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सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत पर सुनवाई करते हुए ED-CBI से क्या सवाल पूछे?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया के खिलाफ दी गई दलील एक अनुमान है, जबकि ये सब कुछ सबूतों पर आधारित होना चाहिए.

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5 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 5 अक्तूबर 2023, 07:07 PM IST)
Supreme Court on Manish Sisodia bail
मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई अब 12 अक्टूबर को होगी. (फाइल फोटो: PTI और आजतक)
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संजय सिंह की गिरफ्तारी के पहले से मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) दिल्ली शराब नीति में कथित घोटाले के आरोपी हैं. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में उनकी जमानत याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई हुई. सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस SVN भट्टी की बेंच कर रही है. बेंच ने इस दौरान कथित घोटाले की जांच कर रही एजेंसियों से कई सवाल पूछे. ये भी तय किया कि अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.  

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ सरकारी गवाह के बयान के अलावा और क्या सबूत हैं. कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि इस मामले में मनीष सिसोदिया की भूमिका है. ये भी पूछा कि सिसोदिया के पास पैसा नहीं जा रहा है, तो उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कैसे लाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया के खिलाफ दी गई दलील एक अनुमान है, जबकि ये सब कुछ सबूतों पर आधारित होना चाहिए. 

ये भी पढ़ें- 'राजनीति जेल भेजने से सफल हो रही, फिर कोई स्कूलों पर ध्यान क्यों दे'- सिसोदिया का ओपन लेटर

'दो सवाल भी झेल नहीं पाएगा केस'

सुप्रीम कोर्ट का ये भी सवाल था कि क्या किसी नीतिगत निर्णय को यहां पेश किए गए तरीके से कानूनी तौर पर चुनौती दी जा सकती है. वहीं CBI और ED की ओर से पेश हुए ASG एस.वी राजू ने कहा कि नई शराब नीति कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से बनाई गई थी. ASG ने कहा कि एक तरफ शराब नीति बदलने की बात चल रही थी और इसके साथ ही विजय नायर की ओर से रिश्वत मांगी जा रही थी. ASG ने आरोप लगाया कि विजय नायर सिसोदिया की तरफ से काम कर रहे थे.

इस पर जस्टिस खन्ना ने पूछा,

“ये किसका बयान है? यह उनकी राय है. जिरह में दो सवाल होगा और ये केस टिक नहीं पाएगा. यह एक राय है, एक अनुमान निकाला गया है.”

सिसोदिया की भूमिका पर क्या बोले जज?

दिल्ली शराब नीति में बदलाव पर जस्टिस खन्ना बोले,

"हम समझते हैं कि नीति में बदलाव हुआ. व्यापार के लिए अच्छी नीतियों का हर कोई समर्थन करेगा. दबाव बनाने वाले ग्रुप हमेशा मौजूद रहते हैं. अगर नीति गलत भी है और उसमें पैसा शामिल नहीं है, तो यह अपराध नहीं है. पैसे वाला हिस्सा ही इसे अपराध बनाता है."

जस्टिस खन्ना ने मामले की सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि इन सबमें विजय नायर तो हैं, लेकिन मनीष सिसोदिया नहीं हैं. साथ ही, ASG से सवाल किया कि सिसोदिया को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कैसे लाया जाएगा. कोर्ट ने जांच एजेंसियों को सबूतों की एक कड़ी बनाने को कहा जिससे साबित हो सके कि शराब लॉबी से पैसा सिसोदिया तक पहुंचा.

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