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क्या होता है मास हिस्टीरिया जिसकी वजह से उत्तराखंड के स्कूल में अचानक सिर पटकने लगीं लड़कियां?

स्कूल में स्टूडेंट रोते, चीखते और बेसुध होते दिखे.

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uttarakhand school student
स्कूल के वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट (इंडिया टुडे)
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सुरभि गुप्ता
31 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 31 जुलाई 2022, 05:12 PM IST)
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हाल में उत्तराखंड के एक स्कूल से कुछ बच्चों के बिना किसी वजह एकसाथ रोने, चीखने, जमीन पर लोटने, सिर पटकने और रोते-रोते बेहोश हो जाने की खबर आई. इसमें ज्यादातर छात्राएं थीं. इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ. इसे मास हिस्टीरिया का मामला माना जा रहा है. मास हिस्टीरिया मतलब जब कहीं दो या दो से अधिक लोगों में एक जैसा अजीब या असामान्य बर्ताव, डर जैसी भावना या कोई दूसरे लक्षण सामने आने लगे.

उत्तराखंड के स्कूल में रोते-चीखते बेहोश हुए बच्चे

उत्तराखंड के स्कूल का जो वीडियो सामने आया है. वो बागेश्वर जिले का बताया जा रहा है. आजतक से जुड़े जगदीश पांडे की खबर के मुताबिक स्कूल का नाम रैखोली जूनियर हाईस्कूल है. और रोती-चीखती, बेसुध होती लड़कियां 8वीं क्लास की बताई जा रही हैं.

इस घटना के बाद डॉक्टरों की एक टीम स्कूल पहुंची थी. उन्होंने बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी है. बागेश्वर के डिप्टी सीएमओ हरीश पोखरिया ने बताया कि बच्चों से बात करके पता चला कि वे पहले से घबराए हुए थे और खाली पेट स्कूल आए थे. उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने बच्चों की काउंसलिंग की है. डिप्टी सीएमओ के मुताबिक कुल 8 बच्चों में ये दिक्कत पाई गई थी. इनमें 6 छात्राएं और 2 छात्र थे. आजतक से बातचीत में उन्होंने बताया कि अगर जरूरत पड़ी, तो बच्चों को जिला अस्पताल में रेफर किया जाएगा.

अब उत्तराखंड के स्कूल का ये मामला मास हिस्टीरिया का है या नहीं, ये पूरी जांच के बाद ही साफ होगा. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड में इस तरह के मास हिस्टीरिया के मामले पहले भी अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली जिलों के स्कूलों में देखे गए हैं.

मास हिस्टीरिया में क्या होता है?

हेल्थलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक मास हिस्टीरिया के मामलों में ज्यादातर देखा-देखी और सुनी-सुनाई बातों के जरिए कोई घटना होती देखी गई है. जैसे दूसरों में जो बर्ताव, हरकत या लक्षण लोग देखते या सुनते हैं, अक्सर खुद भी वही करने लगते हैं या महसूस करते हैं. 

कोई खतरा जो असल में न हो, लेकिन उस खतरे के प्रति लोगों के एक समूह में डर हो, ऐसी स्थिति के लिए भी कुछ एक्सपर्ट्स 'मास हिस्टीरिया' शब्द का इस्तेमाल करते हैं.

मास हिस्टीरिया के पीछे कोई अफवाह, हरकत, सोच, डर या खतरा जैसी चीज़ें होती हैं. इसके लक्षण वास्तविक होते हैं, भले ही उसके पीछे असल में कोई खतरा या स्वास्थ्य समस्या न हो. मास हिस्टीरिया के लक्षण अचानक शुरू और खत्म हो जाते हैं. इसके लक्षणों में सीने में दर्द, सुस्ती, सिर दर्द, बेहोशी, कांपना, आंशिक पैरालिसिस, हंसने या रोने लगना शामिल है. जांच-पड़ताल के बाद भी इसमें दिखने वाले लक्षणों या हरकतों की वजह का पता नहीं चलता.

नेपाल के एक स्कूल में बच्चों का रोना और चीखना

मास हिस्टीरिया के तमाम उदाहरणों में लोगों के अचानक चीखने, रोने और बेहोश होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. जैसा कि साल 2018 में नेपाल के एक स्कूल में हुआ था. नेपाल के प्यूथान जिले के स्कूल में एक 9 साल की बच्ची रोने और चीखने लगी थी, देखते ही देखते दूसरे बच्चे भी रोने और चीखने लगे. उस दिन स्कूल में 47 बच्चों को रोते और चीखते हुए पाया गया था. उसी स्कूल में साल 2017 और साल 2016 में भी एक ही दिन कई बच्चों में एक जैसे बर्ताव या लक्षण देखे गए थे. इसे रिपीट होने वाले मास हिस्टीरिया का अनूठा मामला माना गया था.

इसके अलावा, मई, 2001 में राजधानी दिल्ली में मंकीमैन की अफवाह ने भी मास हिस्टीरिया का रूप ले लिया था. लोगों ने सूरज ढलने के बाद घर से निकलना बंद कर दिया था. कई लोगों ने दावा किया था कि उन पर मंकीमैन ने हमला किया. तीन लोगों की मौत हो गई थी, जो डर से भागने के दौरान छत से गिर गए थे. लोगों के शरीर पर नाखून और दांतों के निशान मिले थे. उस समय पुलिस के पास भी कोई सुराग नहीं था. पूरे मामले की जांच के बाद पुलिस ने मंकीमैन को महज एक अफवाह बताया था. बाद के अध्ययनों से साफ़ हुआ कि यह मास हिस्टीरिया था.

मास हिस्टीरिया का कारण क्या है?

अब मास हिस्टीरिया के कारण की बात करें, तो इसकी कोई सटीक वजह का अब तक पता नहीं है. कुछ फैक्टर्स हैं, जो मास हिस्टीरिया में देखे गए हैं. इसमें बहुत ज्यादा स्ट्रेस, एंग्जाइटी, सामाजिक दबाव, ट्रॉमा शामिल है.

मास हिस्टीरिया के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. जब कई लोग अजीब बर्ताव कर रहे हों या समान लक्षणों का अनुभव कर रहे हों, तो स्थिति का आकलन करना और यह निर्धारित करना अहम होता है कि उसकी वजह क्या है. अगर मामला मास हिस्टीरिया का हो, तो उसके लक्षणों को कम करने के तरीके अपनाने और थेरेपिस्ट से मदद मिल सकती है.

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