The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Supreme court asks BCCI to not act as a monopoly and implment what the Lodha Committee suggests

इंडिया में क्रिकेट बीसीसीआई की बपौती नहीं है - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को हड़काया है. कहा है कि बिहार के साथ ये भेदभाव बंद करो.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
केतन बुकरैत
26 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 19 मई 2016, 02:16 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
आईसीसी में जितने भी पार्टिसिपेट करने वाले देश हैं सभी को एक-एक वोट मिलता है. फ़र्क नहीं पड़ता कि कौन सा देश कितना बड़ा है और कितना छोटा. आईसीसी में बीसीसीआई भी आता है. लेकिन बीसीसीआई में सभी स्टेट क्रिकेट बोर्ड्स के साथ ऐसा नहीं है. इस वक़्त भारतीय क्रिकेट बोर्ड एक मोनॉपली की तरह काम कर रहा है. किसी को फेवर कर रहा है तो किसी के सख्त खिलाफ़ है. ये सब कुछ हम नहीं कह रहे, सुप्रीम कोर्ट कह रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही बीसीसीआई को लोढा कमेटी की हिदायतों को मानने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गुस्से में आके कहा है कि बीसीसीआई को ट्रांसपैरेंट तरीके से काम करना चाहिए. आज के वक़्त में ऐसा होने लगा है कि इंडिया में अगर कोई भी क्रिकेटर बनना चाहता है तो उसे पहले इस बात की चिंता करनी चाहिए कि वो बोर्ड के सही साइड पे है या नहीं. इस वक़्त बोर्ड की दो साइडें हैं. एक, जिनका वो फेवर करती है. और दूसरी जिसके वो खिलाफ़ है. जैसे बिहार. बिहार क्रिकेट बोर्ड को बीसीसीआई ने पूरी तरह किनारे कर के रक्खा हुआ है. जस्टिस आर.एम. लोढा के पैनेल की बातों को सुप्रीम कोर्ट ने देखते हुए कहा कि क्रिकेट बोर्ड को एक स्टेट - एक वोट की पालिसी अपनानी चाहिए. क्यूंकि अगर आईसीसी  ऐसा कर रहा है तो बीसीसीआई क्यूं नहीं? चीफ़ जस्टिस टीएस ठाकुर ने बीसीसीआई को कहा कि "श्री लंका तो दिल्ली का आधा है. क्या आपको नहीं लगता कि आईसीसी में हर देश का अपना एक वोट होता है. ये फ़र्क नहीं पड़ता कि उनकी जनसंख्या कितनी है. अगर ऐसा आईसीसी में हो सकता है तो बीसीसीआई में क्यूं नहीं?" इस बात  पर दो पक्ष उठे. पहला कपिल सिबल का था जो बड़ौदा क्रिकेट असोसियेशन की तरफ से आये थे. उन्होंने कहा कि अगर लोढा कमेटी की बातों को लागू किया गया तो हर स्टेट क्रिकेट बोर्ड को अपना संविधान ही बदलना पड़ेगा. क्यूंकि ये उनके मौलिक अधिकारों के ही खिलाफ़ होगा. दूसरे पक्ष को रखते हुए अरविन्द दातर ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल क्रिकेट में इतनी बड़ी ताकत अगर बना है तो वो सभी स्टेट क्रिकेट बोर्ड्स की मदद से बना है. अरविन्द तमिलनाडु असोसियेशन की ओर से आये हुए थे. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि बीसीसीआई एक ऐसा काम कर रही है जो पब्लिक के लिए है. ऐसे में किसी भी स्टेट के पक्ष या विपक्ष में भेदभाव करते हुए कोई काम नहीं कर सकती. बिहार और कई नॉर्थ-ईस्ट राज्य इस भेदभाव का शिकार हुए हैं.

Advertisement

Advertisement

()