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सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के WhatsApp अकाउंट और मोबाइल नंबर हैक, बार एसोसिएशन में हड़कंप

सदस्यों को सख्त सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह का फंड ट्रांसफर न करें या ऐसे मैसेज का जवाब न दें. साथ ही किसी भी पैसे की रिक्वेस्ट को संबंधित व्यक्ति से सीधे बात करके वेरिफाई करें.

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Whatsapp hack
सांकेतिक तस्वीर. (India Today)
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सौरभ
29 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 12:01 AM IST)
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने वकीलों के लिए एक अर्जेंट अलर्ट जारी किया है. वकीलों ने बताया है कि उनके WhatsApp अकाउंट और मोबाइल नंबर हैक कर लिए गए हैं और धोखेबाजों ने दूसरे वकीलों से पैसे मांगने के लिए उनका इस्तेमाल किया है.

28 जनवरी, 2026 को जारी एक सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि उसे कम से कम चार वकीलों के बारे में जानकारी मिली है कि उनके अकाउंट से छेड़छाड़ की गई है. बार ने कहा कि अभी और भी शिकायतें आ रही हैं. SCBA ने खास तौर पर सदस्यों को बताया कि सीनियर एडवोकेट पार्थिव गोस्वामी और एडवोकेट प्रज्ञा सिंह पारिजात के मोबाइल नंबर हैक कर लिए गए थे और उनके नाम से पैसे मांगने वाले धोखे वाले मैसेज भेजे गए थे.

सदस्यों को सख्त सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह का फंड ट्रांसफर न करें या ऐसे मैसेज का जवाब न दें. साथ ही किसी भी पैसे की रिक्वेस्ट को संबंधित व्यक्ति से सीधे बात करके वेरिफाई करें. यह अलर्ट सदस्यों को फाइनेंशियल फ्रॉड से बचाने और वकीलों को निशाना बनाने वाले साइबर क्राइम के खिलाफ सतर्कता सुनिश्चित करने के हित में जारी किया गया है.

सरकार ने जारी किया था अलर्ट

धोखाधड़ी के लिए वॉट्सऐप का इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है. पिछले महीने ही सरकार ने यूजर्स के लिए अलर्ट भी जारी किया था. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने यूजर्स के लिए चेतावनी जारी की. जिसमें यह बताया गया है कि किस तरह से यह हैकिंग हो सकती है और इससे कैसे बचा जाए. CERT-In ने बताया कि कुछ साइबर अपराधी एक नए तरह का स्कैम और फिशिंग कैंपेन चला रहे हैं. इसमें सबसे पहले किसी यूजर को एक मैसेज भेजा जाता है, जिसमें लिखा होता है - "हाय, यह फोटो देखो". या फिर इससे मिलता-जुलता कोई मैसेज.

मैसेज में दिखाई देता है कि यह लिंक फेसबुक की है. ऐसे में यूजर भरोसा करके इस अनजान लिंक पर क्लिक कर देता है. जो नया पेज खुलता है वह फेसबुक जैसा ही दिखता है, लेकिन असल में वह फेसबुक की नकल होता है. लिंक खुलते ही यूजर से कंटेंट देखने के लिए अपना नंबर वेरिफाई करने के लिए कहा जाता है. यहां जब यूजर अपना नंबर डालते हैं तो एक पेयरिंग कोड आता है. यह कोड शेयर करने पर साइबर अपराधियों को यूजर के अकाउंट का एक्सेस मिल जाता है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: वॉट्सऐप स्कैम इन मैसेज पर क्लिक करेंगे तो पैसे उड़ जाएंगे

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