इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे के दिन इस से बेहतर कुछ नहीं हो सकता था. देश की सुप्रीमकोर्ट ने रेप के कानून में मौजूद एक बड़े 'लूप-होल' को खत्म कर दिया है. अब भारतमें 18 साल से कम उम्र की लड़की से सेक्स रेप ही कहलाएगा, हर परिस्थिति में. इस सेपहले रेप के कानून (IPC 375) में एक ऐसा प्रावधान था, जिसके तहत 18 साल से कम उम्रमें ब्याह दी गई लड़कियों से सेक्स रेप नहीं कहलाता था.11 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ताने IPC की धारा 375 की एक अपवाद स्थिति (exception clause 2) को देश के दूसरेकानूनों के खिलाफ बताया. साथ ही कहा कि इससे लड़कियों के अपने शरीर पर हक काउल्लंघन होता है. लेकिन कोर्ट ने ये साफ किया कि वो मैरिटल रेप के पर अपनी रायफिलहाल नहीं रख रहा है.क्या समस्या थी कानून में?IPC का सेक्शन 375 सेक्शुअल ऑफेंस के मामलों में लागू होता है. इसके exceptionclause (2) तहत किसी आदमी का नाबालिग़ लड़की से सेक्स अपराध नहीं माना जाता था,बशर्ते वो 15 साल से ऊपर की उम्र की हो और उस आदमी की पत्नी हो. इन लड़कियों का बचपनतो शादी छीन ही लेती थी, लेकिन इस प्रावधान से इनके सेक्शुअल राइट्स भी धरे रह जातेथे, क्योंकि भारत में मैरिटल रेप को कानूनन अपराध ही नहीं माना जाता. ये लड़कियांफिर अपने ऊपर होने वाले ज़ुल्म के खिलाफ कानून की मदद भी नहीं ले पाती थीं. भारत में आज भी बड़ी संख्या में बच्चों की शादी हो जाती है. पिक्चर: Reutersसबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि हमारे देश में दो-दो ऐसे कानून मौजूद थे जिनका येप्रावधान साफ़ मखौल उड़ाता था. बाल विवाह रोकने के लिए प्रिवेंशन ऑफ़ चाइल्ड मैरिजेसएक्ट लागू है. लड़कियां 18 और लड़के 21 के होने से पहले शादी नहीं कर सकते. इसलिए'बशर्ते..उस आदमी की पत्नी हो' वाली बात का सवाल ही नहीं उठाना चाहिए था. दूसरा,प्रिवेंशन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंस एक्ट 2012 (POCSO) के तहत किसी भीनाबालिग़ के साथ सेक्स अपराध माना जाता है. ऐसे में भी 375 वाली छूट उलझन पैदा करतीथी.कृष्णा. 13 साल की उम्र में ब्याह दी गई थीं. पिक्चर: Reutersबचपन बचाओ आंदोलन नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिलकर के इस कानूनी 'लूप-होल' को दूर करने के लिए कहा था ताकि कच्ची उम्र में ही शादीमें बांध दी जाने वाली लड़कियों के एक नाबालिग़ और एक लड़की के तौर पर हक बने रहें.जनवरी, 2107 को कोर्ट ने इस मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से कहा था किवे चार महीनों में फैसला लें.महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पिछले साल मैरिटल रेप के मामले में निराश कर चुकाहै. पिछले साल जब मैरिटल रेप को कानूनन अपराध बनाने की बात हुई, तो सरकार के हीमंत्रियों ने बचकाने बयान देने शुरू कर दिए थे.मेनका गांधी का मार्च 2016 में दिया बयान.इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए. क्योंकि यहां सवाल इसका नहीं है कि आप अपनीमर्ज़ी से अपने साथी के साथ कैसी ज़िन्दगी जीते हैं, बंद कमरों में क्या करते हैं.यहां सवाल है उन लोगों को इन्साफ मिलने का जिन पर हुए ज़ुल्मों के अपराधी खुले आमघूमते हैं, क्योंकि हम एक ढंग का कानून नहीं बना पाए.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें'किसी के कपड़ों का मतलब हां नहीं होता'दिल्ली के एक लड़के के साथ बेरहमी से रेप किया गया है और रेपिस्ट को कोई सजा नहींहोगीचमचमाती दिल्ली का एक स्याह कोना, जहां डर पसरता है