'सुषमा मैम, मैं BSP सपोर्टर मुसलमान हूं और आपको किडनी देना चाहता हूं'
और इस पर सुषमा स्वराज ने जो जवाब दिया, वो जबर है.

अब से 22 साल पहले 1994 में 22 जुलाई को एक फिल्म रिलीज हुई थी. 'क्रांतिवीर'. नाना पाटेकर हीरो थे. फिल्म का एक बेहद फेमस सीन है, जिसमें नाना अपनी और एक मुस्लिम की उंगली कूचते हैं और फिर दोनों का खून आपस में मिलाकर दोनों में फर्क पूछते हैं. बड़ा मारक डायलॉग था:
'ये देख. ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून. बता इसमें मुसलमान का कौन सा है हिंदू का कौन सा. बता... साले बनाने वाले ने इसमें फर्क नहीं किया, तू कौन होता है फर्क करने वाला.'
लोग हिंदू-मुसलमान में कितना भी फर्क कर लें, पर ये सीन नहीं भुला सकते. लेकिन दोस्त, नाना पाटेकर के बाद अगर किसी ने ये सीन दोहराया है, तो वो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हैं. एम्स में भर्ती हैं इन दिनों. किडनी फेल हो गई है उनकी और कह रही हैं कि किडनी का कोई धर्म नहीं होता है.
15 नवंबर को सुषमा ने ट्वीट करके अपनी बीमारी की जानकारी दी थी. इसके बाद तो उनके लिए दुआ मांगने वालों की लाइन लग गई. नेता लोग पार्टी लाइन को पोटली में बांधकर गंगा में विसर्जित कर आए और आम जनता भी ट्वीट दाग रही है कि सुषमा ठीक हो जाएं. इसी बीच मुजीब अंसारी नाम के एक जनाब आगे आए और ट्वीट किया, 'मैम, मैं एक बसपा समर्थक और मुसलमान हूं, लेकिन मैं आपके लिए अपनी किडनी दान करना चाहता हूं. मेरे लिए आप मां जैसी हैं. अल्लाह आपको आशीर्वाद दे.'
ऐसा ट्वीट करने वाले मुजीब अकेले नहीं थे. नियामत अली ने ट्वीट किया, 'सुषमा स्वराज, अगर कोई डोनर नहीं मिला, तो मैं मुस्लिम हिंदुस्तानी आपको किडनी जरूर दूंगा. जरूरत पड़ी, तो याद कीजिएगा मैडम.' एक जान भाई शाह भी हैं, जिन्होंने ट्वीट किया, 'क्या मैं अपनी किडनी दान कर सकता हूं? मैं मुसलमान हूं, लेकिन अगर मुमकिन हो, तो मैं तैयार हूं.'
इन ट्वीट्स पर सुषमा ने तीनों को रिप्लाई किया, 'आपका बहुत-बहुत शुक्रिया भाइयों. मुझे यकीन है कि किडनी पर कोई धार्मिक ठप्पा नहीं होता है.'
हालांकि, सुषमा के इस ट्वीट के बाद मुजीब ने सफाई में लिखा, 'मैंने अपने धर्म और राजनीतिक विचारधारा के बारे में इसलिए लिखा, ताकि मैं हर किसी को बता सकूं कि अपनी विविधता की वजह से हम मजबूती से एक हैं.'
जो भी हो, पर सुषमा की इस बात ने दिल गार्डेन-गार्डेन कर दिया.
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