गॉडफादर देखी है आपने? या किताब पढ़ी हो? अगर दोनों में से एक भी काम किया हो तो डॉनवीटो कॉरलियॉन, उसकी माफिया फॅमिली, उस फॅमिली की विरोधी फॅमिली वगैरह वगैरह पताहोगा आपको. अब कल्पना कीजिये एक ऐसे मंच की जहां दो माफिया फैमिलीज़ को किसीपरिचर्चा के लिए बुलाया हो. ज़ाहिर सी बात है डॉन लोग हैं, अकेले तो आएंगे नहीं.एकाध गुर्गा भी साथ है. चर्चा चल रही है. शराफत का मुखौटा ओढ़े सारे लफंगे बैठे हैं.यूं जता रहे हैं जैसे भलमानसहत की सनद जारी करा के आएं हो. आप-आप कह के बातें कररहे हैं. ऐसे में कुछ अनपेक्षित घटता है. दर्शकों में से कोई तीखी बात बोल देता है.माफ़िया डॉन उलझने लगता है. उसकी देखा-देखी उसका गुर्गा आपे से बाहर हो जाता है.बोलने वाले पर हमलावर हो जाता है. इसे देख के दूसरी पार्टी का भी खून उबलता है.अच्छा बेट्टा! हमसे बड़े गुंडे हो तुम! वो पहले डॉन के गुर्गे को पकड़ के दो-तीनकंटाप धर देती है. फिर डॉन ने कहां पीछे रहना था! आख़िरकार शमए महफ़िल तो वही है. कोईउससे ज़्यादा वाहियात कैसे हो सकता है? वो भी कूद जाता है हाथापाई में. फिर क्या था!दे घूंसा, दे लात, ठोक गालियां!! पूरे मंच पर ऐसे घमासान शुरू हो जाता है जैसेइंसान नहीं जानवरों का झुंड हो! सभ्य होने के, संस्कारी होने के तमाम मुखौटे उतरजाते हैं. अब इस कल्पना में से माफिया फॅमिली को निकालिए और अपनी देसी संत बिरादरीको फिट कीजिये. फिर हम आपको बताएंगे कि ये महज़ कल्पना नहीं ऐसा सच में हुआ है.स्वामी ओम तो खैर अपनी मूर्खताओं की वजह से पहले से ही घर-घर पहचाने जाने लगे हैंलेकिन इस बार कुछ और संतों ने अपनी पहचान बनाना ज़रूरी समझा. और इस गोल को हासिलकरने के लिए लाइव शो में मारकुटाई को अंजाम दे डाला.Source: giphy.comएक टीवी शो में हिस्सा लेते वक़्त स्वामी ओम हमेशा की तरह पटरी से उतर गए. क्याएंकर, क्या दर्शक सभी से लड़ पड़ें. फ़र्क सिर्फ इतना था कि इस बार उनके साथ दो और संतभी थे जिन्होंने तहज़ीब की सारी हदें पार कर दी. स्वामी ओम दर्शकों में शामिल एकमहिला से चीख चीख कर कहते दिखाई देते हैं कि, “तुम्हारा संस्कार दिख रहा है.तुम्हारे घर वालों ने, तुम्हारे ख़ानदान ने... ब्लाह ब्लाह ब्लाह”. काफी कुछ आवाजेंशोर में दब भी जाती हैं. महिला उत्तेजित होकर खड़ी हो जाती है. स्वामी ओम के पीछेबैठा उनका साथी शख्स बड़े गुस्से में उसकी तरफ आता है. कुछ कहता है. मेल एंकर उसेसमझा-बुझा के वापस भेजता है. फीमेल एंकर की ‘ओम जी, ओम जी, आप ऐसा नहीं बोल सकते,तहज़ीब रखिए’ की आवाज़ आती रहती है. ओम जी का गुंडानुमा साथी या साथीनुमा गुंडा फिरखड़ा होता है. कुछ धमकी जैसा कह कर बैठ जाता है. यहां से दूसरी पार्टी मोर्चा संभाललेती है और महफ़िल लूट लेने के अपने पवित्र मिशन में जुट जाती है. अबकी बार दूसरेपक्ष में शामिल संत मार्कंडेय पुरी और एच एस रावत की तरफ से उनका बाउंसर आता है. वोखड़ा होता है, स्वामी ओम के सरसराते छर्रे के पास पहुंचता है और खींच के लाफा मारताहै. नो बकवास, सीधे कंटाप! स्वामी ओम भी जोश में आ के खड़े होते हैं, बीच में घुसनेकी कोशिश करते हैं. लोग जमा हो जाते हैं, धक्का-मुक्की में स्वामी चारो खाने चित्तहो जाते हैं. एक घमासान सा मच जाता है. लेकिन हार मान ले वो स्वामी कहां! वो जीवटजियाले की तरह फिर से रणभूमि में प्रवेश करते हैं. अपने पवित्र चरण कमलों का अभिनवप्रयोग करते हुए विपक्षी पार्टी को सभ्यता और संस्कृति से ओतप्रोत लात मारते हैं.ऐसी कि गदहा भी शर्मा जाए! बदले में चौखटे पर थप्पड़ रिसीव करते हैं. लोग बीच मेंघुस आते हैं और चिरकुटई का ये संक्षिप्त डिरामा ख़त्म हो जाता है. अफ़सोस! हमको तोकमबख्त लिखते-लिखते वीर रस का आनंद आ गया! आपको देख कर मज़ा ना आए तो पैसे वापिस! वोजो आपने दिए भी नहीं हैं.देखिए यहां वीडियो.जोक्स अपार्ट, स्वामी ओम तो अपनी वाहियातगिरी के लिए मशहूर हैं ही लेकिन बाकी संतोंको यूं आपा खोते देखना दुखद है. स्वामी इससे पहले भी लाइव शो पर एक महिला को थप्पड़मार चुके हैं, वापसी में खुद भी खा भी चुके हैं. दुनिया को शांति, अहिंसा का पाठपढ़ाते नहीं थकने वाली संत बिरादरी जब खुद लफंगई पर उतर आए तो दुःख होता है.गुंडागर्दी तो कम से कम गुंडों के लिए छोड़ दो, संतों!--------------------------------------------------------------------------------ये भी देखियेस्वामी ओम को रैहपटा पड़ गया तो स्टूडियो से भाग लिएबिग बॉस से धकियाए ओम ने जो कहा, वो सुन मार्लन ब्रांडो फिर मर गए