसाब से आया था. जबकि वो तमिलनाडु बोर्ड की स्टूडेंट रही है. ये भी आरोप था कि अलग-अगल राज्यों में अलग-अगल पेपर आया. इसलिए उसे NEET से छूट दी जाए.
अनीता की मार्कशीट.
अनीता भी मुद्दा भर न रह जाए
पिछले साल तक तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन 12वीं की मेरिट के आधार पर होता था. इस तरह से देखें तो अबकी बार कटऑफ 191.25 (SC) होता. जबकि अनीता के 196.75 पर्सेंटाइल थी. यानी उसे आसानी से एमबीबीएस की सीट मिल जाती. मगर इस बार एडमिशन NEET से होने के आदेश हो गए. NEET परीक्षा तो पिछले साल भी हुई थी, मगर तब तमिलनाडु को इससे छूट मिल गई थी. इस साल भी तमिलनाडु सरकार ने अध्यादेश लाकर NEET से बाहर होने का प्रयास किया था, लेकिन 22 अगस्त को सुप्रीट कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. साथ ही काउंसलिंग प्रक्रिया 4 सितंबर तक पूरी हो जाने के निर्देश दे दिए. इसके बाद केंद्र ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं जा सकती है. क्योंकि ऐसा करने पर और राज्य भी NEET से छूट मांगने लगेंगे.
अनीता की मौत के बाद प्रदर्शन होने लगे हैं.
काश! पहले ही कोई सुन लेता
चाहे आईआईटी हो, आईआईएम हो या कोई और कॉम्पिटीटिव एग्जाम. सबको पता है कि स्कूल की पढ़ाई से कुछ नहीं हो पाता है. कानपुर से लेकर कोटा तक कोचिंग मंडियां इसी वजह से ही तो पैसा कूट रही हैं. पर पेशे से मजदूर अनीता के पिता टी. शन्मुगम ने दुख जाहिर करते हुए बताया कि वो अपनी बेटी को नीट के लिए कोचिंग नहीं करवा पाए. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के नीट से जुड़े इस फैसले के बाद से ही अनीता डिप्रेशन में चली गई थी. 1 सितंबर को वो अपने कमरे में साड़ी से बने फंदे में लटकी मिली. इधर, अनीता की मौत पर राजनीति के साथ ही धरना-प्रदर्शन भी होने लगा है.
NEET क्या है?
NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट. ये टेस्ट मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में एंट्रेंस के लिए करवाया जाता है. इस एंट्रेंस से उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेंटल कांउसिल ऑफ इंडिया में आते हैं. नीट से पहले सीपीएमटी परीक्षा होती थी, जिसे सभी राज्य अलग-अलग करवाते थे. फिर 2013 में नीट आया. तय हुआ कि पूरे देश में एक ही मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम होगा. इसे आप वन नेशन वन एग्जाम फॉर्मूला समझ सकते हैं.सोशल मीडिया पर शोक
#RipAnitha
— Rajinikanth (@superstarrajini) September 1, 2017
pic.twitter.com/p5t507dLaQ
#RIP
anitha .. this is really really sad !! — Dhanush (@dhanushkraja) September 1, 2017
If u were Ambani's daughter Amit Shah wud have responded,if it was Priyanka Chopra's problem PM wud have intervened' #Anitha
#Anithasuicide
pic.twitter.com/F8sxkfc38H
— Vivek pandey (@vvk755) September 2, 2017
Beti bachao beti padhao ..waah sir . Neither the Govt in power allowed her to study nor saved her . #Anitha
#NEETkilledAnitha
? pic.twitter.com/pkSCK6kGAh
— Ajaz Khan (@AjazkhanActor) September 1, 2017
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