मोदी की सभा में चिल्लाने वाले को थप्पड़
अंदर थप्पड़ चला तो बाहर अखिलेश यादव की पुलिस ने छात्रों पर लाठियां भांजीं.
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फोटो - thelallantop
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क्या यूनिवर्सिटीज के कैंपस मोदी सरकार के लिए नया विपक्ष बन गए हैं? पता नहीं. लेकिन सरकार की मुश्किलों का जो सिलसिला हैदराबाद यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ, वो जेएनयू से होते हुए सोमवार को बीएचयू तक पहुंच गया.
रोहित वेमुला की विवादित खुदकुशी और JNU में देशद्रोह के आरोप की खबर अब भी फ्रंट पेज पर है, इधर सोमवार को न्यूज चैनलों को प्राइम टाइम डिबेट के लिए संभवत: एक नया मुद्दा मिल गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के कॉनवोकेशन में बोल रहे थे. लेकिन उनकी सभा में एक छात्र को इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने चिल्लाकर छात्र संघ बहाल करने की मांग की थी.
प्रधानमंत्री यूनिवर्सिटी के कॉनवोकेशन में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि वह कई कॉनवोकेशन में जाते हैं, पर यह मौका ज्यादा स्पेशल है. उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत है, शिक्षांत नहीं. इसी बीच एक छात्र खड़ा होकर चिल्लाने लगा. वह मंच से ज्यादा दूर नहीं था. तुरंत दो-तीन लोगों ने उसे पकड़कर, उसका चेहरा दबोचकर उसे चुप कराने की कोशिश की. लेकिन तब तक वह कह चुका था कि, 'मोदी जी हम छात्रों की आवाज सुनिए, छात्र संघ को बहाल कीजिए. यहां छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.' उसे दबोचने वालों में से किसी की आवाज़ जो कैमरा पर रिकॉर्ड हुई, वो थी, 'बस बेटा हो गया.'
मोदी भाषण देकर निकल गए तो छात्र के आगे एक न्यूज एजेंसी ने अपना माइक लगा दिया. लड़के ने कहा, 'छात्रों के हितों का यहां हनन किया जा रहा है. हर रोज उनकी आवाज दबा दी जाती है.' उसने अपना नाम आशुतोष सिंह बताया. अगला सवाल आया कि आप कहां से आए हैं. जवाब आने से पहले किसी ने आशुतोष को पीछे से जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद पुलिस उसे वहां से बाहर ले गई. पीटने वाले को ले गई या नहीं, ये किसी को नहीं पता.https://twitter.com/ANI_news/status/701683377020141568 दीक्षांत समारोह के बाहर बहुजन मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भी हंगामा किया. बताया जाता है कि वे सभा में घुसना चाहते थे, पर भीड़ की वजह से एंट्री नहीं दी गई. हंगामा बढ़ा तो अखिलेश यादव की पुलिस ने उन पर जमकर लाठियां भांजीं. https://twitter.com/ANI_news/status/701671568598921216 प्रधानमंत्री मोदी ने कॉनवोकेशन के भाषण में कहा कि उन्हें BHU से डॉक्टरेट उपाधि का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. लेकिन विनम्रता मोदी के सिपहसालारों और अनुयायियों में नहीं दिख रही है. किसी इवेंट में कोई विरोध प्रदर्शन होता है और वह हिंसक नहीं है, स्याही फेंकने जैसा छिछला भी नहीं है तो क्या यह अपराध हुआ? क्या प्रदर्शन करने वाला थप्पड़ मारे जाने के योग्य है? प्रधानमंत्री ने इसी भाषण में कहा कि वह तो प्रकृति से भी संवाद करने के हिमायती हैं. एक बार विरोधी छात्रों से भी संवाद ट्राई कीजिए सर. नहीं तो अपने उत्साही अनुयायियों से ही बात करिए. https://twitter.com/ANI_news/status/701670481938612224 वैसे इनटॉलरेंस का जो ये वाला रूप है, इसके भी किस्से कम नहीं है और कोई किसी से कम नहीं है. यूपीए के समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जेएनयू आए थे. स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रोग्राम था. लेफ्ट संगठनों के कुछ छात्र वहां काले झंडे लेकर पहुंच गए थे. जैसे ही प्रधानमंत्री ने बोलना शुरू किया, इन्होंने झंडे निकाल लिए और नारेबाजी शुरू कर दी. वहां NSUI के कार्यकर्ताओं ने यही काम किया. प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह पीटा. पुलिस खड़ी देखती रही. सवाल नेताओं का नहीं है. वे राजनीति की बारीकियां और ऊंच-नीच समझते हैं. सवाल उनके फॉलोअर्स का है जो उस पार्टी के मूल्यों को सबसे अनगढ़ और कच्चे रूप में पेश करते हैं. उनका व्यक्तित्व, उनका कृतित्व ही पार्टी का परिचय होता है. उन पर कंट्रोल की जिम्मेदारी कौन लेगा?

