अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति में हैं, क्या केंद्र के पास कोई नेशनल प्लान है?
ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था.
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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कोरोना संकट में वैक्सीन को लेकर उठाए गए कदमों पर हिसाब मांगा है. पूछा है कि वैक्सीन की सरकार की पॉलिसी क्या है.
फोटो- आजतक
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना संकट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. गुरुवार (22 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि देश में इस समय राष्ट्रीय आपातकाल जैसे हालात हैं, ऐसे में सरकार के पास कोविड-19 से निपटने के लिए क्या कोई नेशनल प्लान है. चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एसआर भट्ट की 3 सदस्यीय बेंच ने 4 बड़े मुद्दों पर केंद्र से जवाब मांगा है. इस मामले में कोर्ट ने वकील हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी यानी न्यायमित्र भी नियुक्त किया है.
दरअसल, तमिलनाडु में ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए मेदांता ने वहां बंद पड़े अपने कॉपर प्लांट को शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 'नेशनल इमरजेंसी जैसे हालात' वाली बात कही. साथ ही इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार से कोई राष्ट्रीय योजना बनाने को कहा.
जिन 4 अहम मुद्दों पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस प्लान को लेकर जवाब मांगा है उनमें ऑक्सीजन की सप्लाई, दवाओं की सप्लाई, वैक्सीन देने का तरीका और प्रक्रिया और लॉकडाउन शामिल हैं. अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल यानी कल होगी. हाई कोर्टों पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट गुरुवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 6 अलग-अलग हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और इसकी वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति है. बता दें कि दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, कलकत्ता, इलाहाबाद और ओडिशा हाई कोर्ट में कोरोना संकट पर सुनवाई चल रही है.
इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हाई कोर्टों के संज्ञान लेने से सब कन्फ्यूजन और डायवर्जन हो रहा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के लॉकडाउन वाले आदेश का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहता है कि हाई कोर्ट ऐसे आदेश पारित करें. चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा लॉकडाउन की शक्ति राज्य सरकारों के पास ही रहनी चाहिए और न्यायपालिका द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
देशभर से ऑक्सीजन की कमी को लेकर खबरें आ रही हैं. फोटो- आजतक
सरकारों पर सख्त दिखे हैं हाई कोर्ट दरअसल, 19 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से राज्य के 5 जिलों में लॉकडाउन लगाने को कहा था. कोर्ट ने सरकार को लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में लॉकाउन लगाने का आदेश दिया था. हालांकि यूपी सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई. इसके बाद लॉकडाउन पर तो रोक लग गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि वो अगले एक हफ्ते में हाई कोर्ट को ये बताए कि उसने कोरोना की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए हैं.
उधर, दिल्ली के अस्पतालों से लगातार ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया हुआ है. इस मुद्दे पर उसने 21 अप्रैल को केंद्र सरकार को जबर्दस्त लताड़ लगाई. दिल्ली के मैक्स अस्पताल समूह ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा था कि उसके अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है और उसके तुरंत ऑक्सीजन चाहिए. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि हमें लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करनी है और हम आदेश देते हैं कि आप उधार लें या चोरी करें, जो करना हो करें, लेकिन आपको ऑक्सीजन देना है. हम लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते.
दरअसल, तमिलनाडु में ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए मेदांता ने वहां बंद पड़े अपने कॉपर प्लांट को शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 'नेशनल इमरजेंसी जैसे हालात' वाली बात कही. साथ ही इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार से कोई राष्ट्रीय योजना बनाने को कहा.
जिन 4 अहम मुद्दों पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस प्लान को लेकर जवाब मांगा है उनमें ऑक्सीजन की सप्लाई, दवाओं की सप्लाई, वैक्सीन देने का तरीका और प्रक्रिया और लॉकडाउन शामिल हैं. अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल यानी कल होगी. हाई कोर्टों पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट गुरुवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में 6 अलग-अलग हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और इसकी वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति है. बता दें कि दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, कलकत्ता, इलाहाबाद और ओडिशा हाई कोर्ट में कोरोना संकट पर सुनवाई चल रही है.
इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हाई कोर्टों के संज्ञान लेने से सब कन्फ्यूजन और डायवर्जन हो रहा है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के लॉकडाउन वाले आदेश का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहता है कि हाई कोर्ट ऐसे आदेश पारित करें. चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा लॉकडाउन की शक्ति राज्य सरकारों के पास ही रहनी चाहिए और न्यायपालिका द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.
देशभर से ऑक्सीजन की कमी को लेकर खबरें आ रही हैं. फोटो- आजतक
सरकारों पर सख्त दिखे हैं हाई कोर्ट दरअसल, 19 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से राज्य के 5 जिलों में लॉकडाउन लगाने को कहा था. कोर्ट ने सरकार को लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में लॉकाउन लगाने का आदेश दिया था. हालांकि यूपी सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई. इसके बाद लॉकडाउन पर तो रोक लग गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि वो अगले एक हफ्ते में हाई कोर्ट को ये बताए कि उसने कोरोना की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए हैं.
उधर, दिल्ली के अस्पतालों से लगातार ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया हुआ है. इस मुद्दे पर उसने 21 अप्रैल को केंद्र सरकार को जबर्दस्त लताड़ लगाई. दिल्ली के मैक्स अस्पताल समूह ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर कहा था कि उसके अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है और उसके तुरंत ऑक्सीजन चाहिए. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि हमें लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करनी है और हम आदेश देते हैं कि आप उधार लें या चोरी करें, जो करना हो करें, लेकिन आपको ऑक्सीजन देना है. हम लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते.

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