जनता के भड़कने से बचने के लिए सर्फ एक्सल को अपने ऐड में ये दिखाना चाहिए था
ऐड बनाने वाले को शायद देश के ऐड कल्चर की समझ नहीं है.
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सर्फ एक्सल का नया ऐड ''रंग लाए संग''
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होली कब है? कब है होली? अगर आज के समय में गब्बर होता तो ये सवाल न पूछता. टीवी चैनल पर होली के प्रचार देख-देख कर खुद ही जान जाता कि होली कब है? ऐसा ही एक ऐड बनाया सर्फ एक्सल ने. उसी पुरानी टैगलाइन के साथ 'दाग अच्छे हैं'. कोई मुहल्ला है. बालकनी में चढ़े बच्चे नीचे सड़क पर आने-जाने वालों के ऊपर रंगों वाले गुब्बारे फेंक रहे हैं. एक बच्ची साइकल पर आती है. घूम-घूमकर अपने ऊपर बच्चों से रंग फिंकवाती है. फिर सारे बच्चों के रंग खत्म हो जाते हैं.
फिर वो बच्ची एक घर के आगे जाकर कहती है, बाहर आ जाओ. सब खत्म हो गया. अंदर से झक सफेद कुर्ता-पजामा पहने एक बच्चा निकलता है. सिर पर मुसलमानी टोपी उसका मजहब जाहिर कर देती है. बच्ची उसे अपनी साइकल पर बिठाती है. बाकी बच्चे बड़े प्यार से उन दोनों को देखते हैं. वो बच्ची साइकल से मस्जिद की सीढ़ियों के पास पहुंचकर रुक जाती है. वो बच्चा मस्जिद की सीढ़ियां चढ़ते हुए कहता है, नमाज़ पढ़कर आता हूं. इसपर बच्ची जवाब देती है- फिर रंग पड़ेगा. बच्चा मुस्कुराकर हामी भरता है और सीढ़ियां चढ़ने लगता है.
चूंकि हमारा देश भावना प्रधान देश है. इसलिए समय-समय पर आहत होती रहती हैं. इस ऐड से भी हो गई. सोशल मीडिया पर कैंपेन चल गया. बायकॉट सर्फ एक्सल का. कहा गया, ये हिंदू धर्म पर हमला है. लव-जिहाद को प्रमोट करता है. हिंदू की बेटी और मुसलमान का बेटा, ऐसा क्यों? होली पर ही ऐड क्यों? मुसलमानों के त्योहारों पर क्यों नहीं बनाया? क्यों नहीं उनके पर्व पर कहा कि दाग अच्छे हैं?

इधर ऐड आया, उधर सोशल मीडिया पर बायकॉट की अपील ट्रेंड करने लगी.
ये सब भसड़ अपनी जगह, मेरी इस ऐड से और तरह की दिक्कतें हैं. मुझे ये ऐड बनाने वाला नौसिखिया जान पड़ता है. उसे हिंदुस्तानी तरीके से ऐड बनाने की शायद बिल्कुल समझ नहीं. अगर होती तो वो वॉशिंग पाउडर के ऐड में सामाजिक सद्भाव देने की कोशिश न करता. शायद उसे देश में होली खेलने के कल्चर की समझ भी नहीं है. क्योंकि होली में कपड़े धोए ही नहीं जाते. हमारे देश में होली खेलने के बाद कपड़े धोए नहीं जाते. कपड़ों के चीथड़े पेड़ों और बिजली की तारों पर टंगे मिलते हैं. तो जब कपड़े ही नहीं रहेंगे तो दागों के अच्छे या बुरे होने का सवाल ही नहीं. मतलब ये कि सर्फ एक्सल का होली के कपड़े धोने में कोई काम नहीं.
सर्फ एक्सेल का ऐड बनाने वाले को हमारे ऐड देखने चाहिए. कौन सा ऐड? बहुत से हैं. जैसे,
# अंडरवियर का ऐड. एक हीरो सिक्योरिटी चेक-अप से गुजरता है. और सिक्योरिटी वाली लड़की उसके अंडरवियर का ब्रांड देखकर चिपक जाती है.
# पान मसाले का ऐड. जिसमें जेम्स बांड पान मसाला खाकर सबको मार गिराता है.
# ये ऐड बनाने वाले ने कोल्ड ड्रिंक का भी ऐड नहीं देखा होगा, जिसमें एक घूंट लगाकर आप हेलिकॉप्टर से छलांग लगा सकते हैं.
# और सबसे जरूरी है डियो और परफ्यूम के ऐड. इधर लड़के ने डियो लगाया उधर लड़की पागल.
सर्फ एक्सल का ऐड बनाने वाले को कुछ इसी मिजाज का ऐड बनाना चाहिए था. लेकिन ये पगले सद्भाव और सौहार्द फैलाने चल निकले. चुनावी माहौल में हिंदू-मुसलमान की गूंजों के बीच इस ऐड से सद्भाव का संदेश एक कोरी कल्पना ही है. ठीक उसी तरह जैसे बनियान पहनकर हीरो मार्शल आर्ट का मास्टर बन जाता है.
अपना सामान बेचना है तो प्रचार के नाम पर कुछ भी दिखा दो और बेचो. सद्भाव और सौहार्द न फैलाओ. जागो सर्फ़ एक्सल वालो जागो, बेहूदे ऐड चलाकर भागो.
वीडियो देखें: सर्फ एक्सल के ऐड में छोटे छोटे बच्चों के बीच लव जिहाद देखने वाले दिमाग गंदे है
फिर वो बच्ची एक घर के आगे जाकर कहती है, बाहर आ जाओ. सब खत्म हो गया. अंदर से झक सफेद कुर्ता-पजामा पहने एक बच्चा निकलता है. सिर पर मुसलमानी टोपी उसका मजहब जाहिर कर देती है. बच्ची उसे अपनी साइकल पर बिठाती है. बाकी बच्चे बड़े प्यार से उन दोनों को देखते हैं. वो बच्ची साइकल से मस्जिद की सीढ़ियों के पास पहुंचकर रुक जाती है. वो बच्चा मस्जिद की सीढ़ियां चढ़ते हुए कहता है, नमाज़ पढ़कर आता हूं. इसपर बच्ची जवाब देती है- फिर रंग पड़ेगा. बच्चा मुस्कुराकर हामी भरता है और सीढ़ियां चढ़ने लगता है.
चूंकि हमारा देश भावना प्रधान देश है. इसलिए समय-समय पर आहत होती रहती हैं. इस ऐड से भी हो गई. सोशल मीडिया पर कैंपेन चल गया. बायकॉट सर्फ एक्सल का. कहा गया, ये हिंदू धर्म पर हमला है. लव-जिहाद को प्रमोट करता है. हिंदू की बेटी और मुसलमान का बेटा, ऐसा क्यों? होली पर ही ऐड क्यों? मुसलमानों के त्योहारों पर क्यों नहीं बनाया? क्यों नहीं उनके पर्व पर कहा कि दाग अच्छे हैं?

इधर ऐड आया, उधर सोशल मीडिया पर बायकॉट की अपील ट्रेंड करने लगी.
ये सब भसड़ अपनी जगह, मेरी इस ऐड से और तरह की दिक्कतें हैं. मुझे ये ऐड बनाने वाला नौसिखिया जान पड़ता है. उसे हिंदुस्तानी तरीके से ऐड बनाने की शायद बिल्कुल समझ नहीं. अगर होती तो वो वॉशिंग पाउडर के ऐड में सामाजिक सद्भाव देने की कोशिश न करता. शायद उसे देश में होली खेलने के कल्चर की समझ भी नहीं है. क्योंकि होली में कपड़े धोए ही नहीं जाते. हमारे देश में होली खेलने के बाद कपड़े धोए नहीं जाते. कपड़ों के चीथड़े पेड़ों और बिजली की तारों पर टंगे मिलते हैं. तो जब कपड़े ही नहीं रहेंगे तो दागों के अच्छे या बुरे होने का सवाल ही नहीं. मतलब ये कि सर्फ एक्सल का होली के कपड़े धोने में कोई काम नहीं.
सर्फ एक्सेल का ऐड बनाने वाले को हमारे ऐड देखने चाहिए. कौन सा ऐड? बहुत से हैं. जैसे,
# अंडरवियर का ऐड. एक हीरो सिक्योरिटी चेक-अप से गुजरता है. और सिक्योरिटी वाली लड़की उसके अंडरवियर का ब्रांड देखकर चिपक जाती है.
# पान मसाले का ऐड. जिसमें जेम्स बांड पान मसाला खाकर सबको मार गिराता है.
# ये ऐड बनाने वाले ने कोल्ड ड्रिंक का भी ऐड नहीं देखा होगा, जिसमें एक घूंट लगाकर आप हेलिकॉप्टर से छलांग लगा सकते हैं.
# और सबसे जरूरी है डियो और परफ्यूम के ऐड. इधर लड़के ने डियो लगाया उधर लड़की पागल.
सर्फ एक्सल का ऐड बनाने वाले को कुछ इसी मिजाज का ऐड बनाना चाहिए था. लेकिन ये पगले सद्भाव और सौहार्द फैलाने चल निकले. चुनावी माहौल में हिंदू-मुसलमान की गूंजों के बीच इस ऐड से सद्भाव का संदेश एक कोरी कल्पना ही है. ठीक उसी तरह जैसे बनियान पहनकर हीरो मार्शल आर्ट का मास्टर बन जाता है.
अपना सामान बेचना है तो प्रचार के नाम पर कुछ भी दिखा दो और बेचो. सद्भाव और सौहार्द न फैलाओ. जागो सर्फ़ एक्सल वालो जागो, बेहूदे ऐड चलाकर भागो.
वीडियो देखें: सर्फ एक्सल के ऐड में छोटे छोटे बच्चों के बीच लव जिहाद देखने वाले दिमाग गंदे है

