उस रात रॉकी यादव ने किया क्या था, आदित्य के दोस्तों ने बताया
उस रात कार में 5 लोग थे. एक को रॉकी यादव ने मार दिया. बचे चार. उनका आज कोर्ट में लिखित बयान था. देखें.
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फोटो - thelallantop
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आदित्य सचदेवा हत्याकांड हाल के दिनों में बिहार की सबसे चर्चित रोड-रेज की घटना है. आदित्य को इसलिए गोली मार दी गई क्योंकि उसने एक पिस्टलधारी विधायक-पुत्र की कार को ओवरटेक किया था. 'मदर्स डे' पर आदित्य की बिलखती मां की तस्वीरें टीवी चैनलों पर आग की तरह फैलीं और यह दिन की सबसे बड़ी खबर बन गई.
हत्या का आरोप जेडीयू MLC मनोरमा देवी और दबंग बिंदी यादव के बिगड़ैल बेटे रॉकी यादव पर है. पुलिस रॉकी को गिरफ्तार कर चुकी है. पिता बिंदी यादव भी हिरासत में हैं. मनोरमा देवी का गिरफ्तारी वारंट निकल चुका है और वह फरार हैं.
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लेकिन उस रात आखिर हुआ क्या था?
रॉकी यादव ने जब आदित्य सचदेवा को गोली मारी तब आदित्य अकेला नहीं था. उसकी कार में उसके साथ 4 दोस्त और थे. उन चार दोस्तों ने अदालत को उस दिन की घटना का पूरा ब्योरा लिखित में दिया है.
आदित्य के इन चार दोस्तों के नाम हैं, मोहम्मद कैफी, आयुष अग्रवाल, अंकित और नासिर हुसैन.

अदालत में किसने क्या कहा
नासिर हुसैन
हम स्विफ्ट कार नंबर BR 02AC 2699 से बोधगया से गया आ रहे थे. महारानी पेट्रोल पंप के पास हमने एक लैंड रोवर गाड़ी को क्रॉस किया. उसका नंबर था DL1 TEMP AU 7063. हम जब आगे बढ़ गए तो लैंडरोवर के ड्राइवर ने हमसे हॉर्न देकर पास मांगा. लेकिन हम पास नहीं दे सके, क्योंकि सड़क पर ट्रैफिक था. फिर भी वो पास मांगता रहा. फिर हम पुलिस लाइन की तरफ मुड़ गए, जहां एक मंदिर है. जब हम मंदिर क्रॉस कर रहे थे हमने फायर की आवाज सुनी. वो सुनकर हमने कार रोकी. लैंडरोवर का ड्राइवर पिस्टल लहरा रहा था. उसने हमसे कहा कि रुक जाओ वरना शूट कर दूंगा. हम बाहर आए तो देखा कि एक लड़का हाथ में पिस्टल लिए खड़ा था और उसके साथ एक बॉडीगार्ड था, जिसके पास कार्बाइन थी. ड्राइवर ने मुझे और कैफ को पीटना शुरू कर दिया. हाथ में पिस्टल लिए वह चिल्ला रहा था कि उसका नाम रॉकी यादव है और वह बिंदी यादव का बेटा है. मुझे इतना पीटा कि मेरी नाक से खून बहने लगा. हमने एक और गोली की आवाज सुनी. हम डर गए. हमने जल्दी से कार में बैठकर वहां से भाग जाने की कोशिश की. हम गोलियों से बचने के लिए झुक गए. आयुष कार में बैठा था. वो चिल्लाया कि आदित्य को गोली लग गई. फिर हम वहां से भागे और आदित्य को लेकर तुरंत मगध अस्पताल पहुंचे. हम यह देखने के लिए पीछे नहीं मुड़े कि हमलावर कहां गए. अस्पताल पहुंचकर पता लगा कि आदित्य की पहले ही मौत हो चुकी है. उस दिन कार मैं ही चला रहा था.आयुष अग्रवाल
7 मई को मैं, नासिर, कैफी, आदित्य और अंकित बोधगया से गया लौट रहे थे. हम स्विफ्ट कार में थे, लेकिन उसका नंबर मुझे याद नहीं है. महारानी पेट्रोल पंप के पास मैंने सिल्वर कलर की एक लैंडरोवर को क्रॉस किया था.अंकित कुमार
ये रात करीब सवा 8 बजे की घटना है. हम एक बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे. महारानी पेट्रोल पंप पर एक सिल्वर रंग की लैंडरोवर कार को हमने ओवरटेक किया. हम सफेद स्विफ्ट कार में थे. लैंडरोवर तब से हमें ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हम पास नहीं दे सके, क्योंकि ट्रैफिक काफी था.


