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योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया!

27 जनवरी, 2007 को गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था, आरोप था कि दंगा योगी के भाषण के बाद भड़का था!

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26 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 26 अगस्त 2022, 01:15 PM IST)
Supreme Court order on UP CM Yogi Adityanath in Gorakhpur Riots case
सुप्रीम कोर्ट ने सीएम योगी को दी राहत (फोटो: आजतक और पीटीआई)
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) पर 15 साल पुराने हेट स्पीच मामले में मुकदमा दर्ज होगा या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगने वाली याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में मेरिट नहीं है.

योगी आदित्यनाथ पर भड़काऊ भाषण का मामला

बता दें कि योगी आदित्यनाथ पर साल 2007 में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था, जब वे गोरखपुर के सांसद थे. 27 जनवरी, 2007 को गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा (2007 Gorakhpur Riot) हुआ था. इस दंगे में दो लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए थे. इस दंगे के लिए योगी आदित्यनाथ, उस दौरान विधायक रहे राधा मोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था. आरोप था कि इनके भड़काऊ भाषण के बाद ही दंगा भड़का था. 

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी. एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंपी थी, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इसे किसी अन्य एजेंसी को सौंपे जाने की मांग की थी.

इस दौरान अंजू चौधरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने काफी दिनों तक मामले की जांच पर रोक लगा दी थी, ये रोक 2008 से 2012 तक रही. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे वापस ले लिया था.

बीजेपी की सरकार बनने के बाद क्या हुआ था?

फिर 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ. नई सरकार बनने के बाद इस मामले में मुकदमा दायर करने पर रोक लगा दी गई थी. यूपी सरकार ने योगी आदित्यनाथ को अभियुक्त बनाने से ये कहकर मना कर दिया था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी साल 2018 में उस याचिका को ही खारिज कर दिया था, जिसमें दंगों में योगी की भूमिका की जांच कराए जाने की मांग की गई थी.

इस मामले में योगी पर मुकदमे की इजाजत न देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. आजतक की सृष्टि ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने 24 अगस्त को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार, 24 अगस्त को इस मामले में सुनवाई के दौरान सीएम योगी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि योगी अब मुख्यमंत्री बन गए हैं, इसलिए बात को बेवजह खींचा जा रहा है. उन्होंने दलील दी थी कि सालों चली जांच के बाद सीआईडी को तथ्य नहीं मिले, उस दौरान राज्य में दूसरी पार्टियों की सरकार थी. 

वीडियो- नेतानगरी: इंडिया टुडे मूड ऑफ दी नेशन में BJP-कांग्रेस को कितनी सीटें? सीएम योगी पर दो अलग-अलग बातें क्यों?

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