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ताजमहल के 22 कमरों में क्या है? पुरातत्व विभाग की इन तस्वीरों ने सब साफ कर दिया!

ASI ने ताजमहल के बंद पड़े कमरों की लेटेस्ट तस्वीरें कीं जारी

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17 मई 2022 (अपडेटेड: 17 मई 2022, 08:08 PM IST)
tajmahal
बाएं से दाहिने. ताजमहल और ASI द्वारा जारी ताजमहल के तहखाने के कमरे की तस्वीर. (India Today/ASI)
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ताजमहल (Taj Mahal) के तहखाने में बंद 22 कमरों में क्या है? इस विवाद को खत्म करने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI ने इन कमरों की तस्वीरें जारी कर दी हैं. ये तस्वीरें ASI की वेबसाइट पर जारी की गई हैं.

Taj Mahal Sc 1

तहखाने के एक कमरे में मरम्मत के पहले की तस्वीर. (ASI)

Taj Mahal Sc 2

मरम्मत के बाद की तस्वीर. (ASI)

आगरा ASI के चीफ आरके पटेल से इंडिया टुडे ने बात की. आरके पटेल ने बताया कि ये तस्वीरें ASI न्यूज़ की वेबसाइट पर जनवरी 2022 के न्यूज़लेटर में जारी कर दी गई हैं. इन्हें वेबसाइट पर जाकर कोई भी देख सकता है. न्यूज़ लेटर में ASI ने बताया है कि इन कमरों में खराब हो रहे चूने और प्लास्टर की मरम्मत की गई है और कुछ रिनोवेशन किया गया है. ASI ने ये भी बताया कि इस काम में करीब 6 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक नाम ना बताने की शर्त पर ASI से जुड़े एक अधिकारी ने कहा,

स्मारकों का संरक्षण ASI का काम है. हमें स्मारकों के रखरखाव का ध्यान रखना होगा और इस तरह के जरूरी इमारतों की देखरेख करनी होगी, भले ही वे बंद हों या लोगों के लिए खुले हों.

Taj Mahal Sc 3

तहखाने के एक कमरे में मरम्मत के पहले की तस्वीर. (ASI)

Taj Mahal Sc 4

मरम्मत के बाद की तस्वीर. (ASI)

आपको बता दें कि हाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. इस याचिका में ताजमहल के बंद कमरों को खोलने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने ताजमहल का ‘असली इतिहास’ खोजने के लिए फ़ैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन करने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने ना सिर्फ ये याचिका खारिज की, याचिकाकर्ता को जमकर फटकार भी लगाई.

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि,

पहले एमए करो, फिर नैट जेआरएफ करके पीएचडी करना इसी टॉपिक पर. कोई करने ना दे तो आकर हमसे कहना. तुम आज ताजमहल के कमरे खुलवा रहे हो, कल जजों के चैंबर खुलवाओगे! जनहित याचिकाओं को मज़ाक मत बनाओ, ड्रॉइंगरूम में यही बहस करने के लिए ज़रूर आना, लेकिन कोर्ट का समय मत बर्बाद करो. ऐसे विवाद चार दीवारी में चर्चा करने के लिए हैं ना कि कोर्ट में. कोर्ट का काम ऐतिहासिक तथ्यों की तस्दीक और रिसर्च करना नहीं है. ये काम ऐतिहासिक तथ्यों के विशेषज्ञों और इतिहासकारों पर हो छोड़ देना चाहिए.

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ताजमहल के कमरों में क्या है, इसको लेकर अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए ना कोई विवाद होना चाहिए. इसे रोकने के लिए ही इन तस्वीरों को जारी किया गया है.

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