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राहुल गांधी की सजा पर रोक, जानिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ

क्या राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होगी?

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4 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 4 अगस्त 2023, 03:57 PM IST)
supreme court stays rahul gandhi conviction what happened in hearing what did judges say
राहुल गांधी को निचली अदालत से दो साल की सजा मिली थी (फोटो- आज तक)
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. मोदी सरनेम मानहानि मामले में कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगा दी. 4 अगस्त को जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और संजय कुमार की बेंच ने राहुल गांधी की सजा पर रोक वाली याचिका पर सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक अपील लंबित रहेगी, तब तक सजा पर रोक बरकरार रहेगी. यानी राहुल गांधी की संसद सदस्यता दोबारा बहाल हो सकती है. इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोकसभा सचिवालय से अनुरोध करना होगा. 

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की तरफ से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. वहीं शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी की तरफ से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जिरह की. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया,

“शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी का ओरिजिनल सरनेम मोदी नहीं है. उन्होंने अपना सरनेम बदला है. राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिन लोगों का नाम लिया था, उनमें से किसी ने भी मुकदमा दर्ज नहीं किया है. दिलचस्प बात ये है कि 13 करोड़ लोगों वाले इस समुदाय में मुकदमा करने वाले लोग केवल बीजेपी के हैं. ये बहुत अजीब बात है.”

सिंघवी ने आगे कहा,

“राहुल गांधी का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है. हां, उन पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा दायर मामलों की भरमार है. लेकिन किसी में उन्हें सजा नहीं हुई.”

अभिषेक सिंघवी ने ये भी कहा कि इवेंट का कोई एविडेंस ही नहीं है. 

इसके जवाब में पूर्णेश मोदी के वकील जेठमलानी ने कहा कि पूरी स्पीच 50 मिनट से ज्यादा की है और सबूतों की भरमार है. उन्होंने कहा कि इस भाषण का वीडियो इलेक्शन कमीशन के रिकॉर्ड में दर्ज है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की,

“कितने राजनेता हैं जो ये याद रखते हैं कि एक दिन में 15-20 सभाएं की हैं तो उनमें क्या किसने कहा है?”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों वकीलों से राजनीतिक बयानबाजी “राज्यसभा के लिए” बचा कर रखने को भी कहा. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारी बातों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल जज ने इस बात का कोई कारण नहीं दिया है कि राहुल गांधी को अधिकतम सजा क्यों दी गई. बेंच ने कहा, 

“कम सजा भी तो दी जा सकती थी. अगर जज ने 1 साल 11 महीने की सजा दी होती तो राहुल गांधी को अयोग्य घोषित नहीं किया जाता. इससे उनकी संसदीय क्षेत्र की जनता का अधिकार भी बरकरार रहता. जज को अधिकतम सजा की वजह साफ करनी चाहिए थी. ये मामला असंज्ञेय कैटेगरी में आता है."

सुप्रीम कोर्ट ने आखिर में कहा कि इस मामले पर अंतिम फैसला आने तक सजा पर रोक लगाने की जरूरत है. ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामले में सूरत की निचली अदालत ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई थी.

वीडियो: जिस आदमी को दुनिया खोज रही, उसे खोजते हुए राहुल गांधी मंडी पहुंचे

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