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अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद पर पंचायती की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों को दी

सभी के बारे में विस्तार से जानकारी है, पढ़ लीजिए...

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8 मार्च 2019 (अपडेटेड: 8 मार्च 2019, 12:11 PM IST)
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श्रीराम पंचू, पूर्व जस्टिस कलिफुल्ला, श्री श्री रविशंकर अयोध्या मामले पर मध्यस्था करेंगे
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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर मध्यस्थता कराने का फैसला किया है. मतलब सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों का एक पैनल बनाया है, और उनसे कहा कि मामले से जुड़े सारे पक्षकारों से कोर्ट के बाहर बात करें और उस बातचीत से क्या निकला हमें बताएं. ये पैनल सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करता रहेगा. जिन तीन लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता करने की जिम्मेदारी दी है उनके नाम हैं इब्राहिम कलीफुल्ला, श्री श्री रविशंकर और श्रीराम पंचु. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला इस पैनल के हेड होंगे. आर्ट ऑफ लिविंग वाले श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचु पैनल के दो और सदस्य हैं. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संवैधानिक बेंच इस मामले को सुन रही है. पिछली सुनवाई के दौरान जब मध्यस्थता यानी पंचायती की बात उठी तो कुछ पक्षों ने इस पर ऐतराज जताया. मोटा-मोटी इस मामले के तीन पक्षकार सबसे अहम हैं. वो हैं निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड . इनमें से निर्मोही अखाड़ा को मध्यस्थता से कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन रामलला विराजमान किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए राजी नहीं था. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मध्यस्थता को लेकर अपनी चिंताएं कोर्ट के सामने रखी थी. और कहा था कि हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाए. वक्फ बोर्ड ने कहा था कि अगर मध्यस्थता पैनल बनता है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक न हों और मीडिया में भी उसकी कोई रिपोर्टिंग न हो. सुप्रीम कोर्ट ने ये दलीलें मान लीं. मतलब ये कि अब मध्यस्थता पैनल की जो भी रिपोर्ट होगी वो बाहर नहीं आएगी. सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास जाएगी और इस पैनल की मध्यस्थता की कोई मीडिया रिपोर्टिंग नहीं होगी.
मामले पर एक सप्ताह में कार्रवाई शुरू होगी. 4 हफ्ते के भीतर पैनल को डेवलपमेंट रिपोर्ट देनी होगी और 8 हफ्ते के अंदर अपनी फाइनल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप देनी होगी. जो पांच जज इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं उसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर हैं. अब उन तीन नामों के बारे में जानिए जिनका पैनल अयोध्या मामले की मध्यस्थता करेगा.
पहला नाम है श्री श्री रविशंकर का. आर्ट ऑफ लिविंग के हेड और आध्यात्मिक धर्मगुरू. कई बार उन्होंने खुद आगे आकर इस बात का ज़िक्र किया कि वो अयोध्या मामले पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं. जिसके बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने इनका नाम मध्यस्थता के लिए तय कर दिया. अब मध्यस्थता की ज़िम्मेदारी श्री श्री रविशंकर के कंधे पर डालने के बाद निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा ने श्री श्री रविशंकर के नाम का विरोध कर दिया है. AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि श्री श्री रविशंकर निष्पक्ष नहीं हैं.
श्री श्री रविशंकर काफी समय से अयोध्या मामले में मध्यस्था करने की बात कर रहे हैं
श्री श्री रविशंकर काफी समय से अयोध्या मामले में मध्यस्था करने की बात कर रहे हैं

दूसरा नाम है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला का. जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला इस पैनल को हेड भी करेंगे. जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला, जजों की बिरादरी में काफी जाना माना नाम है. मूल रूप से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले से आते हैं. 23 जुलाई 1951 को जन्मे कलीफुल्ला जम्मू कश्मीर के हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं. जस्टिस कलीफुल्ला अपने कई फैसलों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ही बीसीसीआई को पारदर्शी बनाने के लिए जस्टिस लोढा कमेटी की सिफारिश पर महत्वपूर्ण फैसला दिया था. इसी फैसले के बाद बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था. उनके साथ ही कई और लोगों को बीसीसीआई से हटना पड़ा था. इब्राहिम कलीफुल्ला अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बनाए गए थे. जिसके बाद वो जुलाई 2016 में रिटायर हो गए. अब उनके ऊपर अयोध्या विवाद सुलझाने में सभी पक्षों से बात करने की ज़िम्मेदारी है.
कलीफुल्ला ने बीसीसीआई को पारदर्शी बनाने के लिए जस्टिस लोढ़ा के साथ मिलकर काम था
कलीफुल्ला ने बीसीसीआई को पारदर्शी बनाने के लिए जस्टिस लोढा के साथ मिलकर काम था

तीसरा नाम है वकील श्रीराम पंचु का. वकालत की दुनिया में श्रीराम पंचु एक बड़ा नाम है. पंचु कई बड़े केसों में मध्यस्थता कर चुके हैं. श्रीराम पंचु कमर्शियल से लेकर कॉर्पोरेट और कॉन्ट्रेक्चुअल विवाद के कई केसों में मध्यस्थता कर चुके हैं. इसमें प्रॉपर्टी, दिवालियापन, फैमिली बिजनेस विवाद, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी के विवाद शामिल हैं. इतना ही नहीं श्रीराम पंचु ने कई इंटरनेशनल कमर्शियल डिस्प्यूट में भी मध्यस्थता की है. श्रीराम पंचु खासकर असम और नागालैंड की के बीच के बॉर्डर विवाद पर मध्यस्थता के लिए जाने जाते हैं. मध्यस्थता की ज़िम्मेदारी तब भी उन्हें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई थी.
श्रीराम पंचू ने 500 स्क्वायर किलोमीटर के विवाद को सुलझाया था
सीनियर वकील श्रीराम पंचु, मध्यस्थता मामलों के जानकार माने जाते हैं

वैसे इससे पहले भी अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश की गई लेकिन अलग-अलग पक्षों की तरफ से असहमति की वजह से बात नहीं बन पाई थी.
तारीख थी 6 दिसंबर 1992. अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा कुछ ही घंटों में ढहाकर वहां एक नया, अस्थायी मंदिर बना दिया गया. मस्जिद तो साल 1992 में गिराई गई लेकिन विवाद उससे भी पुराना है.


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