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सनी लियोनी ने बच्ची गोद ली और लोगों ने अपनी नंगई दिखा दी

‘सारे जहां से अच्छा’ होने का दावा करने वाले मुल्क के बाशिंदे कभी-कभी नीचता का शिखर छू लेते हैं.

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21 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 21 जुलाई 2017, 01:36 PM IST)
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सनी लियोनी. हिंदी फिल्म एक्ट्रेस. 2012 में उनकी पहली हिंदी फिल्म रिलीज़ हुई. तबसे अब तक 5 साल हो गए. दर्जन भर फिल्मों में काम कर चुकी है. लेकिन आज तक उनको अपनी ‘पॉर्न स्टार’ इमेज से छुटकारा नहीं मिल पाया है. भारत की ज़्यादातर जनता आज भी उनका नाम एक सेक्स ऑब्जेक्ट की तरह ही लेती है. इसे भी नज़रअंदाज़ कर दें, लेकिन उसका क्या जब लोग एक अच्छे काम के लिए भी तारीफ़ की ज़गह ज़हर देने पे उतर आएं? टुच्चेपन की, नीचता की कोई हद भी तो होनी चाहिए!
सनी लियोनी ने एक बच्ची को गोद लिया है. 2 साल की जद्दोजहद के बाद उनको एक बच्ची अडॉप्ट करने की इजाज़त मिल गई है. सनी खुश है. सनी के पति डेनियल वेबर भी खुश हैं. लोग दुखी हो गए हैं. एक अनाथ बच्ची का भविष्य संवारने वाले इस कदम की तारीफ़ करने की जगह अपनी गंदी सोच का गटर खोल बैठे हैं. यकीन नहीं आता उन तमाम लोगों पर, जो लिख के मर गए कि भारत कभी सभ्यता का, मनुष्यता का केंद्र रहा है.
सनी ने एक डेढ़ साल की बच्ची को गोद लिया. नाम रखा है निशा कौर वेबर. इस प्यारी सी बच्ची के साथ उन्होंने फेसबुक पर फोटो डाली. कुछ लोगों ने वहां सनी की तारीफ़ भी की. लेकिन कुछ लोग सचमच में नीचता (मुझे इससे ज़्यादा तीखा शब्द सूझ नहीं रहा) पर उतर आए हैं. sl कोई कह रहा है कि ये शर्म की बात है. भारत के अधिकारियों को इसकी परमिशन नहीं देनी चाहिए थी. sl1 एक महिला कहती हैं, “पेरेंट्स के तौर पर वो अपने बच्चों को क्या सिखाएंगे?” sl2 कोई इन मैडम से जा के कहे कि वही सब जो आप-हम सिखाते हैं. झूठ नहीं बोलना है, अच्छे काम करने हैं, मानवता को सबकुछ मानना है वगैरह-वगैरह. करियर क्या चुनना है ये बच्ची खुद डिसाइड कर लेगी. इन साहब को तो सीधे बेजान दारूवाला की सीट हथिया लेनी चाहिए. भविष्य अच्छा बांचते हैं. कहते हैं, हो सकता है ये भी सनी की तरह बने. sl3 ये सरदारजी कौम के लिए परेशान हैं. कहते हैं बच्ची के नाम में ‘कौर’ नहीं लगाना चाहिए था. मां ने सिख समुदाय को शर्मिंदा किया है. उसे ‘कौर’ लगाने का कोई हक़ नहीं. sl4 ऐसे मज़हबी लड़ाकों को ये बिल्कुल नहीं दिखता कि एक बच्ची का फ्यूचर सिक्योर हो रहा है. कुछ और नमूने देखिए. sl5 कितनी दिक्कत है न इन तमाम ‘सभ्य’ लोगों को पॉर्न से! कोई पॉर्न फिल्मों में काम कर चुका है तो वो अवांछित है, अछूत है, समाज में उठने-बैठने लायक नहीं है. जबकि भारत में इंटरनेट पर सबसे ज़्यादा कुछ खोजा जाता है, तो वो है पॉर्न. वेबसाइट को गूगल एनालिटिक्स पर देखते वक़्त हर मिनट में टॉप 10 कीवर्ड्स दिखते हैं हमें. ये वो कीवर्ड्स होते हैं, जो टाइप कर के लोग इंटरनेट पर कंटेंट खोजते हैं. 10 में से 7 या उससे ज़्यादा हर वक़्त सेक्स, पॉर्न से जुड़े होते हैं. कई बार तो इतने गंदे होते हैं कि उबकाई आती है.
सनी लियोनी को पॉर्न फिल्मों में काम करने की वजह से नकारने वाले ये तमाम महानुभव उनकी वो वाली फ़िल्में कई-कई बार देख चुके होते हैं. इतना दोगलापन आता कहा से है! कभी-कभी लगता है कि अगर हम सच में किसी मामले में विश्वगुरु हैं, तो वो ये दोगलई वाला ही महकमा होगा. पॉर्न देखने से हमारी संस्कृति को कुछ नहीं होता, लेकिन पॉर्न में काम करने वालों को समाज का हिस्सा बनाने से वो तत्काल मर जाती है.
सनी का प्रोफेशनल पास्ट जो भी रहा हो, इस बच्ची को गोद लेकर उन्होंने एक बेहतरीन काम किया है. उसके लिए सनी की, उनके पति डेनियल की दिल खोल के तारीफ़ होनी चाहिए. उस बच्ची के अच्छे भविष्य की दुआएं मांगी जानी चाहिए. न कि अपने दिमागी दिवालिएपन की, अपनी गंदी सोच की चौराहे पर नुमाइश लगानी चाहिए. शाबाश सनी और डेनियल!
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