सुप्रीम कोर्ट ने फिर सरकार को हड़काया, कहा ये सरकार है या पंचायत?
विकलांगों से जुड़े मसलों पर पूछा, कौन सा मंत्री फाइलों पर चढ़ा बैठा है.
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फोटो - thelallantop
सुप्रीम कोर्ट इस समय फॉर्म में है. सरकार को लगातार फटकार लगा रही है. अभी उसने कहा था कि सरकार दो सालों में भी लोकपाल क्यों नहीं बना पाई है. इससे पहले सरकार ने जिन हाई-कोर्ट जजों के नामों को खारिज किया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने फिर से लौटा दिया था.
अब सुप्रीम कोर्ट ने विकलांगों को लेकर सरकार को डांट लगाई है. उसने सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि वो कौन सा मंत्री है जो विकलांगों के वेलफेयर से जुड़ी फाइलों के ऊपर चढ़ा बैठा है.
वैसे सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा था कि सरकार ने विकलांगों की बेहतरी के लिए कई स्टेप लिए हैं लेकिन टीएस ठाकुर की बेंच लगातार मंत्री का नाम पूछ रही थी. रंजीत कुमार ने बताया मंत्री का नाम थावर चंद गहलोत है. गहलोत मोदी सरकार में सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्टर हैं.
कोर्ट ने ये तक कह दिया कि ये भारत सरकार है या कोई पंचायत. ऐसी चीजें हमेशा नहीं होती कि कोर्ट सरकार से किसी कैबिनेट मिनिस्टर का नाम पूछे. लेकिन कोर्ट अगर चाहे तो ऐसा कर सकती है.
असल में कोर्ट में कई पीआईएल (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन) फाइल की गई थीं. जिसमें विकलांगों को यूनिवर्सल एक्सेस और बराबरी के अवसर देने की बात की गई थी. सरकार ने दिसम्बर 2015 में दिव्यांगों के लिए Accessible India Campaign शुरू किया था. इसमें जुलाई 2018 तक पचास फीसदी सरकारी बिल्डिंग में उनके आने-जाने को आसान बनाने की बात थी.
बेंच ने ये भी पूछा कि डिसेबिलिटी लॉ के लिए बनी सेंट्रल कमेटी की आज तक कोई मीटिंग क्यों नहीं हुई है. इसीलिए उसने मंत्री का नाम पूछा कि कौन इसे देख रहा है.
रंजीत कुमार ने कहा कि 2014 में Rights of the persons with Disabilities Bill पेश करने के बाद मीटिंग नहीं हो पाई. कुमार ने पिछली सरकार पर भी आरोप जड़ दिया कि पिछली सरकार ने इसके लिए कुछ नहीं किया.आखिरी मीटिंग 2012 में हुई थी.
कोर्ट ने कहा कि ये तो हद है कि पिछले चार सालों में कोई मीटिंग नहीं हुई है. रंजीत कुमार ने ये बात मानी कि मीटिंग में लम्बा गैप हो गया है और कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि मीटिंग 29 नवम्बर को होगी. कोर्ट ने कहा कि मीटिंग की रिपोर्ट 14 दिसंबर को कोर्ट में सबमिट की जाए.
ये स्टोरी निशान्त ने की है.
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