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राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए सुशील मोदी, लालू के रिकॉर्ड की बराबरी की

बिहार बीजेपी में भी रिकॉर्ड बनाया है.

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रामविलास पासवान के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर सुशील मोदी निर्विरोध चुने गए हैं. (फोटो - ट्विटर)
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मयंक
7 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 7 दिसंबर 2020, 02:23 PM IST)
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सुशील कुमार मोदी. बिहार की नीतीश कुमार की सरकार में लम्बे वक़्त तक उपमुख्यमंत्री रहे हैं. सोमवार, 7 दिसंबर को राज्यसभा पहुंच गए. सुशील मोदी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में इसका सर्टिफिकेट भी दिया गया. इसी के साथ सुशील मोदी ने एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है. ऐसी भी चर्चाएं हैं कि सुशील मोदी को केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है.

रामविलास पासवान की सीट अपने नाम की

सुशील मोदी को निर्विरोध चुना गया है. आजतक के पत्रकार रोहित कुमार सिंह के मुताबिक, इसी साल 8 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी राज्यसभा सीट खाली हो गयी थी. इसके लिए उपचुनाव हुए थे. मोदी के खिलाफ किसी भी पार्टी ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था. श्यामनंदन प्रसाद ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा था, लेकिन शुक्रवार को उनका नामांकन अवैध घोषित कर दिया गया था. इससे सुशील मोदी का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना तय हो गया था.
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सुशील मोदी ने बनाया ये रिकॉर्ड

सुशील मोदी ने राज्यसभा पहुंचने के साथ ही एक रिकॉर्ड बना लिया है. वह उन लोगों के क्लब में शामिल हो गए हैं, जो लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद- चारों के सदस्य रह चुके हैं. बिहार से इस लिस्ट में आने वाले वह तीसरे नेता हैं. उनसे पहले बिहार से आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि इन चारों सदनों में पहुंचने वाले नेता थे. लालू यादव की बात करें तो वो 1977 के लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर छपरा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने थे. इसके बाद 1980 में लोकदल के टिकट पर ही सोनपुर से विधानसभा गए. 1990 में मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू बिहार विधान परिषद के रास्ते विधान मंडल पहुंचे. वर्ष 2000 में लालू पहली बार बिहार से राज्यसभा के सदस्य बने थे. इसी प्रकार, पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि भी 1977 में विधानसभा सदस्य बने थे. उसके बाद 1995 में राज्यसभा सदस्य बनाए गए. 1999 में वह लोकसभा के सदस्य रहे, और फिर 2006 में नागमणि ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ ली थी. वैसे, सुशील मोदी, लालू और नागमणि के अलावा विश्वनाथ प्रताप सिंह, एन.डी. तिवारी, शंकरराव चव्हाण, राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, मायावती भी चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं.

सुशील मोदी का राजनीतिक जीवन

सुशील मोदी के राजनीतिक सफर की शुरूआत पटना यूनिवर्सिटी से हुई थी. जब 1973 में लालू प्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे, उसी साल सुशील मोदी पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महामंत्री चुने गए थे. इसके बाद एबीवीपी, जेपी आंदोलन और भारतीय जनता पार्टी के साथ सुशील मोदी की राजनीतिक गाड़ी पटरी पर दौड़ती रही. वो पहली बार 1990 में पटना मध्य की विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने थे, और वहीं से लगातार तीन बार जीते. विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. 2004 में भागलपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे. लेकिन डेढ़ साल बाद नवंबर 2005 में नीतीश कुमार की सरकार में उप-मुख्यमंत्री बने तो लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, और बिहार विधान परिषद के सदस्य बन गए. हाल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिली थी

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