तबस्सुम हसन ने राम पर अल्लाह की जीत वाले बयान पर सफाई दी, लेकिन एक गड़बड़ कर दी
क्या तबस्सुम की सफाई वाला लेटर भी फर्जी है, जानिए पूरा मामला.
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पहले तबस्सुम के खिलाफ सोशल मीडिया पर ये मैसेज फैलाया गया कि उन्होंने अपनी चुनावी जीत को राम पर अल्लाह की जीत बताया है. बाद में तबस्सुम हसन ने लेटर जारी कर सफाई दी और इसके बाद वो फिर से ट्रोल होने लगीं.
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यूपी में एक नई नई सांसद बनी हैं. नाम है तबस्सुम हसन. जब से इन्होंने चुनाव जीता है, हर रोज इनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ लिखा ही जा रहा है. और ऐसा करने वाले सोशल मीडिया के वो गुंडे हैं, जिनके जिम्मे काम ही सिर्फ नफरत फैलाना है. तबस्सुम यूपी की इकलौती मुस्लिम सांसद हैं, जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म के कुछ ठेकेदारों को परेशानी होने लगी है. और इस परेशानी को वो नफरत की चाशनी में लपेटकर लगातार परोस रहे हैं. उन्होंने लिखा कि तबस्सुम ने अपनी जीत के बाद कहा है कि ये अल्लाह की जीत और राम की हार है. एक ही पेज से ये पोस्ट छह हजार से भी अधिक बार शेयर हुई. इसके बाद तो कुछ भले-चंगे लोग भी इस पोस्ट को सही मानने लगे.

इसके बाद खुद तबस्सुम ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने सफाई देते हुए कहा-

लाल घेरे में लिखा है कि तबस्सुम संसदीय समिति की सदस्य हैं.
लेकिन लोगों को तो तबस्सुम के खिलाफ कुछ चाहिए ही था. वो लोग खोज लाए. पहले तो लोग ये कहने लगे कि अभी तो तबस्सुम ने बस चुनाव ही जीता है. शपथ भी नहीं ली है फिर उन्हें लेटर हेड छपवाने की क्या जल्दी थी. लोगों ने ये भी सवाल करने शुरू कर दिए कि अभी तो वो संसद पहुंची भी नहीं हैं और सरकार ने उन्हें दो-दो समितियों का सदस्य भी बना दिया है. ये सवाल जायज भी था, क्योंकि उनके लेटर हेड पर स्थायी समिति (पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय) भारत सरकार और सलाहकार समिति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय लिखा हुआ था.
लेकिन इसकी पड़ताल करने की ज्यादा ज़रूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि जो भी थोड़ी-बहुत राजनीतिक समझ रखता है, उसे पता होगा कि तबस्सुम हसन सांसद रह चुकी हैं. 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी. उस वक्त वो बीएसपी में थीं. बीएसपी यूपीए सरकार को सपोर्ट कर रही थी और इसी वजह से यूपीए सरकार ने तबस्सुम हसन को संसद की दो-दो समितियों का सदस्य बनाया था. तबस्सुम के पीए मुनव्वर ने भी इस बात की पुष्टि की है. और अगर हमारी बात पर यकीन न हो तो लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर तबस्सुम हसन की प्रोफाइल ही देख लीजिए. खास तौर पर आपके लिए आर्काइव से खोजकर लाए हैं.

ये तबस्सुम हसन की प्रोफाइल का पहला पेज है.

लाल घेरे में तबस्सुम हसन की समितियों का जिक्र है, जिसकी वो सदस्य रह चुकी हैं.
हां, इस लेटर हेड में इतना ज़रूर है कि ये लेटर हेड पुराना है. तब का, जब तबस्सुम सांसद हुआ करती थीं. अभी उनके पास नया लेटर हेड नहीं है. लेकिन उन्हें शिकायत करनी ही थी, इसलिए उन्होंने पुराने लेटर हेड पर शिकायत दर्ज करवा दी. बात सिर्फ इतनी सी ही है.
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इसके बाद खुद तबस्सुम ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने सफाई देते हुए कहा-
“हम तो सब धर्मों का सम्मान करते हैं, हमारा ऐसा कुछ अलग नहीं है. हमेशा जो है हम ये चाहते हैं कि भाई सब इंसानियत में रहे हर इंसान एक-दूसरे से प्यार मोहब्बत से रहे. इन लोगों को जब कोई रास्ता नहीं मिला तो ये फेक मेसेज चला-चला के 2019 के लिए रास्ता बनाना चाहते हैं. आपको कहीं से पता चले अगर जिसने यह सब किया है तो मुझे भी जरूर इन्फॉर्म करियेगा. हम ऐसे लोग नहीं है ना हमने ऐसा कुछ कहा है कभी. अल्लाह और राम में फर्क ही क्या है, मानने वालों की बात है आस्था की बात है. जो मानता है दिल से मानता है. दिल से मानने की बात है.''इसके बाद तबस्सुम ने अपने लेटर पैड पर शामली के एसपी के नाम पत्र लिखकर पूरी बात बताई और कार्रवाई करने के लिए कहा. एसपी शामली ने भी इस पत्र को कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा दिया. इस पत्र को देखिए.

लाल घेरे में लिखा है कि तबस्सुम संसदीय समिति की सदस्य हैं.
लेकिन लोगों को तो तबस्सुम के खिलाफ कुछ चाहिए ही था. वो लोग खोज लाए. पहले तो लोग ये कहने लगे कि अभी तो तबस्सुम ने बस चुनाव ही जीता है. शपथ भी नहीं ली है फिर उन्हें लेटर हेड छपवाने की क्या जल्दी थी. लोगों ने ये भी सवाल करने शुरू कर दिए कि अभी तो वो संसद पहुंची भी नहीं हैं और सरकार ने उन्हें दो-दो समितियों का सदस्य भी बना दिया है. ये सवाल जायज भी था, क्योंकि उनके लेटर हेड पर स्थायी समिति (पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय) भारत सरकार और सलाहकार समिति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय लिखा हुआ था.
हे भगवान...! हारने पर झूठ फैलाना शर्मनाक है। भाजपा समर्थकों को ऐसे झूठ से बचना चाहिए था..... ! थैंक गॉड... मैंने ये...
Posted by Ravi Rawat
on Sunday, 3 June 2018

ये तबस्सुम हसन की प्रोफाइल का पहला पेज है.

लाल घेरे में तबस्सुम हसन की समितियों का जिक्र है, जिसकी वो सदस्य रह चुकी हैं.
हां, इस लेटर हेड में इतना ज़रूर है कि ये लेटर हेड पुराना है. तब का, जब तबस्सुम सांसद हुआ करती थीं. अभी उनके पास नया लेटर हेड नहीं है. लेकिन उन्हें शिकायत करनी ही थी, इसलिए उन्होंने पुराने लेटर हेड पर शिकायत दर्ज करवा दी. बात सिर्फ इतनी सी ही है.
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