The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Stalin raised delimitation issue called meeting in Chennai invited BJP leaders too

परिसीमन पर केंद्र से आर-पार के मूड में एमके स्टालिन, कई राज्यों के CM को बुलाया, BJP वालों को भी

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बीजेपी-शासित ओडिशा के सीएम मोहन चंद्र माझी और NDA के सहयोगी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को भी न्योता दिया है. यह बैठक 22 मार्च को चेन्नई में होगी.

Advertisement
Stalin
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन. (फोटो- India Today)
pic
सौरभ
7 मार्च 2025 (Published: 08:48 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने जनसंख्या आधारित चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) के खिलाफ राजनीतिक दलों की संयुक्त कार्रवाई समिति बनाने की अपील की है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक 7 मार्च को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया सहित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संपर्क किया. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित डिलिमिटेशन यानी परिसीमन के खिलाफ एक संयुक्त कार्रवाई समिति बनाने का आह्वान किया.

सीएम स्टालिन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी को भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं को तो बुलाया ही, बीजेपी के नेताओं को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. स्टालिन ने बीजेपी-शासित ओडिशा के सीएम मोहन चंद्र माझी और NDA के सहयोगी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू को भी न्योता दिया है. यह बैठक 22 मार्च को चेन्नई में होगी.

स्टालिन ने अपनी चिट्ठी में कहा कि 1976 के बाद से डिलिमिटेशन को रोक दिया गया था. 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एक संविधान संशोधन किया था, जिसके तहत 2026 तक लोकसभा सीटों की संख्या (543) को स्थिर रखा गया.

लेकिन अब केंद्र सरकार नई जनसंख्या के आधार पर डिलिमिटेशन करने की योजना बना रही है. इससे उत्तर भारत के उन राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं, जहां जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, जबकि दक्षिणी राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाए हैं.

स्टालिन ने कहा,

"डिलिमिटेशन का गणित बहुत ही चिंताजनक है. अगर इसे हालिया जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर किया गया, तो दक्षिणी राज्यों को बहुत नुकसान होगा."

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने दो संभावित विकल्प भी बताए. उनका कहना है कि या तो 543 सीटों का नए सिरे से बंटवारा किया जाएगा या फिर कुल लोकसभा सीटें 800 से अधिक कर दी जाएं. हालांकि स्टालिन ने ये भी कहा कि दोनों ही स्थितियों में जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण किया, वे नुकसान में रहेंगे.

स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

"डिलिमिटेशन संघवाद (फेडरलिज्म) पर सीधा हमला है. इससे उन राज्यों के साथ नाइंसाफी की जा रही है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को सफलतापूर्वक लागू किया. हम इस लोकतांत्रिक अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे."

स्टालिन की सरकार आगामी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार पर ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगा चुका है और अब ‘डिलिमिटेशन’ को लेकर लगातार हमलावर है. उनका कहना है कि यह न केवल 'अनावश्यक' है, बल्कि संविधान की संघीय व्यवस्था, तमिल भाषा और तमिल जनता पर ‘हमला’ भी है.

केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करती है. उसका कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और तीन-भाषा फॉर्मूला किसी भी छात्र को हिंदी पढ़ने के लिए बाध्य नहीं करता. डिलिमिटेशन को लेकर खुद गृह मंत्री अमित शाह बयान दे चुके है. उन्होंने पहले यह आश्वासन दिया था कि दक्षिण राज्यों की लोकसभा सीटें कम नहीं होंगी. लेकिन स्टालिन इतने से संतुष्ट होते नज़र नहीं आते. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने यह नहीं बताया कि क्या उत्तर भारत के राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी. यदि ऐसा हुआ, तो भले ही दक्षिण की सीटें कम न हों, उनका महत्व घट जाएगा.

वीडियो: सनातन धर्म पर विवादित बयान देने वाले तमिलनाडु CM के बेटे उदयनिधि स्टालिन का पूरा कच्चा चिट्ठा

Advertisement

Advertisement

()