The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Supreme Court Slams Centre Over Farmer Protest, Asks Govt if Farm Laws Can be Put on Hold

सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, आप कृषि कानूनों को ठंडे बस्ते में डालेंगे या हम आदेश पारित करें

'चीफ जस्टिस चाहते हैं कि किसान वापस चले जाएं'

Advertisement
pic
11 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2021, 10:08 AM IST)
Img The Lallantop
सुप्रीम कोर्ट ने किसान कानूनों पर बनाई कमेटी को लेकर उठ रहे सवालों पर आपत्ति जताई है. साथ ही यह भी कहा है कि ट्रैक्टर रैली पर जो भी करना है दिल्ली पुलिस करें.
Quick AI Highlights
Click here to view more
पिछले 46 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त हिदायत दी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एस.ए. बोबडे ने सरकार के प्रयासों पर निराशा जताई और दोटूक कहा कि आप कृषि कानूनों पर अमल फिलहाल रोकेंगे या हम कदम उठाएं? कोर्ट ने किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमिटी बनाने की बात कही है. इसके लिए सरकार से नाम भी मांगे हैं. कमिटी की रिपोर्ट आने तक कृषि कानून लागू करने पर जोर न देने का भी प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान शांति भंग होने की आशंका जताते हुए चीफ जस्टिस ने आंदोलनकारी किसानों से भी वापस जाने की व्यक्तिगत अपील की है.
  सरकार से पूछा, आखिर आप कर क्या रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से मौजूद अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से चीफ जस्टिस बोबडे ने कई बार सख्त सवाल किए. किसान आंदोलन को लेकर पूछा कि सरकार इतने दिनों से आखिर कर क्या रही है? चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल से कहा-
जिस तरह से सरकार ने किसान प्रोटेस्ट को हैंडल किया है, उससे हम बुरी तरह निराश हैं. हम नहीं जानते कि आपने कानून बनाने से पहले बातचीत का क्या तरीका अपनाया. कई राज्य इस कानून के खिलाफ खड़े हो रहे हैं. पिछली बार आपने कहा था कि बातचीत हो रही है. लेकिन कैसी बातचीत? पक्षकारों ने कोर्ट को नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया है.
एक्सपर्ट कमेटी की बात पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि पिछली सरकार ने कानून बनाने से पहले एक्सपर्ट कमेटी से लंबी चर्चा की थी. कमिटी ने APMC सिस्टम (मंडी सिस्टम) की पाबंदियों से आजादी और उपज को सीधे बेचने की छूट देने की सिफारिश की थी. इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का ध्यान मौजूदा नाजुक हालात की तरफ दिलाया. चीफ जस्टिस ने कहा-
यह कहने से बात नहीं बनेगी कि यह पिछली सरकार ने शुरू किया था. हम यहां संवैधानिकता के सवाल पर बात नहीं कर रहे हैं. हमारी मंशा साफ है. हम समस्या का सर्वमान्य हल चाहते हैं. इस वजह से ही हमने आपसे पिछली बार कहा भी था कि क्यों नहीं आप अभी कानून को रोक लें. लेकिन आप लगातार वक्त मांगते रहे. अगर आपको जरा भी जिम्मेदारी का आभास है, और आप कहते हैं कि कानून को लागू करने से रोक लिया जाएगा तो हम एक कमेटी बनाने फैसला करते हैं. 
'खुश किसान' कहां हैं सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि सिर्फ कुछ किसानों के विरोध करने से कानून पर अमल को रोक देना कहां तक ठीक होगा? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमारे पास कई किसान संगठन आ रहे हैं, जो इन कानूनों को प्रगतिशील बता रहे हैं. इन किसानों को इस कानून से कोई दिक्कत नहीं है. इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि हमारे पास तो इस तरह की एक भी पिटीशन नहीं आई, जिसमें कोई किसान कहे कि कानून अच्छे हैं. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मान लीजिए बहुसंख्यक किसान कहें कि कुछ लोगों के कहने पर आपने कानून को लागू होने से क्यों रोक लिया, तब हम क्या करेंगे? चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इन सब बातों में नहीं पड़ेंगे, ये फैसला कमेटी को करने दीजिए.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तरफ से कोर्ट से मौजूद अटॉर्नी जनरल औऱ सॉलिसिटर जनरल को बिगड़े हालात पर जम कर लताड़ा.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तरफ से कोर्ट से मौजूद अटॉर्नी जनरल औऱ सॉलिसिटर जनरल को बिगड़े हालात पर जम कर लताड़ा.
'अपने हाथों पर किसी का खून नहीं देखना चाहते' सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान पैदा हो रहे हालात की तरफ ध्यान दिलाया. चीफ जस्टिस ने कहा-
आप हमें बताएं कि आप कानून को रोक रहे हैं या नहीं. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हम करेंगे. इसको ठंडे बस्ते में डालने में दिक्कत क्या है? अब मामला बिगड़ रहा है. लोग सुसाइड कर रहे हैं. ठंड में परेशान हो रहे हैं. ये हमारी समझ से बाहर है कि विरोध प्रदर्शन में बच्चे और बूढे़ क्या कर रहे हैं. खैर ये एक अलग विषय है. हम समझते हैं कि बातचीत इसलिए रुक रही है क्योंकि सरकार कानून की हर धारा पर बात करने को कह रही है और किसान कानून को खत्म करने की बात कर रहे हैं. ऐसे में हम कानून पर अमल को रोककर कमेटी में भेजने का प्रस्ताव रख रहे हैं.
इसके बाद चीफ जस्टिस किसानों के प्रतिनिधि की तरफ मुखातिब हुए, और कहा-
हम विरोध प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं. ये न समझा जाए कि कोर्ट विरोध प्रदर्शन को खत्म करना चाहता है. लेकिन हम यही कह रहे हैं कि अगर ये कानून रोक दिए गए तो क्या लोगों की समस्याओं को देखते हुए आप प्रोटेस्ट की जगह बदल लेंगे? हमें इस बात की चिंता है कि किसी दिन कोई कुछ ऐसा न कर दे कि शांति भंग हो जाए. अगर कुछ भी गलत हो गया तो उसके लिए हम सब जिम्मेदार होंगे. कोर्ट अपने हाथों पर किसी का खून नहीं देखना चाहता.
कानून लागू करने पर रोक की बात पर सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि उन किसानों के बारे में सोचा जाए, जो पहले से इन कानूनों के हिसाब से फैसला ले चुके हैं. कई किसान और व्यापारी पहले ही कॉन्ट्रैक्ट कर चुके हैं. इस रोक से इन किसानों का बहुत नुकसान होगा. अटॉर्नी जनरल ने ये भी कहा कि इन कानूनों पर अमल को टालना मतलब स्टे लगाने जैसा ही हुआ. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इस अंतर को अच्छी तरह से समझते हैं, हमने जानबूझकर ऐसा एक्शन लिया है.
हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट में मौजूद हरीश साल्वे ने कहा कि अगर कानूनों पर अमल रोक लिया जाता है तो क्या किसान अपना आंदोलन वापस ले लेंगे. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि मिस्टर साल्वे, एक ऑर्डर से सब कुछ हासिल नहीं किया जा सकता. किसान कमेटी के सामने जाएंगे. जस्टिस बोबडे ने कहा-
कोर्ट नागरिकों के प्रदर्शन करने पर कोई भी आदेश पारित नहीं करेगा. हम एक रिस्क लेते हुए कह रहे हैं कि भारत का चीफ जस्टिस चाहता है कि आप लोग वापस चले जाएं.
चीफ जस्टिस एसए बोबडे.
चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के दौरान किसानों के हालात पर चिंता भी जताई.
कमेटी का मुखिया किसे बनाएं? सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की यूनियन और सरकार से कहा कि वह किसी पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का नाम सुझाएं, जिसे इस कमेटी का मुखिया बनाया जाए. कोर्ट ने कहा-
हमें कुछ ऐसे 2-3 पूर्व न्यायाधीशों के नाम सुझाएं, जिन्हें कमेटी का मुखिया बनाया जा सके. जस्टिस लोढ़ा हो सकते हैं. जस्टिस सदासिवम का कहना है कि वह हिंदी नहीं समझ सकते. हमें कुछ और नाम दें.
किसानों के वकीलों की तरफ मुखातिब होते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा कि वह किसान संगठनों से बात करके बताएं कि क्या वो कमेटी के सामने पेश होंगे या नहीं.

Advertisement

Advertisement

()