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सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया - नेताओं को स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा

14 विपक्षी पार्टियां केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थीं. कोई राहत नहीं मिली.

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SC Refuses To Entertain Plea Of 14 Opposition Parties Against Misuse Of CBI & ED
धरने पर बैठी विपक्षी पार्टियां (File photo/PTI)
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पुनीत त्रिपाठी
5 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 5 अप्रैल 2023, 08:43 PM IST)
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बीते कई महीनों से विपक्षी पार्टियां लगातार केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगा रही थीं. बीते दिनों ये पार्टियां एक कदम आगे बढ़कर अपनी फरियाद सुप्रीम कोर्ट ले गईं, जहां उनके हाथ निराशा लगी है. 

कांग्रेस समेत 14 विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई अपनी याचिका में कहा था कि मोदी सरकार केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों का बेज़ा इस्तेमाल कर रही है, ताकि विपक्ष के ऐतराज़ को दबाया जा सके.

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी परदीवाला की खंडपीठ ने कहा कि ठोस तथ्यों के अभाव में कोई गाइडलाइन जारी नहीं की जा सकती. क्योंकि ऐसे में कानून के सिद्धांत निर्धारित करना खतरनाक होगा. बेंच ने ये भी कहा कि राजनेता चाहें तो अपने स्पेसेफिक मामले लेकर कोर्ट आ सकते हैं. लेकिन उन्हें कोई कोई जनरल इम्यूनिटी नहीं दी जा सकती.  

याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस के अलावा, तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस), नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी), झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), सीपीआईएम, सीपीआई, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और शिवसेना (उद्धव बासासाहेब ठाकरे) शामिल थे. इनकी ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी पैरवी के लिए पहुंचे थे. 

विपक्ष की दलील में क्या-क्या था?

बार एंड बेंच में छपी ख़बर के मुताबिक अपनी याचिका में अभिषेक मनु सिंघवी ने कुछ स्टैट्स भी पेश किए. उन्होंने अपनी दलील में बताया -  

- एजेंसियों ने जो छापे डाले, उनके बाद कानूनी कार्रवाई का दर 2005-2014 में 93 प्रतिशत था. ये 2014-2022 में घटकर 29 प्रतिशत हो गया है.

- 2013-14 में ईडी द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की संख्या 209 थी. 2020-21 में ये 981 और 2021-2022 में ये 1180 हो गई. हालांकि, इसके बावजूद अबतक सिर्फ 23 लोगों पर दोष सिद्ध हुए हैं.

- 2004-14 के बीच, सीबीआई द्वारा जिन 72 नेताओं की जांच की गई, उनमें से 43 (60 प्रतिशत से कम) उस समय विपक्ष में थे. अब यह आंकड़ा 95 फीसदी से ज्यादा हो गया है.

- राजनेताओं के खिलाफ ईडी की जांच में विपक्षी नेताओं का परसेंटेज 2014 से पहले 54 प्रतिशत था. ये अब बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया है.

अभिषेक ने अपनी याचिका में ये भी बताया कि पिटीशन डालने वाली पार्टियां 42 प्रतिशत मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और इससे उन मददाताओं पर भी असर पड़ता है. अभिषेक ने कोर्ट से कहा -

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सिंघवी ने ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाओं द्वारा की गई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने मांग की, कि गिरफ्तारी में ट्रिपल टेस्ट किया जाना चाहिए. ट्रिपल टेस्ट में देखा जाता है कि क्या संबंधित आरोपी के भागने का खतरा है, क्या वो सबूत को टैंपर कर सकता है या वो गवाहों पर प्रभाव डाल सकता है.

सिंघवी की दलीलों के जवाब में खंडपीठ ने कहा -

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कोर्ट ने आगे कहा कि पिटीशनर्स स्टैटिस्टिक्स के लिहाज से गाउडलाइन्स बनवाने की कोशिश कर रहे हैं.

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अंततः अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी पिटीशन वापस लेने का आग्रह किया. और कोर्ट ने इसकी मंजूरी दे दी. 

इस मामले पर एआईएमआईएम (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कहा - 

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केंद्रिय मंत्री अनुराग ठाकुर ने फैसले के बाद कहा - 

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