The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Supreme Court said Resignation Not Final Until Employee Communicated Acceptance

इस्तीफा स्वीकार होने से पहले अगर कर्मचारी ने वापस ले लिया, तो मंजूर नहीं माना जाएगा

ये फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे के एक कर्मचारी की बहाली को मंजूरी दी है. कहा है कि अगर इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था, तो आधिकारिक रूप से इसकी खबर कर्मचारी को देनी थी.

Advertisement
Supreme Court on Resignation
सुप्रीम कोर्ट की सांकेतिक तस्वीर. (फोटो - इंडिया टुडे)
pic
हरीश
17 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 05:19 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में अपने एक फैसले में कहा है कि अगर कोई कर्मचारी आधिकारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार होने से पहले उसे वापस ले लेता है, तो उसका इस्तीफा स्वीकार्य नहीं माना जाएगा. ये फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने रेलवे के एक कर्मचारी की बहाली को मंजूरी दी है. कोर्ट ने ये भी कहा कि कर्मचारी के इस्तीफे को लेकर सिर्फ इंटरनल कम्यूनिकेशन को ऑफिशियल स्वीकृति नहीं कही जा सकती. ऐसी स्वीकृति के बारे में कर्मचारी को आधिकारिक रूप से बताया जाना चाहिए.

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस पंकज मित्तल की पीठ ने मामले की सुनवाई की थी. पीठ ने कहा कि चूंकि अपीलकर्ता ड्यूटी पर रिपोर्ट करता था और रेलवे के साथ लगातार संपर्क में था. इसलिए, ये नहीं कहा जा सकता कि अपीलकर्ता ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा, अपीलकर्ता को रेजिग्नेशन लेटर स्वीकार किए जाने की कोई खबर नहीं दी गई.

लाइव लॉ की एक खबर के मुताबिक, जस्टिस नरसिम्हा ने अपने फैसले में आगे कहा,

Embed

इस तरह, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के सिंगल जज के फैसले को मंजूरी दे दी.

पूरा मामला क्या है?

दरअसल, याचिकाकर्ता रेलवे कर्मचारी ने 1990 में कोंकण रेल निगम में अपनी जॉब शुरू की. 23 साल काम करने के बाद, दिसंबर 2013 में उन्होंने इस्तीफा दिया. कहा कि इस्तीफे को एक महीने पूरे होने के बाद प्रभावी माना जाए. हालांकि रेजिग्नेशन लेटर को अप्रैल 2014 में स्वीकार किया गया, लेकिन याचिकाकर्ता को इस तरह की किसी स्वीकृति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई.

इसके बाद मई 2014 में याचिकाकर्ता ने अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए एक लेटर लिखा. लेकिन रेलवे का कहना था कि जुलाई 2014 से कर्मचारी को कार्यमुक्त कर दिया. अब रेलवे ने अप्रैल 2014 से रेजिग्नेशन लेटर स्वीकार तो कर लिया, लेकिन याचिकाकर्ता को 28 अप्रैल, 2014 से 18 मई, 2014 तक उसकी अनअथॉराइज्ड अब्सेंस के चलते ऑफिस में रिपोर्ट करने के लिए भी कहा गया. इसके बाद 19 मई, 2024 को भी कर्मचारी ने रिपोर्ट किया.

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चूंकि, दिसंबर 2013 को भेजा गया उनका इस्तीफा कभी स्वीकार ही नहीं किया गया, इसलिए उन्हें नौकरी से हटाया नहीं जा सकता.

उन्होंने कहा कि वो रेलवे के संपर्क में था और यहां तक कि (अनअथॉराइज्ड अब्सेंस पर) बुलाए जाने के बाद वो ड्यूटी पर भी पहुंचा. इससे पता चलता है कि रेलवे ने कभी इस्तीफा स्वीकार ही नहीं किया.

ये भी पढ़ें - "लड़कियां अपनी यौन इच्छाओं पर काबू रखें", HC के कॉमेंट पर सुप्रीम कोर्ट ने जजों को सुनाया

सेवा से मुक्त किए जाने के खिलाफ पहले कर्मचारी ने हाई कोर्ट का रुख किया था. यहां सिंगल जज की बेंच ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया था. अपने फैसले में बेंच ने कहा था,

Embed

हालांकि, हाई कोर्ट में दो जजों की बेंच ने इस फैसले को पलट दिया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अब फैसला आया है.

वीडियो: अरविंद केजरीवाल को बेल देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने CBI पर क्या टिप्पणी की?

Advertisement

Advertisement

()